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आसमान से गिरे ड्रोन, रूस के खिलाफ रोकना पड़ा युद्ध… मस्क की ‘स्टारशील्ड’ में खराबी से कैसे लगा जेलेंस्की को झटका

वैश्विक राजनीति और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच एक बहुत ही बड़ा और चौंकाने वाला तकनीकी संकट सामने आया है। दुनिया के दिग्गज अरबपति एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा संचालित सैन्य-ग्रेड सैटेलाइट संचार सेवा 'स्टारशील्ड' (Starshield) में अचानक तकनीकी रुकावट और गड़बड़ी आ जाने के कारण यूक्रेन के लाखों डॉलर कीमत के हथियारबंद ड्रोन आसमान से जमीन पर आ गिरे। इस अप्रत्याशित तकनीकी व्यवधान के चलते यूक्रेनी सेना को अपने लगभग सभी सैन्य अभियान और हमले लगातार तीन दिनों तक पूरी तरह स्थगित करने पड़े। इस घटना ने एक बार फिर वाशिंगटन और कीव के बीच कूटनीतिक तनाव को हवा दे दी है, जहां यूक्रेनी अधिकारी इसे अमेरिका का एक राजनीतिक दबाव मान रहे हैं। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस सैटेलाइट संकट के पीछे की असल कहानी क्या है और युद्ध के मैदान पर इसका कितना गंभीर असर पड़ा है।

स्टारशील्ड में रुकावट से आसमान से गिरे यूक्रेनी ड्रोन, लाखों का नुकसान

प्रतिष्ठित अमेरिकी मीडिया संस्थान 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ्ते जब यूक्रेनी सेना के दर्जनों हथियारबंद ड्रोन रूसी सैन्य ठिकानों और रणनीतिक केंद्रों की ओर आगे बढ़ रहे थे, तभी अचानक उनके वीडियो फीड पूरी तरह धुंधले हो गए और वे नियंत्रण से बाहर हो गए।

यह सब स्टारशील्ड सैटेलाइट नेटवर्क में आई तकनीकी रुकावट के कारण हुआ, जिससे आसमान में उड़ रहे इन ड्रोन्स का जमीन पर बैठे यूक्रेनी पायलटों के साथ सीधा संपर्क टूट गया। संपर्क टूटने के कारण कई एडवांस्ड ड्रोन अनियंत्रित होकर आपस में टकरा गए या क्रैश होकर जमीन पर गिर पड़े। इस एक झटके में यूक्रेनी सैन्य इकाइयों को 1 मिलियन डॉलर (10 लाख डॉलर) से अधिक मूल्य के आधुनिक हथियारों और उपकरणों का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ा।

तीन दिनों तक रोकने पड़े सभी सैन्य अभियान और हमले

इस तकनीकी व्यवधान के कारण यूक्रेनी सैनिकों को भारी सामरिक संकट का सामना करना पड़ा। एक शीर्ष यूक्रेनी सैन्य कमांडर ने जानकारी दी कि सैटेलाइट सिग्नल गुल होने के कारण उन्हें अगले तीन दिनों तक अपने लगभग सभी महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों को पूरी तरह रोकना पड़ा।

इन स्थगित किए गए अभियानों में रूसी सेना की कमांड पोस्ट, रसद डिपो और प्रमुख ईंधन केंद्रों पर किए जाने वाले सटीक हवाई हमले भी शामिल थे। अग्रिम मोर्चों (Frontlines) पर तैनात यूक्रेनी सैनिकों की रक्षा करने और रूसी सेना की आक्रामक बढ़त को धीमा करने के लिए ऐसे ड्रोन हमले बेहद अहम माने जाते हैं। लेकिन स्टारशील्ड के ठप होने से मोर्चों पर तैनात सैनिकों को जैसे अकेला छोड़ दिया गया, जिससे सेना के भीतर भारी गुस्सा और निराशा देखने को मिली।

क्या यह कोई राजनीतिक दबाव है या तकनीकी खराबी

इस घटना ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की (Volodymyr Zelenskyy) और अमेरिकी प्रशासन के बीच तनाव को और अधिक गहरा दिया है। यूक्रेनी अधिकारियों को गहरी आशंका है कि रूसी तेल रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे हमलों के लिए कीव को दंडित करने और युद्ध के मोर्चों पर कुछ कूटनीतिक रियायतें देने के लिए मजबूर करने के वास्ते यह अमेरिकी राजनीतिक दबाव का एक हिस्सा हो सकता है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन और व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने सैटेलाइट सेवाओं में जानबूझकर पाबंदी लगाने या बाधा डालने के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन की तरफ से ऐसा कोई आदेश नहीं दिया गया था, और अब अधिकांश क्षेत्रों में कनेक्टिविटी को पूरी तरह बहाल कर दिया गया है।

स्टारशील्ड और स्टारलिंक की गति सीमित होने से बढ़ी मुश्किलें

आपको बता दें कि 'स्टारशील्ड' एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स द्वारा विकसित एक अत्यधिक उन्नत मिलिट्री-ग्रेड सैटेलाइट संचार प्रणाली है, जिसका इस्तेमाल यूक्रेनी सेनाएं अपने गोपनीय संचार और लंबी दूरी के ड्रोन ऑपरेशनों के लिए करती हैं। यूरोपियन देश यूक्रेन को इस सेवा का भुगतान करते हैं।

कमांडरों का कहना है कि शुरुआती पाबंदियों के बाद से ड्रोन का कनेक्शन 40 मील प्रति घंटे जैसी कम गति पर भी टूटने लगा था। हालांकि बाद में स्थिति में कुछ सुधार हुआ, लेकिन 100 मील प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से उड़ने वाले हमलावर और इंटरसेप्टर ड्रोन का कनेक्शन आज भी बाधित हो जाता है। रूसी जेट-संचालित ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने के लिए यूक्रेनी इंटरसेप्टर ड्रोनों को अत्यधिक तेज गति से उड़ान भरनी पड़ती है, और गति सीमा तय होने के कारण वे रूसी हमलों का मुकाबला करने में पिछड़ रहे हैं।

विकल्प तलाश रहा यूक्रेन, सैनिकों का मनोबल हुआ प्रभावित

इस अनिश्चितता और बार-बार आ रही तकनीकी बाधाओं के कारण अब यूक्रेन अपनी सैन्य निर्भरता के लिए अन्य वैकल्पिक तकनीकों और प्रणालियों की तलाश करने पर मजबूर हो गया है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के सैटेलाइट व्यवधानों से न केवल युद्ध के मैदान में रूस को रणनीतिक फायदा मिला है, बल्कि यूक्रेनी सैनिकों का मनोबल भी प्रभावित हुआ है। युद्ध के इस दौर में तकनीक पर अत्यधिक निर्भरता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध में संचार प्रणालियां किसी भी देश की जीत और हार तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाती हैं।

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