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‘वोट चोरी’ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ घेराबंदी

भारतीय राजनीति के गलियारों में एक बार फिर से चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और निष्पक्षता को लेकर घमासान छिड़ गया है। विपक्षी दलों के प्रमुख गठबंधन 'इंडिया' (INDIA Alliance) के शीर्ष नेता आज शाम एक महत्वपूर्ण वर्चुअल (ऑनलाइन) बैठक करने जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की अध्यक्षता में होने वाली इस डिजिटल बैठक का मुख्य एजेंडा देश भर में कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों का एक नया और ठोस रोडमैप तैयार करना है। इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के कामकाज और उनके खिलाफ आक्रामक रुख अपनाने को लेकर भी विपक्षी खेमे में गहन मंथन किया जाएगा। हाल के दिनों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष लगातार हमलावर रहा है, और अब इस ऑनलाइन बैठक के जरिए सभी घटक दल मिलकर संसद से लेकर सड़क तक सरकार और आयोग को घेरने की बड़ी रणनीति को अंतिम रूप देंगे।

1 नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित महारैली और देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों की रूपरेखा पर होगी चर्चा

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, आज होने वाली इस वर्चुअल बैठक में आगामी 1 नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन की ओर से आयोजित की जाने वाली विशाल जनसभा और महारैली की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की जाएगी। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों में हेरफेर करके आम नागरिकों के मताधिकार को प्रभावित किया जा रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। पिछले दिनों विपक्षी नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय और अन्य मंचों पर भी अपनी आवाज बुलंद की थी। आज की इस बैठक में यह तय किया जाएगा कि इस आंदोलन को ग्रामीण और शहरी स्तर पर किस प्रकार जन-जन तक पहुंचाया जाए, ताकि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर जनता के बीच एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाया जा सके।

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और संसद से सड़क तक तीखा संघर्ष छेड़ने की तैयारी

इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग और उनके फैसलों के खिलाफ कानूनी व राजनीतिक विकल्पों पर भी मुहर लग सकती है। विपक्षी दलों का एक बड़ा वर्ग लगातार यह आरोप लगा रहा है कि चुनावी संस्थाओं की स्वायत्तता पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक ढांचे को नुकसान पहुंच रहा है। कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस लड़ाई को अब एक तार्किक और निर्णायक मोड़ पर ले जाने का संकल्प ले चुके हैं। आज शाम को होने वाली इस ऑनलाइन बैठक में क्षेत्रीय दलों के तमाम दिग्गज नेता भी जुड़ेंगे और साझा न्यूनतम कार्यक्रम के तहत आगे के विरोध प्रदर्शनों की घोषणा करेंगे, जिससे आने वाले दिनों में देश का राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने की पूरी संभावना है।

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