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ब्लिंकिट, जेप्टो और स्विगी से सामान मंगाने वालों के लिए राहत: अब ऐप पर दिखेगी एक्सपायरी डेट और पूरी जानकारी, सरकार का सख्त आदेश

नई दिल्ली। अगर आप भी 10 मिनट में दूध, ब्रेड, स्नैक्स, दवाइयां या किराना का सामान मंगाने के लिए ब्लिंकिट (Blinkit), जेप्टो (Zepto), स्विगी इंस्टामार्ट (Swiggy Instamart) या बिगबास्केट (BigBasket) जैसे क्विक कॉमर्स ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए सबसे जरूरी साबित होने वाली है। अक्सर ऑनलाइन ग्रॉसरी मंगाते समय ग्राहकों को यह पता नहीं होता था कि जो पैकेट उनके घर पहुंचने वाला है, उसकी एक्सपायरी कब की है या वह कब बना है। कई बार पैकेट हाथ में आने पर पता चलता था कि ब्रेड या दूध की शेल्फ लाइफ सिर्फ एक दिन बची है। उपभोक्ताओं की इन्हीं लगातार शिकायतों का संज्ञान लेते हुए उपभोक्ता मामले मंत्रालय (Department of Consumer Affairs) और खाद्य सुरक्षा नियामक (FSSAI) ने क्विक कॉमर्स कंपनियों के लिए कड़े दिशानिर्देश लागू कर दिए हैं। अब किसी भी सामान को कार्ट में जोड़ने से पहले ग्राहक को ऐप स्क्रीन पर ही उस प्रोडक्ट की संपूर्ण तकनीकी जानकारी, एक्सपायरी डेट और मैन्युफैक्चरिंग डिटेल्स पारदर्शी रूप से दिखानी होगी।

देश के मेट्रो शहरों से लेकर लखनऊ, जयपुर, इंदौर और पटना जैसे टियर-2 शहरों में क्विक कॉमर्स का बाजार बेहद तेजी से फैला है। लोग सुविधा के फेर में बिना देखे ऑर्डर कर देते हैं, लेकिन डार्क स्टोर्स (Dark Stores) से निकलने वाले सामानों में 'नियर एक्सपायरी' (नजदीकी एक्सपायरी) उत्पादों की डिलीवरी एक गंभीर सिरदर्द बन चुकी थी। सरकार के लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) रूल्स और कंज्यूमर प्रोटेक्शन ई-कॉमर्स नियमों के तहत अब डिजिटल शेल्फ पर भी वही नियम लागू होंगे जो किसी पारंपरिक डिपार्टमेंटल स्टोर के फिजिकल रैक पर लागू होते हैं। इस कदम से ग्राहकों को अपने पैसे का सही मूल्य मिलेगा और वे एक्सपायर या खराब होने की कगार पर पहुंचे खाद्य पदार्थों के सेवन से बच सकेंगे।

अब क्विक कॉमर्स ऐप्स पर क्या-क्या जानकारी देखना होगा अनिवार्य

नए नियामकीय फ्रेमवर्क के अनुसार, अब क्विक कॉमर्स और ई-कॉमर्स कंपनियों को अपनी उत्पाद लिस्टिंग (Product Listing) में केवल नाम और फोटो लगाकर खानापूर्ति करने की अनुमति नहीं होगी। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को उत्पाद के चेकआउट पेज और प्रोडक्ट डिटेल पेज पर निम्नलिखित जानकारियां अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होंगी:

  • एक्सपायरी डेट और बेस्ट बिफोर (Best Before / Expiry Date): पैकेट पर दर्ज अंतिम उपभोग तिथि (दिन, महीना और वर्ष) स्पष्ट रूप से डिजिटल डिस्प्ले पर दिखनी चाहिए।

  • मैन्युफैक्चरिंग डेट और पैकेजिंग तिथि: संबंधित बैच का निर्माण कब हुआ और उसे किस तारीख को पैक किया गया था।

  • मिनिमम शेल्फ लाइफ गारंटी: खाद्य सुरक्षा नियमों के मुताबिक, ग्राहक के घर डिलीवर होने वाले सामान की कुल शेल्फ लाइफ का कम से कम 30 प्रतिशत या न्यूनतम 45 दिन शेष होना अनिवार्य है।

  • एमआरपी और प्रति यूनिट मूल्य (Unit Sale Price): अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) के साथ-साथ प्रति ग्राम, प्रति मिलीलीटर या प्रति किलोग्राम की दर का स्पष्ट विवरण ताकि ग्राहक सही तुलना कर सकें।

  • निर्माता, आयातक और मूल देश (Country of Origin): सामान कहां निर्मित हुआ है, आयातक कौन है और ग्राहक सेवा संपर्क सूत्र (कस्टमर केयर नंबर व ईमेल)।

  • सामग्री और एलर्जी चेतावनी (Ingredients & Allergens): खाद्य पदार्थ में प्रयुक्त सामग्री, शाकाहारी या मांसाहारी का ग्रीन/रेड लोगो और संभावित एलर्जी पैदा करने वाले घटकों का स्पष्ट उल्लेख।

डार्क स्टोर्स की मनमानी और नियर-एक्सपायरी डिस्काउंट के खेल पर रोक

क्विक कॉमर्स कंपनियां आमतौर पर घनी आबादी वाले इलाकों में छोटे वेयरहाउस बनाती हैं, जिन्हें डार्क स्टोर कहा जाता है। हालिया समय में ऐसी शिकायतें आम हो गई थीं कि इन डार्क स्टोर्स में बची हुई पुरानी इन्वेंट्री को भारी डिस्काउंट (जैसे 50% से 70% छूट) का लालच देकर ग्राहकों को खपा दिया जाता था। ग्राहक डिस्काउंट के चक्कर में ऑर्डर कर देते थे और जब पैकेट घर आता था, तो पता चलता था कि उसकी मियाद अगले 24 से 48 घंटों में खत्म होने वाली है।

नियमों के कड़े होने के बाद अब कंपनियां यह बहाना नहीं बना सकेंगी कि वे केवल एक मध्यस्थ (इंटरमीडियरी) हैं। यदि कोई प्लेटफॉर्म नियर-एक्सपायरी प्रोडक्ट को स्पेशल सेल में बेचना चाहता है, तो उसे ऐप पर बोल्ड अक्षरों में यह चेतावनी दर्ज करनी होगी कि इस प्रोडक्ट की शेल्फ लाइफ बहुत कम बची है, ताकि ग्राहक अपनी मर्जी और समझदारी से फैसला ले सके। डार्क स्टोर्स में फीफो (FIFO – First In, First Out) इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली लागू करना और नियमित डिजिटल ऑडिट करना भी अनिवार्य किया जा रहा है ताकि बासी या खराब सामान ग्राहकों के घरों तक न पहुंचे।

भ्रामक विज्ञापनों और प्रतिबंधित सामानों की बिक्री पर FSSAI का कड़ा एक्शन

यह सख्ती केवल एक्सपायरी डेट तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्पादों पर किए जाने वाले चमत्कारी और भ्रामक दावों पर भी नियामक संस्थाओं की पैनी नजर है। हाल ही में भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने अमेज़न, फ्लिपकार्ट, जेप्टो, स्विगी इंस्टामार्ट और बिगबास्केट जैसे बड़े ऑनलाइन प्लेयर्स के खिलाफ कई मामलों में दंडात्मक कार्रवाई शुरू की है। इनमें प्रोसेस्ड फूड्स पर भ्रामक न्यूट्रिशन दावों से लेकर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर गैर-कानूनी ढंग से धतूरे जैसे जहरीले और प्रतिबंधित पदार्थों की लिस्टिंग के गंभीर मामले पकड़े गए थे।

खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत सभी ऑनलाइन फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) को अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले प्रत्येक खाद्य उत्पाद के लिए निर्माता का FSSAI लाइसेंस नंबर प्रदर्शित करना भी अनिवार्य है। यदि कोई कंपनी पैकेज्ड फूड पर 'नेचुरल', 'ऑर्गेनिक' या '100% हेल्दी' जैसे दावे करती है, तो उसके पास इसके नियामक प्रमाणपत्र होने चाहिए, अन्यथा इसे भ्रामक विज्ञापन मानते हुए भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

ऑनलाइन ग्रॉसरी ग्राहकों के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स

अगर आप रोजाना क्विक कॉमर्स ऐप्स के जरिए ताजी सब्जियां, फल, डेयरी उत्पाद या पैक्ड फूड्स मंगाते हैं, तो इन महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखें:

  • ऑर्डर करने से पहले डेट्स चेक करें: ऐप पर प्रोडक्ट की 'Use By' या 'Best Before' तिथि देखकर ही 'Add to Cart' करें।

  • डिलीवरी के समय फिजिकल पैकेट की जांच: जैसे ही डिलीवरी पार्टनर सामान देकर जाए, तुरंत पैकेट के पीछे छपी मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट को अपनी इन-ऐप इनवॉइस से मिलाएं।

  • पैकेजिंग सील और लीकेज: टेट्रा पैक, दूध की थैलियों या सीलबंद डिब्बों में किसी प्रकार की कटिंग, फुलाव (Blown Pack) या दोबारा चिपकाए गए स्टीकर को स्वीकार न करें।

  • शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal): यदि आपको एक्सपायर्ड या खराब सामान डिलीवर होता है, तो संबंधित ऐप के हेल्प सेक्शन में तुरंत फोटो अपलोड कर रिफंड मांगें। समाधान न मिलने पर राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (National Consumer Helpline – 1915) या FSSAI के कंज्यूमर पोर्टल पर सीधी शिकायत दर्ज कराएं।

क्विक कॉमर्स में पूरी जानकारी प्रदर्शित करने का यह नियम न केवल डिजिटल शॉपिंग को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाएगा, बल्कि ग्राहकों के स्वास्थ्य और उपभोक्ता अधिकारों की भी पूर्ण रक्षा करेगा।

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