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त्योहारी सीजन से पहले देश की अर्थव्यवस्था को लगे पंख! अगस्त में IIP ग्रोथ 8% के पार, मैन्युफैक्चरिंग में 9% का ऐतिहासिक उछाल; जानिए आम जनता पर असर

देश में नवरात्र, दशहरा, धनतेरस और दीपावली के भव्य त्योहारी सीजन की औपचारिक शुरुआत से ठीक पहले भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे से बेहद उत्साहजनक और ऐतिहासिक आंकड़े सामने आए हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) और सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) ने अगस्त के महीने में शानदार प्रदर्शन करते हुए 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की है। इस अप्रत्याशित उछाल ने न केवल घरेलू आर्थिक विश्लेषकों के अनुमानों को पीछे छोड़ दिया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी भारतीय अर्थव्यवस्था की अंतर्निहित मजबूती का लोहा मनवाया है। त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए कारखानों में उत्पादन की तेज गति ने यह साबित कर दिया है कि बाजार में उपभोक्ता विश्वास और खर्च करने की क्षमता नए शिखर पर है।

यह उछाल ऐसे समय में आया है जब दुनिया की कई प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाएं मंदी, उच्च मुद्रास्फीति और वैश्विक आपूर्ति शृंखला के व्यवधानों से जूझ रही हैं। भारत के प्रमुख औद्योगिक क्लस्टर्स जैसे महाराष्ट्र के पुणे और औरंगाबाद, गुजरात के अहमदाबाद व वडोदरा, तमिलनाडु के चेन्नई और कोयंबटूर, हरियाणा के गुरुग्राम और मानेसर तथा उत्तर प्रदेश के नोएडा, गाजियाबाद व कानपुर के मैन्युफैक्चरिंग हब्स में दिन-रात काम चल रहा है। कारखानों में मशीनों की तेज आवाज और वेयरहाउसों में तेजी से तैयार हो रहा माल इस बात का स्पष्ट संकेत दे रहा है कि भारत का कॉर्पोरेट जगत आगामी त्योहारों पर रिकॉर्डतोड़ बिक्री की उम्मीद कर रहा है।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर बना ग्रोथ का असली इंजन: 9 प्रतिशत की जबरदस्त छलांग के क्या हैं मायने?

अगस्त महीने के औद्योगिक उत्पादन आंकड़ों का सबसे सुखद और मजबूत पहलू मैन्युफैक्चरिंग (विनिर्माण) सेक्टर का प्रदर्शन रहा है, जिसकी विकास दर 9 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) की बास्केट में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हिस्सेदारी 77 प्रतिशत से भी अधिक होती है, इसलिए इस सेक्टर का मजबूत होना समूचे औद्योगिक तंत्र की रीढ़ माना जाता है। अगस्त के दौरान ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स और कैपिटल गुड्स सेगमेंट में उत्पादन की अभूतपूर्व तेजी दर्ज की गई।

विशेष रूप से ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों ने त्योहारी सीजन की अग्रिम मांग को पूरा करने के लिए असेंबली लाइनों की क्षमता को लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। फोर-व्हीलर, टू-व्हीलर और इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के निर्माण में दोहरे अंकों की वृद्धि दर्ज की गई है। इसी तरह रेफ्रिजरेटर, स्मार्ट टीवी, वाशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसे कंज्यूमर ड्यूरेबल्स का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा है, क्योंकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों से अग्रिम बुकिंग और डीलर ऑर्डर्स में भारी इजाफा देखा जा रहा है। विनिर्माण क्षेत्र में 9 प्रतिशत की यह छलांग दर्शाती है कि केंद्र सरकार की 'मेक इन इंडिया' और 'प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव' (PLI) योजनाएं अब जमीनी स्तर पर व्यापक औद्योगिक क्षमता विस्तार में तब्दील हो रही हैं।

खनन, बिजली और कैपिटल गुड्स में भी लौटी तेजी: बुनियादी ढांचे को मिल रहा बड़ा सहारा

औद्योगिक उत्पादन के विस्तृत घटकों पर नजर डालें तो केवल मैन्युफैक्चरिंग ही नहीं, बल्कि खनन (Mining) और बिजली (Electricity) उत्पादन क्षेत्रों ने भी सकारात्मक योगदान दिया है। अगस्त महीने के दौरान देश भर में बिजली की मांग में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई, जिसे पूरा करने के लिए थर्मल, हाइड्रो और रिन्यूएबल एनर्जी प्लांट्स ने अपनी उत्पादन क्षमता को दुरुस्त रखा। बिजली उत्पादन में दर्ज की गई ठोस बढ़ोतरी यह प्रमाणित करती है कि देश के वाणिज्यिक और औद्योगिक प्रतिष्ठान पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहे हैं। दूसरी ओर, कोयला, लौह अयस्क और चूना पत्थर के बढ़ते उठाव के कारण खनन क्षेत्र की गतिविधियों में भी गतिशीलता बनी रही।

सबसे महत्वपूर्ण संकेत 'कैपिटल गुड्स' (पूंजीगत सामान) और 'इंफ्रास्ट्रक्चर/कंस्ट्रक्शन गुड्स' के आंकड़ों से मिला है। कैपिटल गुड्स वह श्रेणी होती है जिसमें भारी मशीनरी, प्लांट उपकरण और औद्योगिक संयंत्र तैयार किए जाते हैं। इस वर्ग में दर्ज की गई मजबूत वृद्धि इस बात का सीधा प्रमाण है कि निजी कंपनियां अब नए कारखाने लगाने और मौजूदा प्लांटों के आधुनिकीकरण पर खुलकर पूंजी निवेश (Capex) कर रही हैं। निजी निवेश का यह पुनरुद्धार भारतीय अर्थव्यवस्था को केवल उपभोग-आधारित विकास से आगे बढ़ाकर निवेश-संचालित टिकाऊ विकास के अगले चरण में ले जा रहा है।

ग्रामीण और शहरी मांग में संतुलन: आम जनता और नौकरियों के लिए यह खबर कितनी बड़ी है?

औद्योगिक उत्पादन में 8 प्रतिशत की वृद्धि का सीधा और व्यावहारिक संबंध आम नागरिकों की आय और आजीविका से जुड़ा है। जब कारखानों में उत्पादन 9 प्रतिशत की दर से बढ़ता है, तो इसका पहला सकारात्मक प्रभाव रोजगार बाजार पर पड़ता है। त्योहारी सीजन के दौरान लॉजिस्टिक्स, वेयरहाउसिंग, पैकेजिंग, रिटेल और डिलीवरी सेक्टर में लाखों अस्थायी और स्थायी नौकरियों के अवसर सृजित हो रहे हैं। टियर-2 और टियर-3 शहरों में युवाओं के लिए गिग इकॉनमी और फैक्ट्रियों में ऑपरेटर स्तर के नए अवसर खुले हैं।

इसके अलावा, इस वर्ष मानसूनी बारिश के बेहतर वितरण के चलते देश के विशाल ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आय में सुधार की ठोस उम्मीद जगी है। ग्रामीण भारत से दोपहिया वाहनों, कृषि उपकरणों, रोजमर्रा के उपभोग की वस्तुओं (FMCG) और परिधानों की मांग में तेजी आई है। वहीं दूसरी ओर, शहरी मध्यम वर्ग के पास त्योहारी बोनस और वेतन वृद्धि के बाद खरीदारी का अतिरिक्त बजट उपलब्ध है। मांग और आपूर्ति के इस स्वस्थ संतुलन ने औद्योगिक उत्पादन के पहिए को वो रफ्तार दी है, जिसकी लंबे समय से प्रतीक्षा की जा रही थी। बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) भी आकर्षक ब्याज दरों और जीरो-प्रोसेसिंग फीस वाले त्योहारी ऑफर्स के साथ कंज्यूमर लोन दे रही हैं, जिससे खरीदारी को अतिरिक्त ईंधन मिल रहा है।

क्या ब्याज दरों और शेयर बाजार पर दिखेगा इसका असर? जानिए अर्थशास्त्रियों की राय

आर्थिक विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि IIP ग्रोथ में 8 प्रतिशत का यह उछाल भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) दोनों के लिए एक मजबूत संकेत है। मजबूत औद्योगिक विकास यह दर्शाता है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी झटकों को सहने की पूरी क्षमता रखती है। शेयर बाजार के नजरिए से देखें तो निफ्टी और सेंसेक्स में सूचीबद्ध प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग, कैपिटल गुड्स, ऑटो और बैंकिंग कंपनियों की दूसरी और तीसरी तिमाही (Q2 और Q3) के वित्तीय नतीजों में शानदार आय (Corporate Earnings) दर्ज होने की प्रबल संभावना बन गई है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि जब औद्योगिक उत्पादन मजबूत होता है, तो केंद्रीय बैंक को भी अपनी मौद्रिक नीतियों को संतुलित रखने में आसानी होती है। यदि आने वाले महीनों में महंगाई दर स्थिर बनी रहती है, तो यह मजबूत औद्योगिक विकास भारत को चालू वित्त वर्ष में 7 प्रतिशत से अधिक की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर हासिल करने में केंद्रीय भूमिका निभाएगा। त्योहारी सीजन के मुहाने पर खड़े देश के लिए अगस्त के यह आंकड़े न केवल बाजार के मनोबल को सातवें आसमान पर ले जाने वाले हैं, बल्कि हर भारतीय के लिए एक समृद्ध त्योहारी उत्सव की पूर्व-घोषणा भी हैं।

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