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सितंबर में दोगुनी से ज्यादा हुई प्याज की महंगाई, 108% उछले दाम; सरकार का एक्शन प्लान तैयार, क्या अगले हफ्ते से मिलेगी रसोई को राहत?

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही आम भारतीय परिवारों की रसोई पर महंगाई का दोहरा प्रहार हुआ है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 5.54% और खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) 7.74% पर पहुंच गई है। खाने-पीने की थाली को सबसे तगड़ा झटका सब्जियों, विशेषकर प्याज ने दिया है।

सालाना आधार पर सितंबर के दौरान प्याज की महंगाई दर में 108.09% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, यानी एक साल पहले के मुकाबले प्याज के दाम दोगुने से भी अधिक हो चुके हैं। पिछले साल जहां अक्टूबर की शुरुआत में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब ₹26 से ₹27 प्रति किलोग्राम थी, वहीं वर्तमान में यह देशभर के प्रमुख शहरों में ₹50 से ₹65 प्रति किलो और गुणवत्ता के आधार पर कई मेट्रो शहरों में ₹70 प्रति किलो तक बिक रहा है। वहीं थोक मंडियों में भी प्याज की कीमतें पिछले साल से लगभग 120% से अधिक की तेजी पर चल रही हैं।

आसमान छूती कीमतों के पीछे क्या हैं मुख्य कारण?

प्याज के दामों में आई इस अप्रत्याशित तेजी के पीछे मुख्य रूप से सप्लाई चेन की बाधाएं और मौसमी बदलाव जिम्मेदार हैं:

  • मानसून और भारी बारिश से फसल को नुकसान: देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र (नासिक क्षेत्र), मध्य प्रदेश, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में अगस्त-सितंबर में हुई भारी बारिश से पुरानी रबी फसल के भंडारण (Chawl Stock) में नमी आने से काफी प्याज सड़ गया।

  • सप्लाई का संक्रमण काल (Supply Transition): सितंबर और अक्टूबर का समय वह होता है जब रबी का पुराना प्याज खत्म होने की कगार पर होता है और खरीफ की नई फसल की आवक पूरी तरह शुरू नहीं हो पाती। इस 'सप्लाई गैप' का फायदा उठाकर स्थानीय बिचौलियों और स्टॉकिस्टों ने कृत्रिम जमाखोरी कर कीमतों को हवा दी।

  • त्योहारी मांग में उछाल: नवरात्रि, दशहरा और आगामी दीपावली के चलते होटल, कैटरिंग और घरेलू स्तर पर प्याज की दैनिक खपत में तेज वृद्धि हुई है, जबकि मंडियों में आवक सामान्य से 30% तक कम दर्ज की गई।

सरकार का मेगा एक्शन प्लान: बफर स्टॉक, रेल रैक और ₹35/किलो में बिक्री

प्याज की बेकाबू होती कीमतों पर लगाम लगाने और उपभोक्ताओं को त्वरित राहत पहुंचाने के लिए उपभोक्ता मामले मंत्रालय (Department of Consumer Affairs) ने एक व्यापक मल्टी-मॉडल हस्तक्षेप योजना लागू की है:

  1. ₹35 प्रति किलोग्राम पर रियायती बिक्री: सरकार ने अपने केंद्रीय बफर स्टॉक से नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन (NCCF) और नेफेड (NAFED) के जरिए दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु, गुवाहाटी और चंडीगढ़ समेत 100 से अधिक शहरों में ₹35 प्रति किलो की रियायती दर पर प्याज की खुदरा बिक्री शुरू कर दी है। यह प्याज मोबाइल वैन, सरकारी खुदरा दुकानों और प्रमुख ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध कराया जा रहा है।

  2. 'कांदा एक्सप्रेस' (Kanda Express) का परिचालन: सड़क मार्ग से ट्रकों के जरिए परिवहन में होने वाली देरी और भाड़े की लागत को घटाने के लिए पहली बार भारतीय रेलवे के सहयोग से विशेष रेल रैक (कांदा एक्सप्रेस) चलाए जा रहे हैं। नासिक (महाराष्ट्र) से 800 से 1,600 मीट्रिक टन क्षमता वाली मालगाड़ियां सीधे उत्तर-पूर्व (गुवाहाटी), दिल्ली, चंडीगढ़ और दक्षिण भारत के उपभोग केंद्रों तक प्याज की थोक आपूर्ति पहुंचा रही हैं।

  3. 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक: केंद्र सरकार ने इस वर्ष लगभग 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक तैयार किया है, जिसे अब संवेदनशील और अत्यधिक मूल्य वृद्धि वाले बाजारों में तेजी से डंप किया जा रहा है ताकि स्थानीय मंडियों में कृत्रिम तेजी को तोड़ा जा सके।

क्या अगले हफ्ते से मिलेगी बड़ी राहत? जानिए कब गिरेंगे खुदरा दाम

आम उपभोक्ताओं के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि खुदरा बाजारों में प्याज के दाम कब सामान्य होंगे। कृषि और कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार, अगले हफ्ते से कीमतों में नरमी की शुरुआत हो जाएगी, लेकिन बड़ी और निर्णायक गिरावट अक्टूबर के आखिरी हफ्ते से नवंबर के पहले पखवाड़े में दिखाई देगी:

  • कर्नाटक और आंध्र से खरीफ की आवक: दक्षिण भारत के राज्यों—कर्नाटक और आंध्र प्रदेश—से खरीफ प्याज की आवक मंडियों में शुरू हो चुकी है। अगले 5 से 7 दिनों (अक्टूबर के तीसरे सप्ताह) में यह सप्लाई दक्षिण और पश्चिम भारत के बाजारों को स्थिर कर देगी।

  • महाराष्ट्र की शुरुआती फसल (Early Kharif): महाराष्ट्र के अहिल्यानगर और नासिक बेल्ट से शुरुआती खरीफ प्याज की खेप 22 से 25 अक्टूबर के आसपास थोक मंडियों में उतरनी शुरू हो जाएगी।

  • राजस्थान के अलवर से राहत: उत्तर भारत (दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा) के लिए सबसे बड़ी राहत राजस्थान के अलवर जिले से मिलने वाली है। अक्टूबर के अंत तक अलवर के लाल प्याज की आवक जोर पकड़ेगी, जिससे उत्तर भारत की मंडियों की महाराष्ट्र पर निर्भरता घट जाएगी और थोक भाव तेजी से नीचे आएंगे।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि सरकारी वैन के ₹35 प्रति किलो के हस्तक्षेप और नई खरीफ फसल की आवक बढ़ते ही खुदरा बाजारों में प्याज के दाम मौजूदा ₹60-₹65 से फिसलकर अक्टूबर के अंत तक ₹35 से ₹45 प्रति किलो के दायरे में आ जाएंगे। दीपावली से पहले रसोई के बजट पर प्याज का यह तीखा असर काफी हद तक मंद पड़ने की पूरी संभावना है।

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