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PF Account Withdrawal Rules: पीएफ खाते में जमा हैं ₹1 लाख? जानिए नए नियमों में ₹25,000, ₹50,000 या ₹75,000 में से कितनी रकम निकाल सकते हैं आप

नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (EPFO) का खाता न केवल बुढ़ापे का सबसे बड़ा आर्थिक सहारा माना जाता है, बल्कि आपातकालीन वित्तीय जरूरतों के समय यह एक भरोसेमंद इमरजेंसी फंड की भूमिका भी निभाता है। अक्सर शादी-ब्याह, बच्चों की उच्च शिक्षा, गंभीर बीमारी का इलाज या घर खरीदने जैसे बड़े खर्चों के वक्त कर्मचारियों को पीएफ खाते से एडवांस निकासी की जरूरत पड़ती है। हालांकि, कई बार अंशधारकों के मन में यह बड़ा असमंजस रहता है कि क्या वे अपने खाते में जमा पूरी रकम निकाल सकते हैं या फिर सरकार ने इसकी कोई तय सीमा निर्धारित कर रखी है। यदि आपके ईपीएफ खाते में कुल 1 लाख रुपये का बैलेंस जमा है, तो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नवीनतम नियमों के अनुसार आप 25,000 रुपये, 50,000 रुपये या 75,000 रुपये में से अधिकतम कितनी रकम अपने बैंक खाते में ट्रांसफर करवा सकते हैं, इसका गणित समझना हर वेतनभोगी के लिए बेहद जरूरी है। लखनऊ के गोमती नगर और हजरतगंज स्थित कॉरपोरेट दफ्तरों से लेकर देश भर के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले करोड़ों कर्मचारियों के लिए ईपीएफओ ने निकासी नियमों को पहले से कहीं अधिक पारदर्शी और सुगम बना दिया है।

1 लाख के बैलेंस पर 75 प्रतिशत का फॉर्मूला और 25 प्रतिशत लॉक-इन नियम

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के सामान्य एडवांस निकासी नियमों के मुताबिक, कोई भी कार्यरत अंशधारक अपने कुल पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75 प्रतिशत तक ही गैर-वापसी योग्य (Non-refundable Advance) के रूप में निकाल सकता है। इसका सीधा अर्थ यह हुआ कि यदि आपके पीएफ खाते में कुल 1 लाख रुपये का फंड जमा है, तो आप एक बार में अधिकतम 75,000 रुपये तक की निकासी के लिए आवेदन कर सकते हैं। शेष 25 प्रतिशत यानी 25,000 रुपये की राशि खाते में 'प्रोटेक्टेड' या अनिवार्य रूप से सुरक्षित रखी जाती है। ईपीएफओ ने यह व्यवस्था इसलिए बनाई है ताकि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के हाथ पूरी तरह खाली न हों और बची हुई राशि पर सरकार द्वारा तय किया गया 8.25 प्रतिशत का सालाना चक्रवृद्धि ब्याज लगातार मिलता रहे। जब तक कर्मचारी सेवा में रहता है, तब तक विशेष परिस्थितियों को छोड़कर पूरे 1 लाख रुपये की 100% निकासी की अनुमति नहीं दी जाती।

मेडिकल इमरजेंसी और ऑटो-क्लेम सेटलमेंट में कितनी मिलेगी राहत

यदि किसी कर्मचारी या उसके आश्रित परिवार के सदस्यों (माता-पिता, जीवनसाथी या बच्चों) को अचानक किसी गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने के चलते मेडिकल इमरजेंसी का सामना करना पड़ता है, तो ईपीएफओ के नियम सबसे ज्यादा लचीले साबित होते हैं। चिकित्सा आपातकाल (Form 31 – Illness) के तहत कर्मचारी अपने हिस्से के पूरे अंशदान और उस पर मिले ब्याज के बराबर रकम निकालने का दावा कर सकता है। ₹1 लाख के कुल बैलेंस में यदि कर्मचारी और नियोक्ता का संयुक्त अंशदान पात्रता के दायरे में आता है, तो मरीज के इलाज के लिए ₹75,000 या उससे अधिक की आवश्यक राशि तुरंत स्वीकृत की जा सकती है। इतना ही नहीं, ईपीएफओ ने अपने आईटी सिस्टम को अपग्रेड करते हुए मेडिकल और शिक्षा जैसे प्राथमिक कारणों के लिए ऑटो-मोड क्लेम सेटलमेंट की सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये तक कर दिया है। इसके तहत यदि आपकी केवाईसी और आधार सीडिंग पूरी है, तो आवेदन करने के महज 3 से 4 कार्य दिवसों के भीतर पैसा सीधे आपके बैंक खाते में क्रेडिट हो जाता है।

शादी और बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए 50 प्रतिशत तक निकासी का नियम

यदि आप अपने स्वयं के विवाह, भाई-बहन की शादी या बेटे-बेटी की उच्च शिक्षा के लिए पीएफ खाते से पैसा निकालना चाहते हैं, तो इसके लिए ईपीएफओ ने अलग पात्रता मापदंड तय किए हैं। इस श्रेणी में लाभ उठाने के लिए कर्मचारी का ईपीएफओ में कम से कम 7 वर्ष का निरंतर सेवाकाल (7 Years of Continuous Service) पूरा होना अनिवार्य है। शादी और पढ़ाई के उद्देश्य से आप अपने कुल कर्मचारी अंशदान (Employee Share) का अधिकतम 50 प्रतिशत तक ही निकाल सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि आपके खाते के 1 लाख रुपये के कुल बैलेंस में आपका अपना जमा अंशदान 50,000 रुपये है और बाकी कंपनी का हिस्सा है, तो आप अधिकतम 25,000 रुपये की निकासी कर सकेंगे। यदि आपका अपना अंशदान 1 लाख रुपये है, तो आप सीधे 50,000 रुपये की राशि निकालने के लिए अधिकृत होंगे। जीवनकाल में शादी या शिक्षा के नाम पर अधिकतम तीन बार ही इस तरह की आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है।

मकान निर्माण, फ्लैट खरीद और होम लोन रीपेमेंट की विशेष छूट

घर खरीदना या बनवाना हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सबसे बड़ा सपना होता है और ईपीएफओ इस सपने को पूरा करने के लिए सबसे उदार निकासी विकल्प उपलब्ध कराता है। आवासीय उद्देश्य—जैसे नया मकान खरीदना, फ्लैट बुक करना, प्लॉट खरीदना या पुराने मकान का पुनर्निर्माण—के लिए कम से कम 5 वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद कर्मचारी अपने कुल पीएफ बैलेंस का 90 प्रतिशत तक निकालने के पात्र हो जाते हैं। इस विशेष श्रेणी में यदि आपके खाते में 1 लाख रुपये मौजूद हैं, तो आप 75,000 रुपये की सामान्य सीमा को पार करते हुए विशेष अनुमति के साथ 90,000 रुपये तक की निकासी कर सकते हैं, बशर्ते संपत्ति आपके या आपके जीवनसाथी के नाम पर पंजीकृत हो। इस प्रावधान का इस्तेमाल बैंक से लिए गए होम लोन के मूलधन को चुकाने के लिए भी किया जा सकता है, जिससे कर्ज का मासिक बोझ कम करने में भारी मदद मिलती है।

नौकरी छूटने पर कब निकाल सकते हैं पूरा ₹1 लाख का फंड

यदि किसी कारणवश आपकी नौकरी छूट जाती है या आप रोजगारविहीन हो जाते हैं, तो पीएफ निकासी के नियम सेवा में रहने के दौरान मिलने वाले नियमों से पूरी तरह अलग होते हैं। ईपीएफओ के नियमों के तहत नौकरी छूटने के एक महीने बाद ही आप अपने पीएफ खाते का 75 प्रतिशत यानी ₹75,000 तुरंत निकाल सकते हैं। यदि लगातार दो महीने तक आप किसी नई नौकरी से नहीं जुड़ते हैं और बेरोजगार रहते हैं, तो आपको अपने खाते में बचा हुआ 25% यानी पूरा 1 लाख रुपये निकालने (Full & Final Settlement) की कानूनी अनुमति मिल जाती है। इसके अलावा यदि कर्मचारी 58 वर्ष की आयु पूरी करके रिटायर हो जाता है या स्थायी रूप से विदेश में बसने का फैसला करता है, तो वह बिना किसी रोक-टोक के अपने पीएफ और पेंशन (EPS) की पूरी 100 फीसदी जमा पूंजी एक साथ निकाल सकता है।

टीडीएस और टैक्स नियमों का रखें ध्यान, न करें ये गलती

पीएफ खाते से पैसा निकालते समय टैक्स के नियमों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि आपने लगातार 5 साल की सेवा (5 Years of Continuous Service) पूरी कर ली है, तो निकाली गई कोई भी रकम पूरी तरह से आयकर मुक्त (Tax-Free) होती है। लेकिन यदि आपकी कुल नौकरी 5 साल से कम है और आप 50,000 रुपये से अधिक की रकम निकाल रहे हैं, तो उस पर टीडीएस (TDS) काटा जाता है। यदि आपका पैन कार्ड (PAN) ईपीएफ खाते और यूएएन (UAN) से विधिवत लिंक है, तो 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस कटेगा। यदि पैन लिंक नहीं है, तो अधिकतम सीमांत दर यानी 34.6 प्रतिशत तक का भारी टैक्स कट सकता है। इसलिए यदि आपकी कुल आय करयोग्य सीमा से कम है, तो टीडीएस से बचने के लिए फॉर्म 15G या वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H ऑनलाइन क्लेम के साथ अपलोड करना कभी न भूलें।

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