Manipur Violence: मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग! उपद्रवियों ने 36 घंटे में 28 घरों को फूंका, भारी सुरक्षा बल तैनात; पुलिस ने जारी किया बड़ा बयान

इंफाल/नई दिल्ली/गुवाहाटी (नेशनल डेस्क): पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील राज्य मणिपुर (Manipur) में शांति लौटने की उम्मीदों को एक बार फिर से गहरा झटका लगा है। पिछले लंबे समय से जातीय संघर्ष की आग में झुलस रहे मणिपुर में कुछ दिनों की खामोशी के बाद अचानक फिर से तनाव (Manipur Tension) चरम पर पहुंच गया है। राज्य के सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों, विशेषकर जिरीबाम (Jiribam), कांगपोकपी, बिष्णुपुर और इंफाल घाटी से सटे जिलों में एक बार फिर से हिंसा और आगजनी का तांडव देखने को मिला है। जमीनी स्तर से आ रही ताजा और डराने वाली खबरों के मुताबिक, हथियारबंद बदमाशों और उपद्रवियों ने पिछले मात्र 36 घंटों के भीतर अलग-अलग इलाकों में करीब 28 घरों को पेट्रोल और ज्वलनशील पदार्थ डालकर आग के हवाले कर दिया है। आसमान में उठते काले धुएं के गुबार और गोलियों की तड़तड़ाहट से एक बार फिर स्थानीय ग्रामीणों में दहशत फैल गई है और लोग अपनी जान बचाकर राहत शिविरों (Relief Camps) की तरफ भागने को मजबूर हैं। इस बीच मणिपुर पुलिस ने बयान जारी कर कहा है कि स्थिति को नियंत्रण में लेने के लिए सुरक्षा के कड़े उपाय किए गए हैं और अतिरिक्त बलों की तैनाती कर दी गई है।
36 घंटे में 28 आशियाने जलकर खाक, रात के अंधेरे में उपद्रवियों का तांडव
मणिपुर से मिल रही ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा की यह ताजा लहर तब शुरू हुई जब कुछ अज्ञात हथियारबंद उग्रवादियों ने देर रात और तड़के सुबह संवेदनशील बफर जोन (Buffer Zone) के पास स्थित गांवों को निशाना बनाया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, पिछले 36 घंटों के अंतराल में उपद्रवियों ने एक के बाद एक हमले करते हुए कुल 28 मकानों और कुछ दुकानों को फूंक दिया। इनमें से कई घर ऐसे थे जिन्हें पहले हुई हिंसा के बाद ग्रामीणों ने खाली कर दिया था, जबकि कुछ घरों में लोग रह रहे थे, जिन्होंने समय रहते जंगलों और सुरक्षा कैंपों में भागकर अपनी जान बचाई। आगजनी के साथ-साथ दोनों पक्षों के हथियारबंद समूहों के बीच कई राउंड की भारी गोलीबारी (Heavy Firing) भी हुई है। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को भी घटनास्थल तक पहुंचने में भारी मशक्कत का सामना करना पड़ा क्योंकि उपद्रवियों ने सड़कों पर अवरोध खड़े कर दिए थे। देखते ही देखते 28 परिवारों की जीवन भर की कमाई और उनके आशियाने राख के ढेर में तब्दील हो गए।
मणिपुर पुलिस का बयान: सुरक्षा के किए गए हैं पुख्ता उपाय, चल रहा सर्च ऑपरेशन
लगातार हो रही आगजनी और हिंसा की घटनाओं के बाद मणिपुर पुलिस (Manipur Police) और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई हैं। मणिपुर पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि प्रभावित इलाकों में कानून-व्यवस्था बहाल करने के लिए सुरक्षा के तमाम कड़े उपाय (Strict Security Measures) किए गए हैं। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि जिस इलाके में 28 घरों को जलाया गया है, वहां असम राइफल्स (Assam Rifles), केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), बीएसएफ (BSF) और राज्य पुलिस के कमांडो की संयुक्त टीमों को तुरंत रवाना किया गया है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली है और पहाड़ियों व जंगलों में छिपे उग्रवादियों को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर 'सर्च और कॉम्बिंग ऑपरेशन' (Combing Operation) चलाया जा रहा है। इसके अलावा, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों के जरिए भी संवेदनशील इलाकों की निगरानी की जा रही है ताकि उपद्रवियों की किसी भी हरकत को तुरंत नाकाम किया जा सके।
क्यों बार-बार भड़क रही है मणिपुर में हिंसा? नहीं थम रहा संघर्ष का दौर
गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से ही मैतेई (Meitei) और कुकी-जो (Kuki-Zo) समुदायों के बीच शुरू हुआ जातीय संघर्ष आज तक पूरी तरह शांत नहीं हो पाया है। इस लंबे संघर्ष में अब तक सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और 50,000 से अधिक लोग अपने ही राज्य में बेघर होकर राहत शिविरों में जिंदगी गुजारने को मजबूर हैं। हाल के महीनों में जिरीबाम (जो असम की सीमा से सटा हुआ जिला है) और अन्य सीमावर्ती इलाकों में हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों ही तरफ के कट्टरपंथी और हथियारबंद समूह (Armed Militants) शांति बहाल नहीं होने देना चाहते। पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए अत्याधुनिक हथियार और सीमा पार से हो रही घुसपैठ सुरक्षा बलों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब भी केंद्र और राज्य की तरफ से शांति वार्ता या सामान्य स्थिति बहाल करने की कोशिश होती है, उपद्रवी तत्व ऐसी आगजनी और हमलों को अंजाम देकर माहौल को फिर से भड़का देते हैं।
प्रभावित इलाकों में कर्फ्यू और हाई अलर्ट, अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
ताजा हिंसा और 28 घरों के जलाए जाने के बाद एहतियात के तौर पर प्रशासन ने प्रभावित जिलों में फिर से कर्फ्यू (Curfew) की पाबंदियों को सख्त कर दिया है और संवेदनशील स्थानों पर एक साथ चार या अधिक लोगों के जमा होने पर रोक लगा दी गई है। सोशल मीडिया के जरिए भड़काऊ वीडियो और फर्जी खबरें (Fake News) फैलाकर माहौल बिगाड़ने की साजिशों को रोकने के लिए साइबर सेल को भी सक्रिय कर दिया गया है। मणिपुर पुलिस ने आम नागरिकों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति या समूह कानून को अपने हाथ में लेने या आगजनी करने की कोशिश करेगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे इलाके में भारी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और चप्पे-चप्पे पर केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान मुस्तैद हैं।