दिल्ली के व्यापारियों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र: 31 जनवरी 2027 तक राजनीतिक प्रदर्शन टालने की अपील, रोजाना 100 करोड़ के नुकसान का दावा

राजधानी दिल्ली के बाजारों में चल रहे लगातार विरोध-प्रदर्शनों और सुरक्षा पाबंदियों के बीच व्यापारिक समुदाय में गहरा असंतोष फैल गया है। त्योहारी सीजन और आगामी शादियों के कारोबार पर पड़ रहे गंभीर असर को देखते हुए दिल्ली के प्रमुख व्यापारिक संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को औपचारिक पत्र लिखा है। व्यापारियों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप करने और राष्ट्रीय राजधानी में 31 जनवरी 2027 तक सभी प्रकार के राजनीतिक प्रदर्शनों, रैलियों और सड़क जाम को स्थगित या प्रतिबंधित करने की मांग की है। भारतीय उद्योग व्यापार मंडल (BUVM) और अन्य स्थानीय मार्केट एसोसिएशनों ने न केवल प्रधानमंत्री मोदी, बल्कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल से भी पत्र लिखकर इस अवधि में व्यापक जनहित और अर्थव्यवस्था की खातिर प्रदर्शन टालने की गुहार लगाई है।
रोजाना 100 करोड़ रुपये का भारी नुकसान और खाली पड़े प्रमुख बाजार
कनॉट प्लेस (CP), पालिका बाजार, जनपथ, लाजपत नगर, शंकर मार्केट और चांदनी चौक जैसे दिल्ली के प्रमुख रिटेल और थोक बाजारों के दुकानदारों का कहना है कि प्रदर्शनों के कारण कारोबार पूरी तरह ठप हो गया है। एसोसिएशनों के अनुसार, सुरक्षा घेराबंदी, बैरिकेडिंग और रास्तों के बंद होने की वजह से बाजारों में ग्राहकों की संख्या नगण्य हो गई है, जिससे अकेले दिल्ली के बाजारों को रोजाना 100 करोड़ रुपये तक का सीधा कारोबारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। व्यापारियों ने दावा किया कि अक्टूबर से लेकर जनवरी तक का समय रिटेल सेक्टर के लिए साल का सबसे अहम वक्त होता है, जब नवरात्रि, धनतेरस, दिवाली और शादियों के सीजन में साल की लगभग 40 से 50 प्रतिशत बिक्री होती है। व्यापारियों ने पहले से ही करोड़ों रुपये का नया स्टॉक उधार और निवेश कर मंगवाया हुआ है, लेकिन ग्राहक न आने से यह पूंजी फंस गई है।
नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद के ग्राहकों की आवाजाही ठप
व्यापारियों ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में रेखांकित किया है कि दिल्ली के बाजारों की आजीविका केवल स्थानीय निवासियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद और गाजियाबाद जैसे एनसीआर शहरों से रोजाना लाखों खरीदार दिल्ली आते हैं। प्रदर्शनों और पुलिस सुरक्षा के चलते जब प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू होता है या नजदीकी मेट्रो स्टेशनों के गेट बंद किए जाते हैं, तो एनसीआर के ग्राहक दिल्ली आने से पूरी तरह परहेज करने लगते हैं। इसके अलावा, माल की आवाजाही और डिलीवरी लॉजिस्टिक्स में भारी रुकावट आ रही है, जिससे थोक सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो गई है।
लोकतांत्रिक अधिकार बनाम आजीविका: व्यापारियों ने मांगा संतुलन
व्यापारिक संगठनों ने स्पष्ट किया है कि उनका यह पत्र या मांग किसी के भी लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों के खिलाफ नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि वे विरोध करने के अधिकार का सम्मान करते हैं, लेकिन यह विरोध आम नागरिकों, दुकानदारों, कर्मचारियों और दिहाड़ी मजदूरों की आजीविका को बंधक बनाकर नहीं होना चाहिए। पत्र में कहा गया है कि कारोबार में भारी गिरावट के बावजूद दुकानदारों को भारी-भरकम किराया, बिजली के बिल, कर्मचारियों का वेतन और बैंक लोन की ईएमआई चुकानी पड़ती है। यदि 31 जनवरी 2027 तक बाजारों को राजनीतिक तनाव और प्रदर्शनों से मुक्त नहीं रखा गया, तो छोटे दुकानदार और मजदूर भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएंगे।
कानूनी सुरक्षा और सरकार से मुआवजे की भी मांग
बाजार प्रतिनिधियों ने दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष भी अपनी परेशानियां रखी हैं और सरकार से मांग की है कि बार-बार होने वाले इन प्रदर्शनों के लिए विशेष वैकल्पिक स्थल तय किए जाएं ताकि वाणिज्यिक हब बाधित न हों। साथ ही, कुछ एसोसिएशनों ने अनिश्चितता और अशांति के कारण हुए करोड़ों के वित्तीय नुकसान की भरपाई के लिए राहत पैकेज या मुआवजे की भी अपील की है। व्यापारियों ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस प्रशासन त्योहारी सीजन की संवेदनशीलता को समझते हुए बाजारों के निर्बाध संचालन के लिए कड़े कदम उठाएंगे।