कोलकाता के प्रसिद्ध चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में दर्दनाक भगदड़: 19 श्रद्धालुओं की मौत, 25 घायल; जानें कैसे मची अफरा-तफरी

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में जहां पूरा शहर मां दुर्गा की आराधना और दुर्गा पूजा उत्सव के उल्लास में डूबा हुआ था, वहीं महासप्तमी की शाम एक भीषण और दिल दहला देने वाले हादसे ने खुशियों के माहौल को मातम में बदल दिया। उत्तर कोलकाता के गिरीश पार्क थाना क्षेत्र स्थित करीब 91 साल पुराने ऐतिहासिक 'चोरबागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा' पंडाल में दर्शन के दौरान अचानक मची भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 से अधिक श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। मृतकों में महिलाएं और एक सात साल की बच्ची भी शामिल है। घटना के बाद पंडाल को तत्काल सील कर दिया गया है और घायलों को कलकत्ता मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (MCH) में भर्ती कराया गया है।
शाम 7:40 बजे आखिर क्या हुआ? कैसे भड़की अफरा-तफरी
यह दर्दनाक हादसा शनिवार शाम करीब 7 बजकर 40 मिनट पर हुआ। महासप्तमी होने के कारण चोरबागान पंडाल की अनूठी थीम और प्रतिमा के दर्शन के लिए दोपहर से ही हजारों की संख्या में लोगों का रेला उमड़ रहा था।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय पुलिस के अनुसार, हादसे की मुख्य वजहें निम्नलिखित रहीं:
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अचानक तेज बारिश और संकरा रास्ता: शाम को अचानक झमाझम बारिश शुरू हो गई। जो लोग पहले से पंडाल के अंदर दर्शन कर रहे थे, वे भीगने से बचने के लिए बाहर निकलने के बजाय वहीं रुक गए।
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बाहर से अंदर की ओर जबरदस्त धक्का-मुक्की: उसी समय संकरी गलियों में कतार में खड़े हजारों लोग बारिश से बचने और अंदर जाने के लिए प्रवेश द्वारों की तरफ तेजी से बढ़े।
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निकास द्वार पर भयंकर दबाव: एक ही समय पर अंदर जाने और बाहर निकलने के रास्तों पर लोगों का भारी जमावड़ा हो गया। निकास द्वार के पास भीड़ के अत्यधिक दबाव के कारण आगे चल रहे कुछ लोग फिसलकर नीचे गिर पड़े।
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एक-दूसरे को कुचलते हुए भागे लोग: पीछे से आ रहे बेकाबू हुजूम को आगे गिरने वालों का आभास नहीं हुआ और लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए। कई मिनटों तक चले इस हंगामे में दम घुटने और कुचले जाने से 17 लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 2 ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ा।
भीड़ प्रबंधन में गंभीर चूक: 12 से अधिक लोग हिरासत में
हादसे के बाद कोलकाता पुलिस और एंटी-राउडी सेक्शन (ARS) ने घटना स्थल के सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए हैं। पूजा आयोजन समिति के सदस्यों और निजी सुरक्षा गार्डों समेत 12 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पंडाल में क्षमता से तीन गुना अधिक भीड़ को एक साथ प्रवेश दिया गया था और निकास द्वारों पर रोशनी व आपातकालीन इंतजाम नाकाफी थे। जांच एजेंसियां इस बात की भी जांच कर रही हैं कि क्या भीड़ के दबाव से पंडाल के बैरिकेड या किसी ढांचे का हिस्सा ढहा था, जिसके बाद यह भगदड़ शुरू हुई।
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से बड़ी सहायता राशि का ऐलान
इस भीषण त्रासदी पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
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प्रधानमंत्री राहत कोष (PMNRF): प्रधानमंत्री कार्यालय ने मृतकों के परिजनों को ₹2-2 लाख और घायलों को ₹50-50 हजार की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है।
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राज्य सरकार का पैकेज: राज्य प्रशासन ने मृतकों के आश्रितों को ₹25 लाख की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया है, जबकि घायलों को ₹5 लाख की सहायता और मुफ्त इलाज मुहैया कराया जा रहा है।
कलकत्ता हाईकोर्ट की निगरानी में जांच की तैयारी
राज्य सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से इस मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को शामिल कर एक स्वतंत्र फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने का अनुरोध करने का फैसला किया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चाहे आयोजन समिति का कोई पदाधिकारी हो, ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी या होमगार्ड—भीड़ प्रबंधन में लापरवाही बरतने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस हादसे के बाद पूरे कोलकाता में अन्य सभी बड़े पूजा पंडालों की सुरक्षा ऑडिट के सख्त निर्देश जारी कर दिए गए हैं।