इस्लामाबाद में बड़े पैमाने पर हताहतों का अलर्ट: इमरान खान के विरोध प्रदर्शन से पहले अस्पतालों में छुट्टियां रद्द, सर्जरी टलीं

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में राजनीतिक उथल-पुथल और टकराव एक बेहद खतरनाक और हिंसक मोड़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। रावलपिंडी की अदियाला जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के संस्थापक इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर 27 सितंबर 2026 को प्रस्तावित विशाल विरोध मार्च से पहले इस्लामाबाद प्रशासन ने स्वास्थ्य आपातकाल जैसी अभूतपूर्व व्यवस्थाएं लागू कर दी हैं। राजधानी के प्रमुख सरकारी और सैन्य अस्पतालों को किसी भी संभावित गंभीर मानवीय संकट और 'मास कैजुअल्टी इवेंट' (Mass Casualty Event) यानी बड़े पैमाने पर लोगों के हताहत होने की आशंका से निपटने के लिए हाई अलर्ट पर रहने का लिखित निर्देश दिया गया है। गोपनीय आंतरिक प्रशासनिक दस्तावेजों के सार्वजनिक होने के बाद पूरे पाकिस्तान के नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है कि क्या सरकार 27 सितंबर को राजधानी की सड़कों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर बल प्रयोग करने की तैयारी कर रही है।
सभी निर्धारित सर्जरी अनिश्चित काल के लिए स्थगित: सर्जिकल विभागों को तैयार रखने का सख्त फरमान
अंतरराष्ट्रीय खोजी मीडिया आउटलेट 'ड्रॉप साइट' (Drop Site) द्वारा प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों और स्वास्थ्य मंत्रालय के आदेशों के अनुसार, इस्लामाबाद के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों को स्पष्ट हिदायत दी गई है कि वे अपने सभी सामान्य और पूर्व-निर्धारित ऑपरेशनों (Scheduled Surgeries) को तत्काल प्रभाव से अनिश्चित काल के लिए टाल दें। अस्पतालों के सर्जिकल विंग, ट्रॉमा सेंटर्स और इमरजेंसी वार्डों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए पूरी तरह खाली और तैयार रखने का आदेश दिया गया है ताकि संभावित गोलीबारी, आंसू गैस के हमलों या भगदड़ की स्थिति में एक साथ बड़ी संख्या में आने वाले गंभीर रूप से घायल मरीजों का तत्काल इलाज किया जा सके। प्रशासनिक आदेशों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों पर दिखने लगा है, जहां सोमवार से नियमित सर्जरी के लिए भर्ती होने वाले मरीजों को प्रक्रियाएं रद्द होने की सूचना देकर घर वापस भेजा जाने लगा है।
डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की सभी छुट्टियां रद्द: छुट्टी पर गए कर्मियों को तत्काल ड्यूटी पर लौटने का आदेश
अस्पतालों में आपात स्थिति की तैयारी के तहत सभी डॉक्टरों, सर्जनों, नर्सों और सपोर्ट स्टाफ की हर प्रकार की स्वीकृत और गैर-स्वीकृत छुट्टियां तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। संबंधित स्वास्थ्य प्रशासनों को निर्देश दिया गया है कि जो मेडिकल कर्मचारी पहले से अवकाश पर हैं या शहर से बाहर हैं, उन्हें आपातकालीन संदेश भेजकर तुरंत ड्यूटी पर वापस बुलाया जाए। ब्लड बैंकों को सभी ब्लड ग्रुप्स का अतिरिक्त स्टॉक सुरक्षित रखने, आपातकालीन जीवनरक्षक दवाओं का भंडारण करने और अतिरिक्त वेंटिलेटर व आईसीयू बेड तैयार रखने को कहा गया है। हालांकि शहबाज शरीफ सरकार और गृह मंत्रालय ने सार्वजनिक रूप से इस बात का औपचारिक खंडन किया है कि यह अलर्ट विशेष रूप से पीटीआई के खिलाफ किसी क्रैकडाउन की योजना है, लेकिन आंतरिक दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से 'संभावित बड़े मानवीय संकट' और 'व्यापक हताहतों' की तैयारी का उल्लेख होने से आशंकाएं और गहरा गई हैं।
27 सितंबर के इस्लामाबाद मार्च से पहले तेज हुआ क्रैकडाउन: इमरान खान की तीनों बहनें पुलिस हिरासत में
राजधानी के अस्पतालों में यह मेडिकल इमरजेंसी अलर्ट ऐसे समय में आया है जब पूरे पाकिस्तान में पुलिस, रेंजर्स और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने पीटीआई के शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ताओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर धरपकड़ अभियान छेड़ दिया है। प्रशासन ने राजधानी की ओर मार्च को रोकने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के पारिवारिक सदस्यों को सीधे निशाने पर लिया है। पुलिस और सुरक्षा बलों ने इमरान खान की तीनों सगी बहनों—अलीमा खान, नोरिन नियाजी और डॉ. उजमा खान—को उनके परिजनों सहित हिरासत में ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बीते 24 घंटों के भीतर इमरान खान के परिवार के कुल आठ सदस्यों को हिरासत में लिया गया। अलीमा खान के बेटे शेरशाह खान के मुताबिक परिवार के छोटे बच्चों को कई घंटों की कड़ी पूछताछ के बाद छोड़ा गया, जबकि खान की बहनें अब भी कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में बंद हैं।
मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (MPO) के तहत 30 दिनों की नजरबंदी: पीटीआई ने लगाया दमन का आरोप
इमरान खान की बहन अलीमा खान को पाकिस्तान के कठोर 'मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर' (Maintenance of Public Order – MPO) कानून की धारा 3 के तहत हिरासत में लिया गया है। लाहौर के डिप्टी कमिश्नर ने कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक शांति बनाए रखने का हवाला देते हुए उन्हें 30 दिनों तक हिरासत में रखने का औपचारिक आदेश जारी किया है। इसी प्रकार के प्रशासनिक नजरबंदी आदेश नोरिन नियाजी और डॉ. उजमा खान के खिलाफ भी जारी किए गए हैं। पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा से इस्लामाबाद आने वाले सभी मुख्य मार्गों, मोटरवे और जीटी रोड पर भारी कंटेनर लगाकर नाकेबंदी शुरू कर दी गई है। वहीं दूसरी ओर, पीटीआई के नेताओं का कहना है कि सरकार के इन दमनात्मक कदमों, गैर-कानूनी गिरफ्तारियों और अस्पतालों में खौफ का माहौल बनाने के बावजूद 27 सितंबर को लाखों समर्थक अपने नेता की रिहाई और संविधान की बहाली के लिए हर हाल में इस्लामाबाद कूच करेंगे, जिससे राजधानी में बड़े टकराव का खतरा मंडरा रहा है।