UP Traffic Challan Relief: यूपी के वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत, लंबित ई-चालान से छुटकारा पाने के लिए तुरंत निपटाएं ये 4 आसान काम

उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी, प्रयागराज, आगरा और मेरठ जैसे बड़े शहरों में ट्रैफिक नियमों को सख्त करने के लिए हाई-टेक आईटीएमएस (ITMS) कैमरों का जाल बिछाया गया है। सिग्नल जंप, सीट बेल्ट, ओवर स्पीडिंग या हेलमेट न पहनने पर सीधे वाहन मालिक के मोबाइल पर ई-चालान पहुंच जाता है। कई बार वाहन स्वामियों के ऊपर एक से अधिक या पुराने चालान जमा हो जाते हैं, जिन्हें लेकर वे कोर्ट और आरटीओ कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। यदि आपके वाहन पर भी कोई पुराना या गलत चालान दर्ज है, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। योगी सरकार की नीतियों, अदालती राहतों और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत के माध्यम से इन लंबित चालानों को बेहद सरल, त्वरित और कानूनी तरीके से खत्म किया जा सकता है।
लोक अदालत में कराएं चालान का निपटारा और पाएं भारी छूट या पूर्ण माफी
लंबित ट्रैफिक चालान को खत्म कराने का सबसे लोकप्रिय और प्रामाणिक माध्यम 'राष्ट्रीय लोक अदालत' है, जिसका आयोजन प्रदेश के हर जिला न्यायालय में नियमित अंतरालों पर किया जाता है। लोक अदालत का मूल उद्देश्य मुकदमों के बोझ को कम करना और आपसी सहमति से मामलों को रफा-दफा करना है। यदि आपका चालान वर्चुअल कोर्ट या रेगुलर कोर्ट में ट्रांसफर हो चुका है, तो आप लोक अदालत के लिए ऑनलाइन टोकन बुक कर सकते हैं। लोक अदालत के दिन मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर आप चालान की राशि में भारी छूट प्राप्त कर सकते हैं। कई मामलों में जहां नियम उल्लंघन मामूली था या वाहन चालक आर्थिक रूप से कमजोर है, वहां मजिस्ट्रेट द्वारा सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए चालान को शून्य यानी पूरी तरह माफ भी कर दिया जाता है। लोक अदालत का फैसला अंतिम होता है और इसके खिलाफ कोई अपील नहीं होती, जिससे मामला हमेशा के लिए बंद हो जाता है।
गलत या तकनीकी खामी से कटे चालान को ऑनलाइन पोर्टल पर करें चुनौती
शहरों में लगे ऑटोमैटिक कैमरों से कई बार नंबर प्लेट के गलत डिटेक्ट होने, किसी अन्य गाड़ी के नंबर पर आपका चालान कटने या तकनीकी गड़बड़ी के कारण गलत चालान जनरेट हो जाता है। यदि आपके साथ ऐसा हुआ है, तो बिना पैसे भरे आप इसे सीधे चुनौती दे सकते हैं। इसके लिए परिवहन विभाग के आधिकारिक पोर्टल (echallan.parivahan.gov.in) पर 'Grievance' यानी शिकायत का विकल्प मिलता है। वहां अपना चालान नंबर, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर और साक्ष्य (जैसे घटना के समय वाहन की वास्तविक स्थिति की फोटो या टोल रसीद) अपलोड करके आपत्ति दर्ज कराएं। संबंधित जिले की ट्रैफिक पुलिस सेल इस शिकायत की जांच करती है और कैमरा फुटेज से मिलान होने के बाद गलत चालान को डेटाबेस से पूरी तरह निरस्त यानी कैंसल कर दिया जाता है।
वर्चुअल कोर्ट (Virtual Court) के जरिए बिना वकील घर बैठे नाममात्र जुर्माने में कराएं सेटलमेंट
यदि चालान सही है लेकिन आप नियमित कोर्ट में पेश होकर समय और वकील का खर्च नहीं गंवाना चाहते, तो भारत सरकार और न्यायपालिका की 'वर्चुअल कोर्ट' (vcourts.gov.in) प्रणाली सबसे बड़ा मददगार है। जब कोई ई-चालान लंबे समय तक पेंडिंग रहता है, तो वह वर्चुअल कोर्ट में भेज दिया जाता है। पोर्टल पर लॉग इन करके वाहन चालक अपना मोबाइल नंबर और वाहन नंबर दर्ज करके केस स्टेटस देख सकते हैं। यहां आपके पास 'Plead Guilty' (गलती स्वीकार करना) का विकल्प होता है। वर्चुअल जज द्वारा तय की गई रियायती जुर्माना राशि को आप ऑनलाइन यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग से तुरंत भर सकते हैं। जैसे ही पेमेंट पूरा होता है, चालान का स्टेटस 'Disposed' यानी समाप्त हो जाता है और आपका रिकॉर्ड पूरी तरह क्लीन हो जाता है।
पुराने सालों के चालान निरस्तीकरण आदेश के दायरे में अपना स्टेटस करें चेक
उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व में वर्ष 2017 से 2021 के बीच के लाखों लंबित पुराने चालानों को जनहित में निरस्त करने का ऐतिहासिक कदम उठाया था। कई वाहन स्वामियों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उनके पुराने चालान सरकार के उस आदेश के तहत स्वतः ही समाप्त हो चुके हैं। यदि आपके वाहन पर 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 के बीच का कोई ई-चालान अभी भी पोर्टल पर दिख रहा है, तो आप अपने जिले के आरटीओ या ट्रैफिक पुलिस कार्यालय के चालान निस्तारण सेल में संपर्क करके संबंधित सरकारी शासनादेश (GO) का हवाला देकर उसे ऑनलाइन सिस्टम से हटवा सकते हैं। यह व्यवस्था खासतौर पर उन कमर्शियल और प्राइवेट वाहन मालिकों के लिए संजीवनी साबित हुई है जिनके पुराने चालान फिटनेस या एनओसी में रुकावट बन रहे थे।
ई-चालान का समय पर निस्तारण न करने से हो सकते हैं गंभीर कानूनी नुकसान
अक्सर लोग ई-चालान के मैसेज को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना भविष्य में भारी पड़ सकता है। यदि चालान लंबे समय तक अनपेड रहता है, तो वाहन का पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUCC) रिन्यू कराने, आरटीओ से एनओसी (NOC) लेने, गाड़ी का ट्रांसफर कराने या रोड टैक्स भरने में पोर्टल ब्लॉक हो जाता है। इसके अलावा, बार-बार कोर्ट के समन की अनदेखी करने पर मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के तहत वाहन को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है या पुलिस द्वारा गाड़ी जब्त (सीज) करने की कार्रवाई भी हो सकती है। इसलिए जैसे ही लोक अदालत की तारीख घोषित हो या ऑनलाइन वर्चुअल कोर्ट में केस लिस्ट हो, तुरंत आगे बढ़कर इन 4 आसान कदमों से अपने सभी पेंडिंग चालान का निस्तारण करा लें।