उत्तर प्रदेश

यूपी का यह नेशनल हाईवे बनेगा 6-लेन: NHAI ने शुरू की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया, जानें कौन से जिले होंगे मालामाल

उत्तर प्रदेश में सड़क संपर्क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को वैश्विक स्तर का बनाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। राज्य के अत्यधिक व्यस्त और भारी व्यावसायिक वाहनों के दबाव वाले प्रमुख नेशनल हाईवे कॉरिडोर को मौजूदा 4-लेन से चौड़ा करके अत्याधुनिक 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे (6-Lane Access-Controlled Highway) में अपग्रेड करने की विस्तृत कार्ययोजना को अंतिम रूप दे दिया गया है।

लगातार बढ़ते ट्रैफिक घनत्व (PCU), औद्योगिक गलियारों के विस्तार और आए दिन लगने वाले जाम के स्थायी समाधान के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने इस मेगा अपग्रेड प्रोजेक्ट पर अपनी मुहर लगा दी है। इस हाईवे के 6-लेन बन जाने से यात्रा के समय में 40% से 50% तक की भारी कटौती होगी, जिससे न केवल अंतर-जिला आवागमन तेज होगा बल्कि राज्य के औद्योगिक विकास को भी नई गति मिलेगी।

जमीन अधिग्रहण पर NHAI ने जारी किया स्पष्ट अपडेट: मुआवजा और सर्वे का काम तेज

किसी भी हाईवे विस्तार परियोजना में सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील चरण भूमि अधिग्रहण का होता है। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के परियोजना निदेशक और सक्षम प्राधिकारी (भूमि अधिग्रहण – CALA) ने किसानों और भूस्वामियों की स्थिति स्पष्ट करते हुए ताजा दिशा-निर्देश साझा किए हैं:

  • 3A और 3D गजट नोटिफिकेशन: हाईवे के दोनों किनारों पर अतिरिक्त 15 से 25 मीटर चौड़ाई के राइट ऑफ वे (RoW) के लिए प्रभावित गांवों और खसरा नंबरों की सूची आधिकारिक गजट में प्रकाशित कर दी गई है।

  • ड्रोन मैपिंग और डिजिटल सर्वे: भूमि की सीमाओं, मौजूदा निर्माण, पेड़ों और ट्यूबवेल आदि का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के लिए अत्याधुनिक 3D ड्रोन सर्वे पूरा कर लिया गया है।

  • सर्किल रेट का 4 गुना तक मुआवजा: भूमि अधिग्रहण अधिनियम (RFCTLARR Act) के प्रावधानों के तहत ग्रामीण इलाकों में लागू बाजार दर/सर्किल रेट के गुणक फॉर्मूले के आधार पर किसानों को मुआवजा तय किया जाएगा, जिससे भूस्वामियों को उनकी जमीन का पूरा और पारदर्शी मूल्य मिलेगा।

  • प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) से भुगतान: मुआवजे की राशि बिचौलियों के बिना सीधे जमीन मालिक के आधार-लिंक्ड बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। NHAI ने यह भी साफ किया है कि जब तक 80% मुआवजा वितरित नहीं हो जाता, तब तक निर्माण कार्य के लिए जमीन का भौतिक कब्जा नहीं लिया जाएगा।

किन जिलों और कस्बों से होकर गुजरेगा यह 6-लेन कॉरिडोर

इस महत्वपूर्ण हाईवे के 6-लेन बनने से उत्तर प्रदेश के कई औद्योगिक और कृषि प्रधान जिले सीधे आपस में और राजधानी लखनऊ से हाई-स्पीड नेटवर्क के जरिए जुड़ जाएंगे:

  • प्रमुख जंक्शनों का बाईपास: हाईवे के मार्ग में पड़ने वाले घने कस्बों और बाजारों को ट्रैफिक जाम से मुक्त रखने के लिए डेडिकेटेड ग्रीनफील्ड बाईपास बनाए जाएंगे।

  • अंडरपास और फ्लाईओवर का जाल: स्थानीय ग्रामीणों, स्कूली बच्चों और मवेशियों की सुरक्षित आवाजाही के लिए हर 1 से 2 किलोमीटर पर व्हीक्युलर अंडरपास (VUP), लाइट व्हीकल अंडरपास (LVUP) और पैदल पार पथ (PUP) स्थापित किए जाएंगे।

  • सर्विस लेन का प्रावधान: आबादी वाले इलाकों के दोनों तरफ 2-लेन की पक्की सर्विस रोड बनाई जाएगी, जिससे स्थानीय वाहनों को मुख्य 6-लेन एक्सप्रेस कैरिजवे पर चढ़े बिना अपनी मंजिल तक जाने की सुविधा मिलेगी।

  • इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (ITS): पूरे 6-लेन स्ट्रेच को हाई-स्पीड सीसीटीवी, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे, मौसम निगरानी सेंसर और आपातकालीन कॉल बॉक्स से लैस किया जाएगा।

लखनऊ से पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी की कनेक्टिविटी में आएगा क्रांतिकारी बदलाव

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर, अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी और पश्चिमी यूपी के मेरठ-नोएडा से जुड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों का चौड़ीकरण राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर बनाने की दिशा में रीढ़ की हड्डी माना जा रहा है।

6-लेन हाईवे बनने से माल ढुलाई की लागत (Logistics Cost) में भारी कमी आएगी। फल, सब्जियां, दूध और औद्योगिक माल की डिलीवरी बिना किसी रुकावट के समय पर हो सकेगी। इसके साथ ही हाईवे के दोनों किनारों पर नए वेयरहाउसिंग हब, लॉजिस्टिक्स पार्क, कोल्ड स्टोरेज और ढाबा-होटल कारोबार में भारी उछाल आएगा, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए हजारों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

तय समयसीमा में पूरा होगा काम: टेंडर प्रक्रिया और निर्माण लक्ष्य

NHAI के अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे 6-लेन प्रोजेक्ट को 2 से 3 अलग-अलग पैकेजों में विभाजित कर ईपीसी (EPC – Engineering, Procurement, and Construction) मोड पर टेंडर आमंत्रित किए जा रहे हैं।

  • सिविल वर्क की समयसीमा: टेंडर अलॉटमेंट और वर्क ऑर्डर जारी होने के 24 से 30 महीने के भीतर निर्माण कार्य पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा गया है।

  • पर्यावरण और सुरक्षा मानक: सड़क निर्माण के दौरान दोनों किनारों पर हरित पट्टी (Green Belt) विकसित की जाएगी और जल निकासी के लिए पक्के स्टॉर्म-वॉटर ड्रेनेज बनाए जाएंगे।

  • टोल प्लाजा का आधुनिकीकरण: हाईवे पर जीपीएस आधारित बैरियर-लेस टोलिंग (Barrier-less Tolling / Multi-Lane Free Flow) के लिए बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा, ताकि वाहनों को टोल टैक्स चुकाने के लिए कतारों में न रुकना पड़े।

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