पोस्ट ऑफिस SCSS में 8.2% ब्याज पर तिमाही कमाई का पूरा हिसाब: ₹10, ₹20 और ₹30 लाख पर कितना मिलेगा रिटर्न?

वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाकघर की सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) नियमित आय का सबसे सुरक्षित और अधिक ब्याज देने वाला जरिया बनी हुई है। 8.2% की वार्षिक ब्याज दर के साथ केंद्र सरकार द्वारा समर्थित इस योजना में ब्याज का भुगतान सीधे निवेशक के बैंक या डाकघर बचत खाते में हर 3 महीने (तिमाही आधार पर) क्रेडिट किया जाता है। योजना की कुल अवधि 5 वर्ष होती है, जिसे परिपक्वता के बाद 3 साल के लिए और आगे बढ़ाया जा सकता है।
ब्याज की गणना का सूत्र (Formula)
SCSS में ब्याज की गणना साधारण ब्याज के आधार पर होती है, क्योंकि यह चक्रवृद्धि (Compounded) न होकर हर तिमाही सीधे निकाल ली जाती है:
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वार्षिक ब्याज = जमा राशि × 8.2%
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त्रैमासिक ब्याज (Quarterly Payout) = वार्षिक ब्याज ÷ 4
₹10, ₹20 और ₹30 लाख के निवेश पर तिमाही व कुल रिटर्न का विवरण
| जमा राशि (मूलधन) | त्रैमासिक ब्याज (हर 3 महीने में) | वार्षिक कुल ब्याज | 5 साल में कुल ब्याज (20 तिमाहियां) | 5 साल बाद कुल राशि (मूलधन + ब्याज) |
| ₹10,00,000 | ₹20,500 | ₹82,000 | ₹4,10,000 | ₹14,10,000 |
| ₹20,00,000 | ₹41,000 | ₹1,64,000 | ₹8,20,000 | ₹28,20,000 |
| ₹30,00,000 (अधिकतम) | ₹61,500 | ₹2,46,000 | ₹12,30,000 | ₹42,30,000 |
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₹10 लाख पर: हर तिमाही ₹20,500 मिलेंगे (यानी औसतन ₹6,833 प्रति माह)।
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₹20 लाख पर: हर तिमाही ₹41,000 मिलेंगे (यानी औसतन ₹13,667 प्रति माह)।
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₹30 लाख पर: अधिकतम सीमा ₹30 लाख जमा करने पर हर तिमाही ₹61,500 प्राप्त होंगे (यानी औसतन ₹20,500 प्रति माह)।
ब्याज का भुगतान कब-कब होता है?
डाकघर नियमों के अनुसार, एससीएसएस के ब्याज की राशि साल में चार तय तारीखों पर स्वतः खाते में ट्रांसफर होती है:
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1 अप्रैल (जनवरी से मार्च तिमाही के लिए)
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1 जुलाई (अप्रैल से जून तिमाही के लिए)
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1 अक्टूबर (जुलाई से सितंबर तिमाही के लिए)
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1 जनवरी (अक्टूबर से दिसंबर तिमाही के लिए)
टैक्स नियम और फॉर्म 15H का रखें ध्यान
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धारा 80C छूट: पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत निवेश की गई मूलधन राशि पर आयकर की धारा 80C के अंतर्गत ₹1.5 लाख तक की कटौती का लाभ मिलता है।
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ब्याज पर टैक्स व TDS: योजना से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह करयोग्य होता है। वरिष्ठ नागरिकों के लिए धारा 80TTB के तहत ₹50,000 तक के ब्याज पर टैक्स छूट प्राप्त होती है। यदि कुल वार्षिक ब्याज सीमा से अधिक होता है, तो बैंक/डाकघर टीडीएस काटते हैं। अगर कुल वार्षिक आय कर योग्य सीमा से कम है, तो टीडीएस से बचने के लिए वित्तीय वर्ष के आरंभ में Form 15H जमा किया जा सकता है।