महिला अधिकारों के हनन पर इंग्लैंड के स्टार बल्लेबाज का बड़ा कदम

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट जगत में मानवाधिकारों और खेल के बीच एक नया बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इंग्लैंड की राष्ट्रीय क्रिकेट टीम के प्रमुख मध्यक्रम बल्लेबाज और स्टार खिलाड़ी ओली पोप (Ollie Pope) ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में आयोजित होने वाली नई अफगानिस्तान प्रीमियर लीग (APL) के ड्राफ्ट से अपना नाम वापस ले लिया है। अफगानिस्तान में तालिबान शासन की वापसी के बाद से महिलाओं और लड़कियों के बुनियादी अधिकारों, शिक्षा और खेल गतिविधियों पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों को लेकर दुनिया भर में भारी विरोध देखने को मिल रहा है। इंग्लैंड के केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी ओली पोप ने अपनी नैतिक प्राथमिकताओं का हवाला देते हुए इस फ्रेंचाइजी लीग में भाग न लेने का एक साहसिक और ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
तालिबान शासन के तहत महिला अधिकारों की स्थिति और क्रिकेट जगत में बढ़ता विरोध
साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता पर काबिज होने के बाद से वहां महिलाओं के जनजीवन, उच्च शिक्षा, नौकरियों और विशेषकर खेल परिसरों में प्रवेश पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। अफगान महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम को भी भंग कर दिया गया था, जिसके बाद कई महिला खिलाड़ियों को देश छोड़कर शरणार्थी के रूप में ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में पनाह लेनी पड़ी थी। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों, नागरिक समाजों और कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट बोर्डों ने तालिबान की इन जनविरोधी नीतियों की कड़ी आलोचना की है। इसी पृष्ठभूमि में आयोजित हो रही टी20 लीग में भाग लेने को लेकर पश्चिमी देशों के खिलाड़ियों पर नैतिक दबाव बढ़ रहा था, जिसके जवाब में ओली पोप ने सबसे पहले स्टैंड लेते हुए लीग का बहिष्कार करने का फैसला किया।
इंग्लैंड क्रिकेट बोर्ड (ECB) और रॉब की का बड़ा बयान, खिलाड़ियों को दी गई नैतिक स्वतंत्रता
इस पूरे घटनाक्रम पर इंग्लैंड एंड वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) के प्रबंध निदेशक रॉब की (Rob Key) का महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि कानूनी रूप से बोर्ड विदेशी फ्रेंचाइजी लीगों में भाग लेने से खिलाड़ियों को पूरी तरह से नहीं रोक सकता, लेकिन यह हर खिलाड़ी का अपना नैतिक फैसला और विवेक होना चाहिए। रॉब की ने स्पष्ट रूप से कहा, "मैं अफगानिस्तान में महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार और उनके अधिकारों के हनन का कड़ा विरोध करता हूँ। व्यक्तिगत रूप से अगर मैं खिलाड़ी होता, तो ऐसी किसी भी लीग में खेलने कभी नहीं जाता। हालांकि, हर खिलाड़ी को अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर सही नैतिक रुख अपनाने की जरूरत है।"
दुनिया भर के क्रिकेटरों के सामने धर्मसंकट, जानिए आगे क्या हो सकता है?
ओली पोप के इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय लीगों में खेलने वाले अन्य विदेशी खिलाड़ियों के सामने भी एक बड़ा धर्मसंकट खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ मोईन अली, डेविड मलान और जेम्स विंस जैसे कुछ अन्य अंग्रेजी खिलाड़ियों ने ड्राफ्ट में अपने नाम दिए हैं, वहीं ओली पोप के इस कड़े कदम के बाद उन पर भी नैतिक दबाव काफी बढ़ गया है। ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट बोर्ड (CA) पहले ही तालिबान के रवैये के विरोध में अफगानिस्तान के साथ द्विपक्षीय सीरीज खेलने से इनकार कर चुका है। ओली पोप का यह फैसला यह साफ संकेत देता है कि वैश्विक खेल जगत अब मानवाधिकारों और महिला समानता के मुद्दों पर चुप्पी साधने के मूड में बिल्कुल नहीं है।