विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की सफाई, रुपये में अत्यधिक उतार-चढ़ाव रोकने के लिए लगातार एक्शन में रहेगा RBI; जानें ताजा स्थिति

वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और मजबूत अमेरिकी डॉलर के चलते विदेशी मुद्रा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सरकार और केंद्रीय बैंक का रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) घरेलू मुद्रा में अत्यधिक और अप्रत्याशित उतार-चढ़ाव को थामने के लिए पूरी तरह सतर्क है और आगे भी बाजार को स्थिर बनाए रखने के लिए लगातार आवश्यक विनियामक कदम उठाता रहेगा।
वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारतीय रिजर्व बैंक की प्राथमिकता रुपये के किसी एक निश्चित स्तर (Fixed Level) का कृत्रिम रूप से बचाव करना नहीं है। केंद्रीय बैंक का मूल उद्देश्य मुद्रा बाजार में एक व्यवस्थित, संतुलित और पारदर्शी माहौल सुनिश्चित करना है ताकि अचानक आने वाले बाहरी झटकों से देश के आयातकों, निर्यातकों और आम वित्तीय तंत्र को नुकसान न पहुंचे।
रुपये पर दबाव के पीछे घरेलू नहीं, बाहरी वैश्विक कारण जिम्मेदार
वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि पिछले एक से डेढ़ साल के दौरान भारतीय रुपये की विनिमय दर में जो गिरावट या दबाव देखने को मिला है, उसके पीछे घरेलू अर्थव्यवस्था की कोई कमजोरी नहीं है। इसके पीछे के अधिकांश कारक देश की सीमाओं के बाहर वैश्विक स्तर पर उपजे हैं। अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए उछाल और मिडिल ईस्ट में लाल सागर संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक लागत बढ़ी है, जिससे दुनिया भर की प्रमुख मुद्राओं पर डॉलर के मुकाबले दबाव बना हुआ है।
सीतारमण ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि भारत के व्यापक आर्थिक बुनियादी ढांचे (Macroeconomic Fundamentals) पूरी तरह मजबूत हैं। देश में राजकोषीय अनुशासन (Fiscal Discipline) का सख्ती से पालन हो रहा है, चालू खाता घाटा नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी विपरीत परिस्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त स्तर पर मौजूद है।
सट्टेबाजी रोकने और डॉलर की मांग घटाने के लिए RBI के कड़े कदम
रुपये को स्थिरता देने और मुद्रा बाजार में डॉलर की तात्कालिक मांग को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले कुछ दिनों में कई बड़े नीतिगत फैसले लिए हैं:
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फॉरेक्स डेरिवेटिव्स नियमों में सख्ती: आरबीआई ने नॉन-डिलीवरेबल फॉरवर्ड (NDF) और करेंसी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग के नियमों को कड़ा कर दिया है, ताकि रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी (Speculative Bets) करने वालों पर लगाम लगाई जा सके। गिफ्ट सिटी (IFSC) में सक्रिय बैंकों और प्राथमिक डीलरों को केवल वास्तविक हेजिंग (Hedging) के लिए ही डेरिवेटिव्स की अनुमति दी गई है।
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बैंकों के लिए आरक्षित प्रावधान: केंद्रीय बैंक ने बैंकों को $2 लाख से अधिक की डॉलर खरीद पर 20 प्रतिशत का अतिरिक्त आरक्षित प्रावधान करने का निर्देश दिया है, जिससे बिना जरूरत के डॉलर जमाखोरी पर रोक लगे।
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ओएमसी के लिए विशेष डॉलर विंडो: सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को कच्चे तेल के आयात के लिए भारी मात्रा में डॉलर की आवश्यकता होती है। जब ये कंपनियां हाजिर बाजार (Spot Market) से अचानक डॉलर खरीदने उतरती हैं, तो रुपये पर भारी दबाव बनता है। आरबीआई ने इनके लिए एक अलग तंत्र तैयार किया है ताकि हाजिर बाजार पर एकमुश्त दबाव न आए।
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डॉलर का इनफ्लो बढ़ाने के उपाय: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश के रास्ते आसान किए गए हैं और बैंकों के जरिए विदेशी मुद्रा अनिवासी जमाराशियों (FCNR-B Deposits) को बढ़ावा दिया गया है।
आरबीआई के एक्शन का बाजार में दिखा तत्काल असर
आरबीआई द्वारा सप्ताहांत में उठाए गए इन कड़े नियामक कदमों और वित्त मंत्री के स्पष्ट बयान का सकारात्मक असर मुद्रा बाजार पर तुरंत दिखाई दिया। हफ्ते के शुरुआती कारोबारी सत्रों में रुपया तेजी से संभला और मंगलवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 77 पैसे मजबूत होकर 95.05 और 94.96 के स्तर पर पहुंच गया। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि डेरिवेटिव्स बाजार से सटोरियों के बाहर होने से रुपये में अस्वाभाविक तेज गिरावट पर ब्रेक लगा है और डॉलर की आपूर्ति सामान्य हो रही है।
शेयर बाजार में LTCG और STT पर भी दिया सकारात्मक संकेत
इसी कार्यक्रम के दौरान जब वित्त मंत्री से शेयर बाजार में निवेशकों द्वारा लंबे समय से उठाई जा रही सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स में बदलाव की मांग पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सकारात्मक रुख दिखाया। सीतारमण ने कहा कि इन टैक्स संरचनाओं पर बाजार सहभागियों और घरेलू व विदेशी निवेशकों से कई सुझाव मिल रहे हैं और वे इन सुझावों पर पूरी गंभीरता से विचार कर रही हैं। चूंकि आगामी बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, ऐसे में सरकार वित्तीय बाजारों के हित और निवेश को प्रोत्साहित करने वाले सभी तार्किक विकल्पों पर खुली चर्चा के लिए तैयार है।
उद्योग और निर्यातकों के लिए आगे का दृष्टिकोण
वित्त मंत्री ने दोहराया कि सरकार और आरबीआई का संयुक्त प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था बाहरी वैश्विक झटकों से अप्रभावित रहे। एक स्थिर और व्यवस्थित विनिमय दर व्यवस्था से भारतीय निर्यातकों को अपने विदेशी ऑर्डर्स की अग्रिम योजना बनाने में आसानी होगी, वहीं आयातकों को मुद्रा अवमूल्यन के कारण होने वाली अतिरिक्त लागत से सुरक्षा मिलेगी। केंद्रीय बैंक की सतत निगरानी यह सुनिश्चित करेगी कि सट्टेबाजी के कारण मुद्रा बाजार में कोई कृत्रिम उथल-पुथल न पैदा हो सके।