Kashmir Weather: अक्टूबर में तपने लगा कश्मीर, श्रीनगर में टूटा 18 साल का रिकॉर्ड; गुलमर्ग में भी असामान्य गर्मी ने चौंकाया

शरद ऋतु के आगमन और गुलाबी ठंड के लिए दुनिया भर में मशहूर कश्मीर घाटी में मौसम ने एक अप्रत्याशित और चौंकाने वाला करवट लिया है। आमतौर पर अक्टूबर के पहले पखवाड़े में जहां वादियों में तापमान तेजी से लुढ़कने लगता है और सुबह-शाम ठिठुरन महसूस होने लगती है, वहीं इस बार कश्मीर के अधिकांश इलाकों में भीषण और असामान्य गर्मी का प्रकोप देखा जा रहा है। घाटी के मैदानी इलाकों से लेकर ऊंचे पर्वतीय पर्यटन स्थलों तक तापमान में ऐसा जबर्दस्त उछाल आया है कि दशकों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड टूट गए हैं। श्रीनगर में रविवार को पारे ने पिछले 18 वर्षों का कीर्तिमान ध्वस्त कर दिया, जबकि विश्व प्रसिद्ध स्की-रिसॉर्ट गुलमर्ग, काजीगुंड और कोकरनाग में भी तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर दर्ज किया गया। शुष्क मौसम, लंबे समय से बारिश और बर्फबारी की कमी तथा पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के निष्प्रभावी रहने के कारण वादी में दिन के समय कड़ी धूप खिल रही है, जिससे स्थानीय निवासियों से लेकर सैलानियों तक पसीने से तर-बतर हो रहे हैं।
श्रीनगर में 31.2 डिग्री पारा: अक्टूबर का दूसरा सबसे गर्म दिन बना
मौसम विज्ञान केंद्र (IMD) श्रीनगर द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राजधानी श्रीनगर में रविवार को अधिकतम तापमान उछलकर 31.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। यह तापमान सामान्य औसत से 5.7 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। इसके साथ ही श्रीनगर में 18 साल पुराना रिकॉर्ड टूट गया, क्योंकि इससे पहले 2 अक्टूबर 2008 को शहर में 31.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था। मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, श्रीनगर में अक्टूबर महीने का यह अब तक का दूसरा सबसे अधिक तापमान है। श्रीनगर का सर्वकालिक (All-time) अक्टूबर रिकॉर्ड 33.9 डिग्री सेल्सियस का है, जो करीब 95 साल पहले 2 अक्टूबर 1931 को दर्ज किया गया था। चिलचिलाती धूप और शुष्क हवाओं के कारण श्रीनगर की सड़कों और बाजारों में दोपहर के समय सामान्य जनजीवन प्रभावित नजर आया और लोग पंखे चलाने को मजबूर हो गए।
गुलमर्ग की बर्फीली वादियों में भी पारा चढ़ा: सामान्य से 6.7 डिग्री ऊपर
मैदानी इलाकों में गर्मी तो समझ आती है, लेकिन सबसे ज्यादा चौंकाने वाला दृश्य समुद्र तल से लगभग 8,825 फीट की ऊंचाई पर स्थित पर्यटन स्थल गुलमर्ग में देखने को मिला। अपनी ठंडी आबोहवा और हरी-भरी ढलानों के लिए मशहूर गुलमर्ग में अधिकतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह आंकड़ा इस ऊंचाई वाले इलाके के लिए सामान्य औसत से 6.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। गुलमर्ग के इतिहास में अक्टूबर महीने का सर्वकालिक रिकॉर्ड 23.4 डिग्री सेल्सियस है, जो 1 अक्टूबर 2009 को बना था। 23.2 डिग्री के साथ यह रविवार गुलमर्ग के इतिहास में अक्टूबर महीने का दूसरा सबसे गर्म दिन साबित हुआ। गुलमर्ग की सैर पर आए देशी-विदेशी पर्यटक जहां गर्म कपड़ों और जैकेट्स की तैयारी के साथ पहुंचे थे, वहीं उन्हें टी-शर्ट में घूमते देखा गया, जो पर्यावरणविदों के लिए एक गंभीर चेतावनी का संकेत है।
काजीगुंड और कोकरनाग में ध्वस्त हुए दशकों पुराने ऐतिहासिक रिकॉर्ड
गर्मी की यह लहर केवल श्रीनगर और गुलमर्ग तक सीमित नहीं रही, बल्कि दक्षिण कश्मीर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले काजीगुंड और प्राकृतिक झरनों के शहर कोकरनाग में भी तापमान ने नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए। काजीगुंड में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 7.3 डिग्री सेल्सियस अधिक था। इसके साथ ही काजीगुंड में 41 साल पुराना ऑल-टाइम अक्टूबर रिकॉर्ड टूट गया; इससे पहले यहां 1 अक्टूबर 1985 को 31.2 डिग्री सेल्सियस का स्तर छुआ गया था। इसी प्रकार कोकरनाग में भी तापमान 29.5 डिग्री सेल्सियस के स्तर को पार कर गया, जो वहां के ऐतिहासिक आंकड़ों में सबसे अधिक है। घाटी के अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे पहलगाम में भी पारा 27 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया, जो पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से बदल रहे मौसमी चक्र की पुष्टि करता है।
जलवायु परिवर्तन, बारिश की लंबी कमी और सूखे के हालात
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार कश्मीर में अक्टूबर महीने में इस अप्रत्याशित लू जैसी स्थिति के पीछे मुख्य कारण मानसून के विदा होने के बाद लगातार बना हुआ लंबा शुष्क दौर (Dry Spell) है। पिछले दो महीनों में कश्मीर घाटी में सामान्य से 70 से 80 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वातावरण में बादलों की गैर-मौजूदगी के कारण सौर विकिरण (Solar Radiation) सीधे जमीन को तपा रहा है। इसके साथ ही भूमध्य सागर से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ कमजोर रहे हैं, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में समय से पहले होने वाली बर्फबारी पूरी तरह नदारद है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति वैश्विक ग्लोबल वार्मिंग और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में तेजी से घटते ग्लेशियरों का सीधा परिणाम है। यदि अक्टूबर के मध्य तक बारिश या बर्फबारी का कोई मजबूत सिस्टम सक्रिय नहीं होता है, तो घाटी में जल स्रोतों, सेब के बागानों और कृषि उत्पादन पर इसका बहुत बुरा प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग (MET Srinagar) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक घाटी में मौसम मुख्यतः शुष्क और गर्म बने रहने के आसार हैं। 7 और 8 अक्टूबर के आसपास एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिससे ऊंचाई वाले इलाकों में हल्के बादल छा सकते हैं और कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। हालांकि, तापमान में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद 10 अक्टूबर के बाद ही जताई जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सलाह दी है कि वे दोपहर की तीखी धूप से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों का सेवन करें तथा शुष्क हवाओं के कारण होने वाले श्वसन और त्वचा संबंधी संक्रमणों से बचाव के उपाय अपनाएं।