धर्म

नवरात्रि घटस्थापना पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का दूषित संयोग

शारदीय नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना और भक्ति का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है। वर्ष 2026 की शारदीय नवरात्रि की शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ हो रही है, लेकिन इस बार पंचांगीय गणनाओं के अनुसार घटस्थापना के दिन एक विशेष और दुर्लभ ज्योतिषीय स्थिति बन रही है। इस वर्ष प्रथम नवरात्रि के दिन 'चित्रा नक्षत्र' और 'वैधृति योग' का एक साथ प्रभाव रहेगा, जिसे धार्मिक मान्यताओं और शास्त्र ग्रंथों में घटस्थापना के लिए दूषित या वर्जित माना जाता है। ऐसे में देवी भक्तों के मन में कलश स्थापना के सही समय और नियम को लेकर कई तरह की दुविधाएं पैदा हो गई हैं। ज्योतिषाचार्यों और धर्मशास्त्रियों ने शास्त्रों के सूक्ष्म अध्ययन के आधार पर उस विशेष शुभ मुहूर्त और अभिजित मुहूर्त का निर्धारण किया है जिसमें पूजा-अर्चना करने से व्रत-अनुष्ठान पूर्णतः सफल और फलदायी होगा।

घटस्थापना पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का दूषित प्रभाव: क्या कहते हैं धर्मशास्त्र?

हिंदू धर्मग्रंथों विशेषकर 'निर्णय सिंधु' और 'धर्म सिंधु' के अनुसार शारदीय नवरात्रि में कलश स्थापना के समय चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग का त्याग किया जाना बेहद आवश्यक माना गया है। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से उल्लेख मिलता है कि जब घटस्थापना के समय चित्रा नक्षत्र या वैधृति योग विद्यमान हो, तो उस अवधि में सामान्य मुहूर्त में पूजा करने से बचा जाना चाहिए क्योंकि इस कालखंड को दूषित संयोग कहा गया है। इस वर्ष नवरात्रि के पहले दिन तड़के से ही चित्रा नक्षत्र का चरण प्रारंभ हो रहा है और साथ ही वैधृति योग की व्याप्ति भी बनी हुई है। शास्त्रों का निर्देश है कि यदि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो, तो भक्तों को देवी पूजा के लिए अभिजित मुहूर्त का चुनाव करना चाहिए अथवा चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के बीत जाने या उनके प्रभाव के कम होने का इंतजार करना चाहिए।

नवरात्रि 2026 घटस्थापना का सबसे सटीक और शुभ मुहूर्त: जानें कलश स्थापना का समय

वर्ष 2026 की शारदीय नवरात्रि पर चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के दूषित संयोग को ध्यान में रखते हुए विद्वानों ने कलश स्थापना के लिए 'अभिजित मुहूर्त' को सबसे उत्तम और निर्दोष समय घोषित किया है। अभिजित मुहूर्त को शास्त्रों में सभी प्रकार के दोषों का निवारण करने वाला और भगवान विष्णु का प्रिय मुहूर्त माना गया है। पंचांग के अनुसार घटस्थापना का प्रात:काल का सामान्य शुभ मुहूर्त सुबह 06:15 बजे से लेकर सुबह 07:30 बजे तक रहेगा, लेकिन जिन स्थानों पर चित्रा और वैधृति का प्रभाव तीव्र है, वहां मध्याह्न काल में दोपहर 11:45 बजे से दोपहर 12:35 बजे के मध्य पड़ने वाले 'अभिजित मुहूर्त' में कलश स्थापना करना सर्वाधिक शुभ और फलदायी रहेगा। इस 50 मिनट की विशेष समयावधि में घटस्थापना करने से सभी प्रकार के नक्षत्र और योग जनित दोष स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं।

देवी पुराण के अनुसार घटस्थापना की सही विधि और आवश्यक नियम

मां भगवती की कृपा और कृपा-प्रसाद प्राप्त करने के लिए घटस्थापना की विधि शास्त्रसम्मत होनी चाहिए। नवरात्रि के पहले दिन प्रातःकाल स्नान ध्यान से निवृत होकर घर के पूजा स्थल या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) को पवित्र गंगाजल छिड़ककर स्वच्छ कर लेना चाहिए। इसके बाद एक मिट्टी की वेदी या चौकोर पात्र में सप्तधान्य (सात प्रकार के अनाज) बोएं और उस पर शुद्ध तांबे, पीतल या मिट्टी के कलश की स्थापना करें। कलश में जल, दूर्वा, पंचपल्लव (आम या अशोक के पत्ते), सुपारी, अक्षत और सिक्का डालें। कलश के मुख पर नारियल (श्रीफल) को लाल कपड़े या चुनरी में लपेटकर स्थापित करें। कलश स्थापना के समय मां दुर्गा का ध्यान करते हुए "ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे" मंत्र का जाप करें। अभिजित मुहूर्त में नियमपूर्वक की गई स्थापना से घर में सुख, शांति, समृद्धि और आरोग्य का वास होता है।

इस तरह करें दोषों का निवारण: मां दुर्गा की पूजा में ध्यान रखने योग्य बातें

यदि किसी कारणवश साधक को प्रातःकाल में ही घटस्थापना करनी पड़े, तो ज्योतिषाचार्यों की सलाह है कि वे पहले विघ्नहर्ता भगवान गणेश और अपने कुलदेवता का पूजन करें और फिर मां दुर्गा के समक्ष क्षमा याचना मंत्र का पाठ करें। चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग के प्रभाव को निष्फल करने के लिए कलश के समीप देसी घी का अखंड दीपक प्रज्वलित करें और मां भगवती को रोली, अक्षत, और लाल पुष्प अर्पित करें। नवरात्रि के नौ दिनों तक रोजाना श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन के समस्त भय, रोग, और मानसिक कषाय दूर हो जाते हैं। 2026 की इस नवरात्रि में सही समय और भक्तिभाव से की गई साधना से मां अंबे अपने भक्तों के भंडार भरेंगी और हर मनोकामना पूर्ण करेंगी।

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