व्यापार

चांदी ने आधी कर दी रकम! ऑल-टाइम हाई से 50% धड़ाम हुई कीमतें

भारतीय सर्राफा बाजार और वैश्विक जिंस बाजारों से इस समय निवेशकों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच देने वाली बड़ी खबर सामने आ रही है। कभी अपनी चमक और ताबड़तोड़ रिटर्न से निवेशकों को मालामाल करने वाली सफेद धातु यानी चांदी (Silver) ने निवेशकों की आधी जमा-पूंजी को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। अपने पिछले रिकॉर्ड तोड़ उच्च स्तर (All-Time High) यानी पीक प्राइस से फिसलते-फिसलते चांदी की कीमतें अब तक लगभग 50% तक नीचे आ चुकी हैं, जिससे बाजार में हाहाकार मचा हुआ है। जिन निवेशकों ने ऊपरी स्तरों पर भारी-भरकम पैसा लगाकर चांदी में निवेश किया था, वे इस भारी गिरावट के बाद सदमे में हैं कि आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि चंद महीनों में ही सफेद धातु का यह हाल हो गया। कमोडिटी मार्केट के जानकारों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर बदलते समीकरणों, डॉलर इंडेक्स में मजबूती और औद्योगिक मांग में सुस्ती के चलते चांदी की कीमतों में यह ऐतिहासिक करेक्शन देखने को मिला है। आइए आज विस्तार से जानते हैं कि चांदी के दाम आधे क्यों हुए हैं और क्या इस मौजूदा गिरावट के बाद सिल्वर बाजार में अभी भी कोई दम बचा है या निवेशकों को इससे दूरी बना लेनी चाहिए।

चांदी के रिकॉर्ड तोड़ पीक से आधे दाम पर आने के पीछे की मुख्य वजहें

वैश्विक और घरेलू जिंस बाजार के विश्लेषकों के अनुसार, चांदी की कीमतों में आई इस भारी-भरकम गिरावट के पीछे कई बड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक कारक जिम्मेदार हैं। कुछ समय पहले जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में औद्योगिक मांग (Industrial Demand) और सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन (EV) तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की खपत को लेकर भारी तेजी की उम्मीदें थीं, तब निवेशकों और बड़े सट्टेबाजों ने इसमें अंधाधुंध पैसा झोंक दिया था, जिससे कीमतें आसमान छूने लगी थीं। लेकिन इसके बाद जैसे ही दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रखने के संकेत दिए और अमेरिकी डॉलर में मजबूती लौट आई, वैसे ही बुलियन मार्केट से पैसा तेजी से बाहर निकलने लगा। इसके अलावा, निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली (Profit Booking) किए जाने और कमोडिटी फ्यूचर्स मार्केट में लॉन्ग पोजीशन कटने के कारण चांदी धड़ाम होती चली गई और देखते ही देखते अपने उच्चतम स्तर से लगभग आधी कीमत पर आ गई।

क्या मौजूदा स्तर पर चांदी में निवेश करना सुरक्षित है या जोखिम भरा?

बाजार की इस भारी मंदी के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या निवेशकों को इस गिरावट का फायदा उठाकर चांदी में खरीदारी (Buy on Dips) करनी चाहिए या फिर अभी और इंतजार करना चाहिए। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि चूंकि चांदी केवल एक कीमती आभूषण या सुरक्षित निवेश ही नहीं, बल्कि यह दुनिया भर के उद्योगों की एक बेहद महत्वपूर्ण कच्ची सामग्री भी है, इसलिए इसकी लंबी अवधि की फंडामेंटल डिमांड हमेशा मजबूत बनी रहती है। ग्रीन एनर्जी ट्रांजिशन, सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट्स और सेमीकंडक्टर उद्योगों में चांदी की मांग आने वाले वर्षों में फिर से रफ्तार पकड़ सकती है। हालांकि, शॉर्ट-टर्म (अल्पकालिक) नजरिए से बाजार में अभी भी काफी उतार-चढ़ाव और अस्थिरता बनी रह सकती है। जो निवेशक लंबी अवधि (3 से 5 साल या उससे अधिक) के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह समय टुकड़ों में (SIP के माध्यम से) खरीदारी करने का एक बेहतरीन मौका हो सकता है, लेकिन एकमुश्त बड़ा पैसा लगाने से पहले जोखिम का पूरा आकलन करना बेहद जरूरी है।

निवेशकों और आम खरीदारों के लिए जरूरी सलाह और बाजार का भविष्य

सर्राफा कारोबारियों और वित्तीय सलाहकारों की निवेशकों को यही सलाह है कि वे बाजार की इस घबराहट (Panic) में आकर अपने पोर्टफोलियो से कौड़ियों के भाव में चांदी या सोना न बेचें। निवेश का स्वर्णिम नियम यही कहता है कि कभी भी अपनी कुल पूंजी का सारा हिस्सा एक ही एसेट क्लास में नहीं लगाना चाहिए। अपने कुल पोर्टफोलियो का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही कीमती धातुओं में रखना समझदारी माना जाता है। आने वाले महीनों में वैश्विक महंगाई के आंकड़े, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े फैसले और इंडस्ट्रियल सेक्टर के डेटा तय करेंगे कि चांदी अपनी खोई हुई चमक वापस पाने में कितनी जल्दी कामयाब होती है। यदि आप भी बाजार में निवेश करने का मन बना रहे हैं, तो किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजरी से सलाह लेकर ही सही रणनीति बनाएं।

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