उत्तर प्रदेश

यूपी की सियासत में भूचाल: संजय निषाद के बाद अब ओमप्रकाश राजभर भी मिलेंगे सपा नेता माता प्रसाद पांडे से

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने राज्य की सियासत का पारा अचानक बहुत अधिक बढ़ा दिया है। एनडीए सरकार में सहयोगी दलों के प्रमुख नेताओं की गतिविधियों ने राजनीतिक विश्लेषकों को सोचने पर मजबूर कर दिया है, और इस बार चर्चा का केंद्र बने हैं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर (Om Prakash Rajbhar)। निषाद पार्टी के प्रमुख डॉ. संजय निषाद द्वारा समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडे (Mata Prasad Pandey) से मुलाकात किए जाने के ठीक बाद, अब ओम प्रकाश राजभर ने भी उनके स्वास्थ्य का हाल जानने और मुलाकात करने का ऐलान कर दिया है। उत्तर प्रदेश में सत्ताधारी गठबंधन के भीतर घटित हो रहे इन घटनाक्रमों के बाद से राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अटकलों का बाजार गर्म हो गया है, और लोग यह कयास लगाने लगे हैं कि क्या आने वाले समय में यूपी के पिछड़ों और दलितों की राजनीति करने वाले क्षेत्रीय दल कोई नया समीकरण बनाने की फिराक में हैं।

क्या है संजय निषाद और माता प्रसाद पांडे की मुलाकात की पृष्ठभूमि और क्यों गरमाई है सियासत?

इस पूरी राजनीतिक हलचल की शुरुआत तब हुई जब निषाद पार्टी के अध्यक्ष और योगी सरकार के मंत्री संजय निषाद ने लखनऊ में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता माता प्रसाद पांडे से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय में सामने आई थी जब गोंडा के एक चर्चित हत्याकांड के बाद संजय निषाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए अपनी ही सरकार के खिलाफ तेवर दिखाए थे और धरने पर बैठ गए थे। हालांकि इस मुलाकात को औपचारिक और शिष्टाचार भेंट बताया गया, जिसमें माता प्रसाद पांडे की अस्वस्थता का हवाला दिया गया, लेकिन इसके राजनीतिक मायने बहुत गहरे निकाले जा रहे हैं। संजय निषाद पिछले लंबे समय से अपने समाज के आरक्षण और राजनीतिक हिस्सेदारी के मुद्दों पर मुखर रहे हैं, और कई मौकों पर उनके तीखे बयानों ने एनडीए के भीतर आंतरिक कल ̧ की ओर इशारा किया है। ऐसे में विपक्षी दल के सबसे कद्दावर ब्राह्मण चेहरों में शुमार और नेता प्रतिपक्ष से उनकी इस गुप्त या खुली बैठक ने सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

ओम प्रकाश राजभर के अगले कदम और उनके बयानों से क्यों तेज हुई नई अटकलें?

संजय निषाद के इस कदम के बाद अब सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर का यह कहना कि वे भी जल्द ही सपा नेता माता प्रसाद पांडे से मुलाकात करने जाएंगे, ने इस पूरी कहानी में एक नया मोड़ ला दिया है। हमेशा अपने बेबाक बयानों और राजनीतिक पैंतरेबाजी के लिए जाने जाने वाले राजभर ने हाल ही में संजय निषाद के हालिया बयानों पर चुटकी लेते हुए कहा था कि कोई भी नेता डूबते जहाज पर सवार नहीं होना चाहता, लेकिन खुद उनका विरोधी खेमे के वरिष्ठ नेता से मिलने का फैसला इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय दल अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने के लिए हर संभव विकल्प खुले रखना चाहते हैं। राजभर और संजय निषाद दोनों ही उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में पिछड़ों, अति पिछड़ों और दलित-शोषित जातियों के बड़े नेता माने जाते हैं, जिनका राज्य के कई विधानसभा क्षेत्रों में मजबूत प्रभाव है। चुनाव से पहले इस प्रकार के सियासी मेल-जोल इस बात को दर्शाते हैं कि क्षेत्रीय दल अपनी शर्तों पर दबाव की राजनीति (Pressure Politics) खेलने में माहिर हैं और वे सरकार के भीतर अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करना चाहते हैं।

क्या यह महज शिष्टाचार भेंट है या आने वाले 2027 के चुनाव का कोई बड़ा पूर्वाभ्यास?

राजनीतिक विश्लेषकों का यह मानना है कि उत्तर प्रदेश में जब भी कोई क्षेत्रीय दल का नेता विपक्ष के किसी बड़े नेता से मिलता है, तो उसे केवल व्यक्तिगत शिष्टाचार तक सीमित नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसके पीछे हमेशा एक दूरगामी राजनीतिक संदेश छिपा होता है। माता प्रसाद पांडे समाजवादी पार्टी के एक ऐसे अनुभवी और सम्मानित नेता हैं जिनकी पकड़ राज्य के राजनीतिक समीकरणों और जातीय गणित पर बेहद मजबूत है, और हाल ही में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उनसे मुलाकात की थी। ऐसे में एनडीए के दो प्रमुख सहयोगी मंत्रियों का एक के बाद एक सपा के शीर्ष नेतृत्व के संपर्क में आना इस बात का स्पष्ट संदेश देता है कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए सरकार पर रणनीतिक दबाव बना रहे हैं। हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि ये नेता पाला बदलने जा रहे हैं या नहीं, लेकिन इन मुलाकातों ने यह साबित कर दिया है कि यूपी का सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा, यह आने वाला समय ही तय करेगा और हर छोटी घटना पर सभी की पैनी नजर बनी हुई है।

क्षेत्रीय दलों की दबाव की राजनीति और उत्तर प्रदेश का बदलता हुआ सियासी मिजाज

उत्तर प्रदेश की राजनीति हमेशा से जातियों के समीकरण और क्षेत्रीय क्षत्रपों के इर्द-गिर्द घूमती रही है, जहां हर छोटा और बड़ा दल अपने वजूद को बचाने और बढ़ाने के लिए नए समीकरण तलाशता रहता है। चाहे वह निषाद समाज का आरक्षण मुद्दा हो या फिर पिछड़ों के अधिकारों की लड़ाई, ओम प्रकाश राजभर और संजय निषाद जैसे नेता अपनी राजनीति को धार देने के लिए लगातार जनता के बीच मुखर रहते हैं। माता प्रसाद पांडे से हो रही इन मुलाकातों ने भले ही प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया हो, लेकिन यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यूपी की राजनीति में और भी कई दिलचस्प मोड़ देखने को मिलेंगे। जनता और राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता इस बात पर नजर गड़ाए बैठे हैं कि क्या यह मेल-जोल केवल एक राजनीतिक चाल है या फिर उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों में किसी नए और बड़े राजनीतिक उलटफेर की नींव साबित होने वाली है।

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