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फ्रांस में हिंसक प्रदर्शन से हाहाकार: Apple से लेकर Louis Vuitton तक के लग्जरी स्टोर में लूटपाट, आग में खाक हुआ 143 साल पुराना ऐतिहासिक टाउन हॉल

यूरोपीय महाशक्ति फ्रांस एक बार फिर भीषण नागरिक अशांति, हिंसा और आगजनी की लपटों में घिर गया है। देश में बढ़ती महंगाई, रहन-सहन की लगातार बढ़ती लागत (Cost of Living Crisis) और चरमराती सार्वजनिक सेवाओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का आंदोलन देखते ही देखते बेकाबू और हिंसक दंगों में तब्दील हो गया। राजधानी पेरिस से लेकर ल्योन, मार्सिले, बोर्डो और लिली तक हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि पुलिस को आंसू गैस के गोले और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। इस व्यापक उपद्रव के दौरान नकाबपोश दंगाइयों ने दुनिया के सबसे नामी लग्जरी ब्रांड्स के शोरूम्स पर धावा बोलकर करोड़ों के सामान लूट लिए, जबकि मध्य फ्रांस के शहर लिमोज में 143 साल पुरानी प्रथम विश्व युद्ध दौर की ऐतिहासिक प्रशासनिक धरोहर जलकर राख हो गई।

143 साल पुराना लिमोज टाउन हॉल जलकर खाक, आंसू बहाते दिखे कर्मचारी

इस राष्ट्रव्यापी हिंसा की सबसे दिल दहला देने वाली तस्वीर मध्य फ्रांस के शहर लिमोज (Limoges) से सामने आई। शनिवार देर शाम सैकड़ों नकाबपोश उपद्रवियों ने पहले टाउन हॉल परिसर के बाहर खड़ी पुलिस वैन में आग लगाई और फिर खिड़कियां तोड़कर 143 साल पुरानी इस ऐतिहासिक इमारत के भीतर दाखिल हो गए। दंगाइयों ने इमारत के मुख्य हॉल में आग लगा दी, जो देखते ही देखते पूरे ढांचे में फैल गई। जब तक अग्निशमन दल के जवान मौके पर पहुंचे, 19वीं सदी की यह ऐतिहासिक धरोहर और उसके अनमोल सांस्कृतिक दस्तावेज भीषण लपटों में घिर चुके थे। जलती हुई इमारत के बाहर खड़े नगर निगम के कर्मचारी अपनी आंखों के सामने इस ऐतिहासिक विरासत को स्वाहा होते देखकर बिलख-बिलख कर रोते नजर आए।

Apple, Louis Vuitton और Hermès के लग्जरी स्टोर्स में खुली लूटपाट

पेरिस के प्रतिष्ठित चैंप्स-एलिसीज (Champs-Élysées) और लिली शहर के कमर्शियल हब में दंगाइयों ने पूंजीवाद और कॉर्पोरेट व्यवस्था को निशाना बनाते हुए जमकर तांडव मचाया। लिली शहर में स्थित टेक दिग्गज एप्पल (Apple) के विशाल स्टोर के शीशे हथौड़ों और पत्थरों से चकनाचूर कर दिए गए और उपद्रवी आईफोन, मैकबुक और आईपैड से भरे काउंटर मिनटों में खाली कर भाग निकले। वहीं पेरिस और मार्सिले में लुई वुइटन (Louis Vuitton), हर्मीस (Hermès), डियोर (Dior) और गोयार्ड (Goyard) जैसे हाई-एंड लग्जरी स्टोर्स के शटर उखाड़कर लाखों यूरो मूल्य के डिजाइनर हैंडबैग, घड़ियां और महंगे कपड़े लूट लिए गए। पेरिस के उपमहापौर ने स्थिति को बयां करते हुए कहा कि राजधानी की कई प्रमुख सड़कें पूरी तरह तबाह हो चुकी हैं।

5.5 लाख से अधिक लोग सड़कों पर, 1200 से ज्यादा उपद्रवी गिरफ्तार

फ्रांस के गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में शनिवार को कम से कम 5.5 लाख लोग शामिल हुए, जबकि प्रमुख मजदूर संगठन सीजीटी (CGT) ने दावा किया कि देश भर में 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर थे। शांतिपूर्ण मार्च की आड़ में जैसे ही चरमपंथी तत्व और 'येलो वेस्ट' (Yellow Vests) से जुड़े समूह आगे आए, स्थिति अराजक हो गई। झड़पों में 150 से अधिक सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं, जबकि पुलिस ने रातभर में 1,200 से अधिक दंगाइयों और लुटेरों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रदर्शनकारियों ने ल्योन में टूरिस्ट इन्फॉर्मेशन सेंटर को आग लगा दी, जबकि बोर्डो में पुलिस हेडक्वार्टर और मार्सिले के नगर निगम कार्यालयों पर पथराव कर भारी क्षति पहुंचाई।

इमैनुएल मैक्रों का कड़ा संदेश: हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा

हिंसा और लूटपाट की घटनाओं पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अपनाते हुए देशवासियों को संबोधित किया। मैक्रों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 'हमारे गणराज्य में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। जिन लोगों ने सार्वजनिक संपत्तियों को तोड़ा है, पुलिस पर हमले किए हैं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों को लूटा है और टाउन हॉल को आग के हवाले किया है, उन्हें कानून के तहत सख्त से सख्त सजा दी जाएगी।' देश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने भी स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी सूरत में भीड़तंत्र और उपद्रव के आगे नहीं झुकेगी।

आखिर क्यों उबल रहा है फ्रांस? अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी साधा निशाना

फ्रांस में भड़की इस आग की जड़ें लंबे समय से सुलग रही सामाजिक और आर्थिक नाराजगी में छिपी हैं। पिछले कई महीनों से देश में खाद्यान्न और ऊर्जा की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम मध्यम वर्ग और ग्रामीण आबादी का घरेलू बजट पूरी तरह चरमरा गया है। इसके साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की कमी, बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और विश्वविद्यालयों में कठिन प्रवेश नियमों को लेकर छात्र पिछले तीन हफ्तों से आंदोलन कर रहे थे, जिन्हें 57% से अधिक आम जनता का समर्थन हासिल था।

इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। वेंस ने एक्स पर पोस्ट करते हुए यूरोप की नीतियों और आव्रजन (Immigration) पर सवाल उठाए और कहा कि 'पश्चिमी लिबरल्स ने बुनियादी एकीकरण और स्थिरता को नजरअंदाज किया, जिसका नतीजा आज ऐतिहासिक इमारतों के जलने के रूप में सामने आ रहा है'। उन्होंने उम्मीद जताई कि फ्रांस जल्द ही इस उन्माद पर काबू पा सकेगा।

पूरे फ्रांस में स्थिति अब भी बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और संवेदनशील शहरों में भारी पुलिस बल और बख्तरबंद वाहनों की तैनाती जारी है।

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