विदेश

‘दाऊद उसी देश में छिपा है, जहां लादेन मिला और मारा गया था…’: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान और यूएन को लगाई खरी-खरी

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक मंचों पर भारत ने एक बार फिर अपने तेवरों और स्पष्टवादिता से पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के एक विशेष प्रतिवेदक द्वारा कुख्यात आतंकवादी और ग्लोबल गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम के आपराधिक संगठन 'डी-कंपनी' (D-Company) को "भारत-आधारित" बताए जाने पर भारत ने बेहद कड़ा ऐतराज जताया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान भारत ने यूएन की इस गंभीर तथ्यात्मक गलती को सिरे से खारिज करते हुए वैश्विक संस्था को जमकर लताड़ लगाई है। भारत ने दो टूक शब्दों में यह खुलासा किया है कि दाऊद इब्राहिम भारत में शरण लिए हुए नहीं है, बल्कि वह ठीक उसी देश में छिपा हुआ है, जहां कुख्यात आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को शरण मिली थी और जहां अमेरिकी सेना ने उसे ढेर किया था। भारत के इस दो टूक और बेबाक बयान ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल मचा दी है। आइए विस्तार से जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि ने इस पूरी घटना पर क्या कुछ कहा और इसके भू-राजनीतिक मायने क्या हैं।

यूएन की रिपोर्ट पर भड़का भारत: डी-कंपनी को 'भारत-आधारित' बताने पर कड़ी आपत्ति

संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में आतंकवाद का मुकाबला करने और मानवाधिकारों से जुड़े मामलों पर चर्चा चल रही थी। इसी दौरान नियुक्त विशेष प्रतिवेदक (Special Rapporteur) बेन सॉल द्वारा एक रिपोर्ट पेश की गई थी। इस रिपोर्ट में भारत के सबसे बड़े वांछित अपराधी और मुंबई बम धमाकों के मास्टरमाइंड दाऊद इब्राहिम के संगठन डी-कंपनी को "भारत-आधारित आपराधिक समूह" करार दिया गया था।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी (Raghu Puri) ने इस झूठे और भ्रामक दावे का कड़ा जवाब देते हुए यूएन को आईना दिखाया। भारतीय राजनयिक ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साफ शब्दों में कहा कि एक वैश्विक संस्था के जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा इस तरह की तथ्यात्मक रूप से गलत और गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्ट जारी करना बेहद अस्वीकार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी अक्षमता और लापरवाही के कारण संयुक्त राष्ट्र जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्था की विश्वसनीयता और वैधता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं, जिसे सदस्य देश नजरअंदाज नहीं कर सकते।

"दाऊद इब्राहिम भारत में नहीं, 1993 से ही देश से बाहर है वांछित"

भारतीय प्रतिनिधि रघु पुरी ने रिपोर्ट में मौजूद उस एक लाइन की धज्जियां उड़ा दीं, जिसमें डी-कंपनी को भारत से जोड़ा गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि साल 2003 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने जब इस आपराधिक समूह के सरगना को अल-कायदा से जुड़े होने के कारण अपनी प्रतिबंधित सूची (List) में शामिल किया था, तब से लेकर आज तक की हकीकत बिल्कुल अलग है।

पुरी ने जोर देकर कहा कि दाऊद इब्राहिम साल 1993 के मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों और देश के कई अन्य भीषण आतंकवादी हमलों के मामले में भारत का सबसे ज्यादा वांछित (Wanted) अपराधी है। वह 2003 की उस लिस्टिंग से बहुत पहले ही भारत छोड़कर भाग चुका था। भारत के बाहर रहकर ही उसने अपने आपराधिक और आतंकी सिंडिकेट को फैलाया, और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अल-कायदा प्रतिबंध व्यवस्था के कारणों में यह बात स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके बावजूद यूएन की रिपोर्ट में इस सच्चाई को नजरअंदाज करना न केवल खेदजनक है, बल्कि यह रिपोर्ट तैयार करने वालों की भारी कार्यकुशलता की कमी को भी दर्शाता है।

पाकिस्तान पर सीधा तंज: 'उसी देश में छिपा है दाऊद, जहां मारा गया था लादेन'

अपने संबोधन के अंत में भारतीय राजनयिक रघु पुरी ने बिना किसी का नाम लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान (Pakistan) की पोल खोल दी और दुनिया को उसकी असलियत याद दिलाई। उन्होंने वैश्विक मंच से दो टूक कहा कि रिकॉर्ड के लिए यह बात पूरी तरह साफ कर दी जानी चाहिए कि वांछित अपराधी दाऊद इब्राहिम आज कहां है।

पुरी ने दुनिया को याद दिलाते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक सूची और खुफिया जानकारियों के अनुसार, दाऊद इब्राहिम ठीक उसी देश में छिपा हुआ है, जहां अल-कायदा का सरगना ओसामा बिन लादेन मिला था और मारा गया था। यहां उनका स्पष्ट और सीधा इशारा पाकिस्तान की ओर था। गौरतलब है कि साल 2011 में पाकिस्तान के एबटाबाद (Abbottabad) शहर में एक गुप्त सैन्य कार्रवाई के दौरान अमेरिकी नेवी सील्स (US Navy SEALs) ने दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को उसके ही ठिकाने पर ढेर किया था। भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच से यह बात स्पष्ट कर दी है कि पाकिस्तान आतंकवादियों का सुरक्षित पनाहगाह (Safe Haven) बना हुआ है, और वैश्विक एजेंसियों को इस सच से आंखें नहीं मूंदनी चाहिए।

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