रेवंत रेड्डी के ‘राम-शिव’ बयान पर घमासान: भाजपा ने कांग्रेस से ज्ञानवापी पर साफ करने को कहा रुख

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी द्वारा भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए गए एक विवादित बयान ने देश की राजनीति में एक नया भूचाल ला दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी पर तीखा पलटवार किया है और साथ ही काशी विश्वनाथ तथा ज्ञानवापी मस्जिद के ऐतिहासिक मुद्दे को जोर-शोर से उठा दिया है। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व से यह मांग की है कि वे देश के सामने यह स्पष्ट करें कि उनकी पार्टी काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी के मामले में वास्तव में क्या सोच रखती है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा के वरिष्ठ राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पार्टी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि रेवंत रेड्डी का यह बयान कि 'शिव गरीबों और द्रविड़ों के भगवान हैं', भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की गहरी अज्ञानता को दर्शाता है। भाजपा का कहना है कि राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए देवी-देवताओं के बीच इस प्रकार का भेद पैदा करना और उन्हें वर्गों में बांटना निंदनीय है।
ज्ञानवापी और काशी विश्वनाथ मंदिर पर कांग्रेस से मांगा जवाब
अदालतों में चल रही ज्ञानवापी मस्जिद से जुड़े मुकदमों और दावों का हवाला देते हुए सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि अदालतें और न्यायपालिका अपना कानूनी काम करेंगी, लेकिन देश की सबसे पुरानी पार्टी होने के नाते कांग्रेस को अपनी वैचारिक स्थिति देश के सामने साफ करनी चाहिए। भाजपा ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस पार्टी उस समय के मुगल आक्रांता औरंगजेब द्वारा काशी विश्वनाथ मंदिर को तोड़कर बनाई गई मस्जिद के मौजूदा स्वरूप को बनाए रखने के समर्थन में है या फिर वह इसका विरोध करती है?
भाजपा ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी से सीधा सवाल किया है कि क्या वे यह चाहते हैं कि ज्ञानवापी परिसर से विवादित ढांचा हटना चाहिए या नहीं? पार्टी का कहना है कि कांग्रेस पार्टी अपनी तुष्टिकरण की राजनीति के चलते इन संवेदनशील मुद्दों पर हमेशा से चुप्पी साधती आई है।
'कांग्रेस को भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म की समझ ही नहीं'
रेवंत रेड्डी के बयानों का खंडन करते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि भगवान राम और भगवान शिव के बीच किसी भी तरह का अंतर या भेदभाव पैदा करने का प्रयास करना राजनीति का सबसे निकृष्टतम उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पूरी रामायण कथा स्वयं भगवान शिव द्वारा माता पार्वती को सुनाई गई रामकथा पर आधारित है, और मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम खुद भगवान शिव के परम भक्त माने जाते हैं। लंका विजय के बाद रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।
सुधांशु त्रिवेदी ने तंज कसते हुए कहा कि यदि भगवान शिव को केवल गरीबों का देवता मान लिया जाए, तो सोने की लंका में राज करने वाला लंकापति रावण भी प्रकांड शिवभक्त था। उन्होंने कांग्रेस पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जो लोग भगवान राम को अपना वैचारिक विरोधी मानते हैं और केवल राजनीतिक लाभ के लिए शिव का नाम लेते हैं, उनकी मानसिकता रावण जैसी राक्षसी प्रवृत्ति से मेल खाती है।
'कांग्रेस पर बढ़ रहा इस्लामिक सोच का प्रभाव'
भाजपा ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आज कांग्रेस पार्टी पर एक खास तरह की इस्लामिक विचारधारा का प्रभाव इस हद तक हावी हो चुका है कि वे हिंदू देवी-देवताओं को भी उसी संकीर्ण नजरिए से देखने लगे हैं, जहां केवल एक ही शक्ति को सब कुछ माना जाता है। इसके विपरीत, सनातन संस्कृति में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति सभी देवी-देवताओं का आदर करता है और मंदिर के साथ-साथ अन्य धार्मिक स्थलों की आस्था का भी सम्मान करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि रेवंत रेड्डी का यह बयान आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ सकता है, क्योंकि भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है।