‘गारंटीड इलाज’ और ‘नंबर-1 डॉक्टर’ जैसे दावों पर रोक! अब ऐसे भ्रामक विज्ञापनों पर जुर्माना लगाने की तैयारी

देशभर में अखबारों, टीवी चैनलों, सोशल मीडिया और चौराहों के होर्डिंग्स पर '100% गारंटीड इलाज', 'जड़ से बीमारी खत्म' और 'शहर का नंबर-1 डॉक्टर' जैसे भ्रामक दावे करने वाले अस्पतालों, क्लीनिकों और चिकित्सकों पर अब सरकार का कड़ा चाबुक चलने जा रहा है। केंद्र सरकार और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मरीजों की जान और गाढ़ी कमाई से खिलवाड़ करने वाले ऐसे फर्जी प्रचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और भारी जुर्माना ठोकने के लिए नए दिशा-निर्देशों का मसौदा तैयार किया है। अक्सर गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, डायबिटीज, गंजापन, किडनी रोग या जोड़ों के दर्द से जूझ रहे मरीज इन विज्ञापनों के बहकावे में आकर अपनी जरूरी दवाएं छोड़ देते हैं और नीम-हकीमों के चक्कर में अपनी सेहत को और जोखिम में डाल लेते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त समन्वय से तैयार किए जा रहे इन कड़े नियमों के तहत अब किसी भी चिकित्सक या अस्पताल के लिए खुद को श्रेष्ठ बताना या बीमारी पूरी तरह ठीक करने की लिखित गारंटी देना गैर-कानूनी घोषित किया जा रहा है।
'गारंटीड क्योर' और 'बेस्ट डॉक्टर' पर क्यों लगा प्रतिबंध
चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) का बुनियादी सिद्धांत यह मानता है कि हर इंसान का शरीर, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता और दवा पर प्रतिक्रिया अलग होती है। ऐसे में दुनिया का कोई भी प्रमाणित डॉक्टर किसी भी बीमारी के सौ फीसदी ठीक होने की गारंटी नहीं दे सकता। इसके बावजूद कई निजी क्लीनिक, आईवीएफ सेंटर, हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर और वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के संस्थान 'गारंटीड रिजल्ट' के नाम पर मरीजों से लाखों रुपये ऐंठते हैं। नए नियमों के अनुसार, अब कोई भी डॉक्टर अपने पर्चे, बोर्ड, वेबसाइट या सोशल मीडिया हैंडल पर 'नंबर-1 स्पेशलिस्ट', 'शहर का सर्वश्रेष्ठ डॉक्टर' या 'सर्वाधिक सफल सर्जन' जैसे शब्दों का उपयोग नहीं कर सकेगा। डॉक्टरों को केवल अपनी डिग्री, मान्यता प्राप्त मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत रजिस्ट्रेशन नंबर, क्लिनिक का समय और परामर्श शुल्क जैसी तथ्यात्मक जानकारियां ही सार्वजनिक करने की छूट होगी।
10 लाख से 50 लाख तक का जुर्माना और लाइसेंस निलंबन की तैयारी
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act) और मेडिकल एथिक्स कोड के तहत प्रस्तावित प्रावधानों में भ्रामक विज्ञापनों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई का खाका खींचा गया है। पहली बार नियम का उल्लंघन करने वाले अस्पताल या चिकित्सक पर ₹10 लाख तक का नकद जुर्माना लगाया जाएगा। यदि कोई संस्थान दोबारा इसी तरह के झूठे दावे करते हुए पाया जाता है, तो यह जुर्माना बढ़कर ₹50 लाख तक पहुंच सकता है। इसके अलावा, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की राज्य शाखाओं को यह अधिकार दिया जा रहा है कि वे बार-बार भ्रामक प्रचार करने वाले डॉक्टरों का मेडिकल प्रैक्टिस लाइसेंस 3 महीने से लेकर 1 साल तक के लिए निलंबित कर दें। गंभीर मामलों में क्लीनिक को सील करने और आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने की सिफारिश भी की गई है।
सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर भी नकेल
डिजिटल युग में इंस्टाग्राम, यूट्यूब और फेसबुक पर मेडिकल उत्पादों, जादुई भस्मों और चमत्कारी तेलों का प्रचार करने वाले सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी गाज गिरने वाली है। नए नियमों में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई इन्फ्लुएंसर या सेलिब्रिटी किसी मेडिकल थेरेपी, स्किन ट्रीटमेंट या डाइट सप्लीमेंट का प्रचार करता है, तो उसे उस उत्पाद के वैज्ञानिक साक्ष्य और क्लिनिकल ट्रायल की पुष्टि करनी होगी। बिना किसी प्रमाणित लैब रिपोर्ट के किसी उपचार को 'जादुई' या 'अचूक' बताकर प्रमोट करने वाले डिजिटल क्रिएटर्स पर भी उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा सीधे भारी जुर्माना लगाया जाएगा। अस्पतालों द्वारा जारी किए जाने वाले 'मरीज के फर्जी वीडियो टेस्टिमोनियल' (Fake Patient Reviews) पर भी पूरी तरह पाबंदी लगाई जाएगी।
दिल्ली से लेकर लखनऊ और पटना तक: मरीजों को मिलेगा सीधा फायदा
उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, बिहार और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों में छोटे कस्बों से बड़े शहरों में इलाज के लिए आने वाले भोले-भाले ग्रामीण अक्सर इन भ्रामक विज्ञापनों का पहला शिकार बनते हैं। लखनऊ के चारबाग, कैसरबाग और मेडिकल कॉलेज के आसपास लगे भ्रामक होर्डिंग्स से लेकर दिल्ली, कानपुर और पटना के बस अड्डों पर चिपकाए जाने वाले 'शर्तिया इलाज' के पर्चों पर अब स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की विजिलेंस टीम सीधे कार्रवाई करेगी। लखनऊ के केजीएमयू, पीजीआई और दिल्ली एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के वरिष्ठ डॉक्टरों ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे मरीजों का आधुनिक और वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति पर भरोसा और मजबूत होगा और वे गलत हाथों में फंसकर अपनी जान गंवाने से बच सकेंगे।