यूपी में 15 अक्टूबर से खुले में बिकने वाली मिठाइयों पर ‘यूज बाय डेट’ दिखाना होगा अनिवार्य

भारतीय खाद्य सुरक्षा और त्योहारी सीजन की तैयारियों के बीच उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और जनहित को ध्यान में रखते हुए एक बेहद कड़ा, ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। आगामी त्योहारों के सीजन में मिलावटी, पुरानी और सड़ी-गली मिठाइयों की बिक्री पर लगाम कसने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने यह नियम बनाया है कि अब राज्य भर में 15 अक्टूबर से खुली (Non-packaged) मिठाइयों की बिक्री के दौरान उनकी 'यूज बाय डेट' यानी उपभोग की अंतिम तिथि दुकानदारों को प्रदर्शित करनी होगी। खाद्य सुरक्षा विभाग की सचिव और आयुक्त रोशन जैकब (Roshan Jacob) द्वारा जारी किए गए इस सख्त आदेश के बाद से पूरे उत्तर प्रदेश के हलवाइयों, मिठाई विक्रेताओं और दुकानदारों के बीच हड़कंप मच गया है। अक्सर ऐसा देखा जाता है कि त्योहारों के इस पावन अवसर पर मिठाइयों की मांग अचानक आसमान छूने लगती है, जिसका फायदा उठाकर कुछ मुनाफाखोर व्यापारी कई दिनों पुरानी और बासी मिठाइयों को बाजार में बेच देते हैं, जिससे आम जनता का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित होता है। इस नई और सख्त व्यवस्था के लागू होने से न केवल उपभोक्ताओं को शुद्ध और ताजी मिठाइयां मिल सकेंगी, बल्कि खाद्य पदार्थों में होने वाली मिलावटखोरी पर भी बहुत हद तक रोक लगेगी। आइए इस विस्तृत और विशेष रिपोर्ट में जानते हैं कि रोशन जैकब द्वारा जारी किए गए इस नए आदेश के क्या नियम हैं और इसका आम जनता तथा दुकानदारों पर क्या असर पड़ेगा।
रोशन जैकब का सख्त आदेश: 15 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश में लागू होगा नया खाद्य सुरक्षा नियम
उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की प्रमुख सचिव और आयुक्त रोशन जैकब ने अपने महकमे को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि राज्य के हर जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराया जाए। इसी कड़ी में जारी किए गए नए फरमान के अनुसार, आगामी 15 अक्टूबर से उत्तर प्रदेश की सीमा के भीतर जितने भी मिष्ठान भंडार, बेकरी और रेस्टोरेंट हैं, उन्हें अपनी काउंटर पर सजाई जाने वाली खुली मिठाइयों की ट्रे या डिब्बों के बाहर यह साफ-साफ लिखना होगा कि वह मिठाई किस तारीख और समय तक खाने के लिए सुरक्षित है। अभी तक यह नियम केवल पैक बंद (Packaged) खाद्य पदार्थों पर ही लागू होता था, जिसके कारण खुली मिठाइयों के मामले में दुकानदारों की मनमानी चलती थी और ग्राहक चाहकर भी यह नहीं जान पाते थे कि वह मिठाई कितने दिन पुरानी है। खाद्य आयुक्त रोशन जैकब के इस साहसिक और जनहितैषी कदम की हर तरफ सराहना हो रही है, क्योंकि यह सीधे तौर पर आम आदमी की सेहत और जीवन की सुरक्षा से जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा निर्णय है।
त्योहारी सीजन में मिलावट और बासी मिठाइयों के काले कारोबार पर कसेगा शिकंजा
भारत में जैसे ही दीपावली, दशहरा, भैयादूज और अन्य बड़े त्योहारों का दौर शुरू होता है, वैसे ही बाजार में मिलावटी खोआ, नकली दूध और मिठाइयों की मांग तेजी से बढ़ने लगती है। मुनाफा कमाने की होड़ में कुछ बेईमान व्यापारी महीनों पुरानी मिठाइयों को रीसायकल करके या केमिकल का इस्तेमाल करके दोबारा बेच देते हैं, जिन्हें खाने से छोटे बच्चों और बुजुर्गों को फूड पॉइजनिंग, पेट दर्द, दस्त और गंभीर उल्टी जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। 'यूज बाय डेट' (Use By Date) का यह नियम लागू हो जाने के बाद अब कोई भी दुकानदार अपनी ट्रे पर यह तारीख लिखने से बच नहीं सकेगा, और यदि कोई व्यापारी नियमों की अनदेखी करते हुए पुरानी मिठाई बेचता पकड़ा गया, तो खाद्य विभाग की टीम उसके खिलाफ भारी जुर्माने से लेकर लाइसेंस रद्द करने तक की कड़ी कार्रवाई करेगी। इस व्यवस्था के आने से उपभोक्ताओं के भीतर एक आत्मविश्वास जागेगा कि वे जो पैसे खर्च कर रहे हैं, उसके बदले उन्हें पूरी तरह से शुद्ध, ताजी और सुरक्षित खाने की चीजें मिल रही हैं।
दुकानदारों और हलवाइयों के लिए गाइडलाइन: कैसे करना होगा इस नए नियम का पालन?
खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, राज्य के सभी मिठाई विक्रेताओं को अपनी दुकानों के बाहर या मुख्य काउंटर पर एक बड़ा सा डिस्प्ले बोर्ड लगाना होगा, जिस पर उस दिन की बनी हुई प्रमुख मिठाइयों और उनके उपभोग की समय-सीमा स्पष्ट अक्षरों में लिखी होगी। इसके अलावा, यदि कोई ग्राहक खुली मिठाई खरीदता है, तो बिल या थैली पर भी यह जानकारी दी जानी चाहिए कि वह उत्पाद कब तक खाने योग्य है। इस नए आदेश के बाद से उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में मिठाई विक्रेताओं की बैठकें शुरू हो चुकी हैं, जिसमें उन्हें यह समझाया जा रहा है कि वे स्टॉक का प्रबंधन कैसे करें ताकि उन्हें पुराना सामान फेंकना न पड़े और वे समय पर ताजा मिठाइयों का ही निर्माण करें। हालांकि, कुछ छोटे दुकानदारों का यह मानना है कि इस नियम का पालन करने के लिए उन्हें अपनी कार्यशैली में थोड़ा बदलाव करना होगा, लेकिन जनहित और कानून के दायरे में यह हर व्यापारी की नैतिक जिम्मेदारी है कि वह अपने ग्राहकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध कराए।
स्वास्थ्य सुरक्षा और खाद्य मानकों की दिशा में एक क्रांतिकारी और दूरगामी कदम
रोशन जैकब द्वारा उठाया गया यह कदम केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के खाद्य सुरक्षा तंत्र को आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। जब देश का नागरिक बाजार में जाकर अपनी और अपने परिवार की सेहत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त महसूस करेगा, तभी एक स्वस्थ समाज की कल्पना साकार हो सकती है। आने वाले 15 अक्टूबर से जब यह नियम पूरे उत्तर प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएगा, तो विभाग के फूड इंस्पेक्टर लगातार औचक निरीक्षण (Raid) करेंगे और सैंपलिंग की प्रक्रिया को तेज करेंगे ताकि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन न हो सके। कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला त्योहारों की मिठास को और अधिक सुरक्षित बनाने के साथ-साथ मिलावटखोरों के दिलों में कड़ा डर पैदा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, जिस पर हर जागरूक नागरिक की निगाहें टिकी रहेंगी।