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इंटरव्यू या स्टेज पर जाते ही क्यों तेजी से धड़कने लगता है दिल? जानें क्या है Situational Anxiety

जीवन में कभी न कभी हर इंसान के सामने ऐसा मौका जरूर आता है जब वह मंच पर बोलने जा रहा होता है, किसी महत्वपूर्ण नौकरी के इंटरव्यू केबिन के बाहर अपनी बारी का इंतजार कर रहा होता है या फिर किसी कठिन परीक्षा के प्रश्नपत्र को हाथ में लेता है। उस खास पल में अचानक हमारे सीने में दिल की धड़कनें तेज हो जाती हैं, हथेलियां पसीने से गीली होने लगती हैं, सांसें उखड़ने लगती हैं और पेट में अजीब सी हलचल महसूस होने लग जाती है। कई लोग इसे महज सामान्य घबराहट या डर समझकर टाल देते हैं, लेकिन चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान की भाषा में इसे 'सिचुएशनल एंग्जायटी' (Situational Anxiety) यानी परिस्थिति जनित चिंता कहा जाता है। यह एक ऐसी मानसिक और शारीरिक स्थिति है जो किसी विशेष घटना या दबाव भरे क्षण में हमारे पूरे तंत्रिका तंत्र (Nervous System) को झकझोर कर रख देती है। आज के इस विशेष हेल्थ आर्टिकल में हम आपको विस्तार से बताएंगे कि आखिर परीक्षा, इंटरव्यू या पब्लिक स्पीकिंग से ठीक पहले हमारा शरीर इस तरह की प्रतिक्रिया क्यों देता है और इस पर कैसे आसानी से काबू पाया जा सकता है।

क्या होती है Situational Anxiety और क्यों अचानक बदल जाती है शरीर की शारीरिक स्थिति?

सिचुएशनल एंग्जायटी मूल रूप से किसी विशेष, तनावपूर्ण या नई परिस्थिति के प्रति हमारे शरीर और दिमाग की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। जब भी हमारा सामना किसी ऐसी स्थिति से होता है जहाँ हमारे प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाना हो या कोई अनिश्चितता का माहौल हो, तो हमारा मस्तिष्क तुरंत खतरे की घंटी बजा देता है। इस प्रक्रिया में हमारे शरीर का सिंपैथेटिक नर्वस सिस्टम (Sympathetic Nervous System) एक्टिव हो जाता है और 'फाइट और फ्लाइट' (Fight or Flight) रिस्पॉन्स को ट्रिगर कर देता है। इसके परिणाम स्वरूप शरीर में एड्रेनालाईन (Adrenaline) और कोर्टिसोल (Cortisol) जैसे तनाव हार्मोन का भारी मात्रा में स्राव होने लगता है। यही हॉर्मोन हमारी दिल की धड़कनों को तेज कर देते हैं, रक्त संचार को मांसपेशियों की तरफ बढ़ा देते हैं और हमें उस तात्कालिक परिस्थिति से निपटने या भागने के लिए शारीरिक रूप से पूरी तरह तैयार कर देते हैं, भले ही वहां कोई वास्तविक शारीरिक खतरा मौजूद न हो।

इंटरव्यू, परीक्षा और मंच पर भाषण देते वक्त दिमाग में क्यों उठने लगते हैं घबराहट के तूफान?

जब हम किसी बड़े इंटरव्यू बोर्ड के सामने बैठते हैं या सैकड़ों लोगों की भीड़ के सामने माइक थामते हैं, तो हमारे मन में असफलता का डर (Fear of Failure), लोगों द्वारा जज किए जाने का खौफ (Fear of Judgment) और perfectionism का अत्यधिक दबाव घर कर जाता है। हमारा अचेतन मन हर संभावित नकारात्मक परिणाम की कल्पना करने लगता है जैसे- 'अगर मैं भूल गया तो क्या होगा?', 'लोग मुझपर हसेंगे तो क्या होगा?' या 'अगर नौकरी नहीं मिली तो मेरा करियर खराब हो जाएगा।' इन नकारात्मक विचारों की आंधी से हमारा एमिग्डाला (Amygdala) यानी मस्तिष्क का भावनाएं नियंत्रित करने वाला हिस्सा अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जो तार्किक सोच को दबाकर हमारे शरीर में पैनिक जैसे लक्षण पैदा कर देता है। यही कारण है कि अच्छे खासे तैयार किए गए जवाब भी इंटरव्यू के वक्त दिमाग से अचानक गायब हो जाते हैं।

सिचुएशनल एंग्जायटी के प्रमुख शारीरिक और मानसिक लक्षण: कैसे पहचानें अपने शरीर के संकेत?

परिस्थिति जनित चिंता जब अपने चरम पर होती है, तो यह केवल मानसिक बेचैनी तक सीमित नहीं रहती बल्कि शरीर के कई भौतिक अंगों पर भी अपना असर दिखाना शुरू कर देती है। इसके सबसे आम लक्षणों में तेज दिल की धड़कन (Palpitations), सांस फूलना या जल्दी-जल्दी सांस लेना, हाथों और पैरों का कांपना, हथेलियों और माथे पर ठंडा पसीना आना, मुंह सूखना, पेट में मरोड़ या तितलियां उड़ने जैसा महसूस होना और चक्कर आना शामिल हैं। कई बार छात्रों को परीक्षा हॉल में प्रवेश करने से ठीक पहले अचानक पेट खराब होने या जी मिचलाने की समस्या भी इसी एंग्जायटी के कारण होती है। यह सभी लक्षण इस बात का प्रमाण हैं कि आपका शरीर किसी अदृश्य खतरे से लड़ने के लिए पूरी तरह तनाव की स्थिति में आ चुका है।

इस घबराहट और एंग्जायटी पर काबू पाने के लिए अपनाएं ये वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके

यदि आप भी अक्सर इंटरव्यू, प्रेजेंटेशन या एग्जाम से पहले इस तरह की सिचुएशनल एंग्जायटी का शिकार हो जाते हैं, तो घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि कुछ आसान तकनीकों से इस पर पूरी तरह नियंत्रण पाया जा सकता है। सबसे पहले 'डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज' (Deep Breathing) का अभ्यास करें; जब भी घबराहट महसूस हो, नाक से लंबी सांस अंदर लें, कुछ सेकंड रोकें और मुंह से धीरे-धीरे बाहर छोड़ें। ऐसा करने से पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम एक्टिव होता है और दिल की धड़कनें शांत होने लगती हैं। इसके अलावा, 'ग्राउंडिंग तकनीक' (5-4-3-2-1 Technique) का इस्तेमाल करें जिसमें अपने आसपास की 5 चीजें देखें, 4 चीजों को छूकर महसूस करें, 3 आवाजें सुनें, 2 गंध महसूस करें और 1 स्वाद लें; इससे आपका ध्यान डर से हटकर वर्तमान माहौल पर केंद्रित हो जाता है। अपनी तैयारी को पक्का रखें, सकारात्मक आत्म-संवाद (Positive Self-Talk) करें और कैफीन या अत्यधिक चाय-कॉफी के सेवन से बचें क्योंकि यह एंग्जायटी को और अधिक बढ़ा सकते हैं।

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