20 साल पहले लता मंगेशकर ने गाया था अपना आखिरी फिल्मी गीत, आज भी रूह कंपा देता है ‘लुका छुपी’ का यह दर्द

बॉलीवुड की स्वर कोकिला और भारत रत्न लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) की सुरीली आवाज के बिना भारतीय संगीत जगत की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। उन्होंने अपने सात दशकों से अधिक लंबे करियर में एक से बढ़कर एक अनगिनत गीत गाए, जो आज भी करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज कर रहे हैं। लता दीदी ने अपने करियर में लगभग 30 हजार से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए, जिनमें हर मूड और हर भावना के गीत शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपने ऐतिहासिक करियर के आखिरी दौर में उन्होंने एक ऐसा दर्दभरा और रूह कंपा देने वाला गाना गाया था, जिसे सुनकर आज भी लोगों की आंखें नम हो जाती हैं?
मां और बेटे के रिश्ते की दास्तान बयां करता आखिरी फिल्मी गीत
हम बात कर रहे हैं साल 2006 में रिलीज हुई कल्ट क्लासिक फिल्म 'रंग दे बसंती' (Rang De Basanti) के उस बेहद भावुक गीत की, जिसका शीर्षक 'लुका छुपी' (Luka Chuppi) था। यह गाना एक मां और उसके जवान बेटे के बीच के अटूट प्रेम, उम्मीद और अचानक उपजे उस गहरे खालीपन की कहानी कहता है, जो किसी भी सुनने वाले का दिल चीर कर रख देता है। फिल्म में अभिनेता आर. माधवन ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट अजय सिंह राठौड़ का किरदार निभाया था, जिनकी एक विमान दुर्घटना (मिग-21 क्रैश) में असमय मौत हो जाती है। जब उनका पार्थिव शरीर घर पहुंचता है, तो पर्दे पर जो दृश्य उभरता है, वह हर दर्शक को अंदर से झकझोर देता है।
वहीदा रहमान का अभिनय और प्रसून जोशी के रूहानी बोल
फिल्म में अभिनेता आर. माधवन की मां की भूमिका दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने निभाई थी। जब उनके बेटे का शव घर आता है, तो एक मां के टूटने और इस सच को स्वीकार न कर पाने की तड़प को वहीदा रहमान ने अपनी आंखों और अभिनय के जरिए जिस शिद्दत से पर्दे पर उतारा, उसने इतिहास रच दिया। इस गीत के बोल जाने-माने गीतकार प्रसून जोशी ने लिखे थे, जो सीधे दिल पर वार करते हैं। "लुका छुपी बहुत हुई, सामने आ जा ना…" इन लाइनों में एक मां की वह बेचैनी साफ झलकती है जो अपने बच्चे को हर जगह ढूंढ रही है। इस सदाबहार गीत का संगीत जादूगर ए.आर. रहमान ने तैयार किया था, जबकि इसे स्वर कोकिला लता मंगेशकर और ए.आर. रहमान ने अपनी आवाज से अमर बना दिया।
लता दीदी ने रिकॉर्डिंग के लिए की थी चार दिन रिहर्सल
यह गाना लता मंगेशकर के फिल्मी करियर का आखिरी रिकॉर्ड किया गया हिंदी फिल्मी गीत माना जाता है। इस गाने से जुड़ी एक बेहद खास बात यह है कि अपनी उम्र के इस पड़ाव पर भी लता दीदी ने इस गाने के साथ पूरा न्याय करने के लिए अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस क्लासिक गीत को अपनी आवाज देने के लिए लता मंगेशकर ने लगातार चार दिनों तक रिहर्सल की थी और रिकॉर्डिंग के दौरान वह स्टूडियो में करीब 8 घंटे तक लगातार खड़ी रही थीं। उनकी इसी तपस्या और समर्पण का नतीजा था कि 'लुका छुपी' गाना आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे दर्दभरे और अमर गीतों में गिना जाता है, जो सुनने वाले की रूह को कंपा देता है।