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Prem Kiitanu Review: वीर पहाड़िया की फिल्म को मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया, किसी ने बताया ‘कहानी कमाल’ तो किसी ने किया निराश

बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने में जुटे युवा अभिनेता वीर पहाड़िया की नई फिल्म 'प्रेम कीटाणु' सिनेमाघरों में रिलीज होते ही चर्चा का केंद्र बन गई है। लीक से हटकर शीर्षक और अनोखे विषय को लेकर बनी इस रोमांटिक-कॉमेडी ड्रामा को दर्शकों और फिल्म समीक्षकों की तरफ से मिली-जुली प्रतिक्रिया (Mixed Reviews) मिल रही है। सोशल मीडिया और सिनेमाघरों के बाहर दर्शकों का एक वर्ग जहां फिल्म के नए कॉन्सेप्ट, कॉमिक टाइमिंग और हल्के-फुल्के अंदाज की जमकर तारीफ कर रहा है, वहीं दूसरा वर्ग कमजोर स्क्रीनप्ले और धीमी रफ्तार से असंतुष्ट नजर आ रहा है। बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन के रुझान बताते हैं कि फिल्म को लेकर युवा दर्शकों में खासा कौतूहल बना हुआ है।

क्या है कहानी: प्यार का अनोखा 'कीटाणु' और रिश्तों का नया नजरिया

फिल्म का नाम जितना अजीबोगरीब लगता है, इसकी मूल कहानी भी रिश्तों को उसी अनूठे चश्मे से देखने की कोशिश करती है।

  • मूल विषय: कहानी एक ऐसे युवा के इर्द-गिर्द घूमती है जो प्यार और आकर्षण को एक मनोवैज्ञानिक या रासायनिक 'संक्रमण' यानी 'कीटाणु' के रूप में देखता है।

  • प्लॉट का मोड़: जैसे ही मुख्य किरदार की जिंदगी में प्रेम का प्रवेश होता है, उसके तार्किक सिद्धांत और रोजमर्रा की जिंदगी पूरी तरह लड़खड़ा जाती है।

  • कॉमेडी और ड्रामा: डायरेक्टर ने आधुनिक रिश्तों की उलझनों, जनरेशन-जेड (Gen-Z) के डेटिंग कल्चर, कमिटमेंट के डर और पारिवारिक अपेक्षाओं को हास्य और भावनात्मक ड्रामा के साथ पिरोने की कोशिश की है। कई दर्शकों को यह प्लॉट काफी तरोताजा और आज के दौर से जुड़ा हुआ महसूस हुआ है।

वीर पहाड़िया और सह-कलाकारों का अभिनय: किसने जीता दिल?

फिल्म में वीर पहाड़िया के अभिनय को समीक्षकों ने काफी उम्मीद जगाने वाला बताया है। वीर ने एक कन्फ्यूज्ड और दिलफेंक लेकिन भावुक युवा के किरदार को सहजता से पर्दे पर उतारा है।

  • स्क्रीन प्रेजेंस: वीर की कॉमिक टाइमिंग और एक्सप्रेशन्स में ताजगी नजर आती है, खासकर उन दृश्यों में जहां वे खुद के विचारों से जूझते हैं।

  • सपोर्टिंग कास्ट: फिल्म की फीमेल लीड और सह-कलाकारों की केमिस्ट्री भी स्वाभाविक लगती है। सहयोगी कलाकारों के व्यंग्यपूर्ण डायलॉग्स दर्शकों को हंसाने में कामयाब रहे हैं। हालांकि कुछ इमोशनल सीन्स में वीर का अभिनय थोड़ा कच्चा जान पड़ता है, जिसे लेकर कुछ क्रिटिक्स ने अपनी असहमति जताई है।

फिल्म के मजबूत पहलू: जहां 'प्रेम कीटाणु' ने मारी बाजी

फिल्म को पसंद करने वाले दर्शकों ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं की सराहना की है:

  1. नया और दिलचस्प आइडिया: पारंपरिक मेलोड्रामा से हटकर प्यार को हल्के-फुल्के और साइंटिफिक-ह्यूमर के अंदाज में पेश करना दर्शकों को बांधता है।

  2. संवाद और संगीत: फिल्म के वन-लाइनर्स और बैकग्राउंड स्कोर युवा मिजाज के अनुकूल हैं। कुछ रोमांटिक ट्रैक्स पहले से ही म्यूजिक चार्ट्स पर ट्रेंड कर रहे हैं।

  3. पहला हाफ: फिल्म का पहला हिस्सा काफी तेज रफ्तार है, जहां किरदारों का परिचय और स्थितियां दर्शकों को लगातार बांधे रखती हैं।

कहां चूक गई फिल्म: वो कमियां जिन्होंने दर्शकों को किया निराश

समीक्षकों के एक हिस्से और दर्शकों के मुताबिक फिल्म अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल नहीं कर पाई:

  • दूसरे हाफ की लड़खड़ाहट: मध्यांतर के बाद फिल्म अपनी गति खोने लगती है। जिस अनोखे कॉन्सेप्ट से कहानी शुरू हुई थी, वह धीरे-धीरे पुराने और घिसे-पिटे बॉलीवुड ड्रामा में तब्दील हो जाती है।

  • क्लाइमेक्स में जल्दबाजी: फिल्म के अंतिम 20 मिनट काफी खिंचे हुए और जबरन थोपे गए इमोशंस से भरे लगते हैं। रिश्तों के टकराव का जो समाधान दिखाया गया है, वह बहुत आश्वस्त करने वाला नहीं लगता।

  • कमजोर संपादन (Editing): करीब 15-20 मिनट के गैर-जरूरी दृश्यों को काटकर फिल्म को अधिक क्रिस्प और प्रभावी बनाया जा सकता था।

देखें या न देखें: फाइनल वर्डिक्ट

'प्रेम कीटाणु' एक ऐसी फिल्म है जो हर किसी की पसंद पर खरी नहीं उतर सकती, लेकिन अगर आप घिसी-पिटी प्रेम कहानियों से ऊब चुके हैं और कुछ नया, हल्का-फुल्का व मनोरंजक देखना चाहते हैं, तो यह वीकेंड पर एक बार देखने लायक (One-time watch) फिल्म है। वीर पहाड़िया ने अपनी अदाकारी से यह साबित किया है कि उनमें एक मुख्यधारा के अभिनेता के रूप में उभरने का दम है, बशर्ते उन्हें और कसी हुई पटकथा मिले।

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