देश के 90 से अधिक बीएड कॉलेजों में एक ही फैकल्टी का नाम दर्ज

देश भर में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों (Teacher Training Institutes) और बीएड-डीएलएड (B.Ed / D.El.Ed) कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) की उच्चस्तरीय डिजिटल जांच और आधार-आधारित फैकल्टी मैपिंग प्रक्रिया के दौरान एक बहुत बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ है। जांच में पाया गया है कि एक ही शिक्षक (फैकल्टी मेम्बर) का नाम देश के विभिन्न राज्यों में स्थित 90 से अधिक अलग-अलग बीएड और शिक्षण संस्थानों के मास्टर रोल (मस्टर रोल) में बतौर नियमित प्रोफेसर या लेक्चरर दर्ज है। एनसीटीई द्वारा चलाए गए इस विशेष पोर्टल वेरिफिकेशन अभियान ने फर्जी दस्तावेजों और कागजी शिक्षकों के सहारे चल रहे शिक्षा माफिया के पूरे नेटवर्क को बेनकाब कर दिया है। इस गंभीर धांधली के सामने आने के बाद एनसीटीई ने कड़ा रुख अपनाते हुए आरोपी संस्थानों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है और उनकी मान्यता तुरंत प्रभाव से रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
#1. एनसीटीई के डिजिटल फैकल्टी मॉड्यूल से पकड़ी गई देशव्यापी धांधली
एनसीटीई द्वारा पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए शुरू किए गए 'राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा पोर्टल' और बायोमेट्रिक आधार लिंकेज सिस्टम ने इस फर्जीवाड़े को पकड़े जाने में मुख्य भूमिका निभाई है। पूर्व में बीएड और डीएलएड कॉलेज केवल कागजों पर शिक्षकों की सूची जमा करके एनसीटीई और संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों से आसानी से एनओसी (NOC) और मान्यता प्राप्त कर लेते थे। हालांकि, जब एनसीटीई ने देश भर के सभी मान्यता प्राप्त शिक्षक शिक्षा संस्थानों के फैकल्टी डाटा को एक केंद्रीय सर्वर से जोड़कर पैन (PAN) नंबर और आधार कार्ड की डिजिटल मैपिंग की, तो चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। जांच में पाया गया कि कई प्रोफेसरों और लेक्चररों के क्रेडेंशियल्स का इस्तेमाल उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा जैसे राज्यों के दर्जनों कॉलेजों में एक साथ सैलरी रोल पर दिखाया जा रहा था, जबकि वास्तविक रूप से वे शिक्षक किसी एक भी संस्थान में नियमित रूप से पढ़ा नहीं रहे थे।
#1. बिना शिक्षकों के धड़ल्ले से चल रहे थे बीएड कॉलेज और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़
इस बड़े खुलासे ने देश के शिक्षक प्रशिक्षण ढांचे में व्याप्त भ्रष्टाचार और लापरवाही की पोल खोलकर रख दी है। बीएड और डीएलएड कॉलेजों को मान्यता बनाए रखने के लिए एनसीटीई के नियमों के अनुसार निर्धारित संख्या में पीएचडी, नेट (NET) पास और एम.एड (M.Ed) योग्यता वाले पूर्णकालिक शिक्षकों की जरूरत होती है। भारी-भरकम वेतन से बचने के लिए कई निजी कॉलेज प्रबंधन मिलकर 'रेंट-ए-फैकल्टी' (Rent-a-Faculty) का अनैतिक खेल चला रहे थे। इसमें कुछ योग्यताधारी शिक्षकों के शैक्षणिक दस्तावेजों और बैंक डिटेल्स को किराए पर लेकर दर्जनों कॉलेजों के पोर्टलों पर अपलोड कर दिया जाता था और निरीक्षण (Inspection) के समय केवल कागजी खानापूर्ति कर ली जाती थी। इस फर्जीवाड़े का सीधा और घातक असर उन लाखों छात्रों के पठन-पाठन और भविष्य पर पड़ रहा था जो हर साल इन संस्थानों में भारी फीस देकर प्रवेश लेते हैं।
#1. दोषी कॉलेजों की मान्यता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू और एफआईआर की तैयारी
फैकल्टी डुप्लीकेशन और फर्जी दस्तावेज जमा करने के इस संगीन मामले को एनसीटीई के उच्च अधिकारियों ने अत्यधिक गंभीरता से लिया है। एनसीटीई मुख्यालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, जिन 90 से अधिक कॉलेजों में एक ही शिक्षक का नाम दर्ज पाया गया है, उन्हें तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर अपना स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। यदि कॉलेज प्रबंधन संतोषजनक जवाब देने में विफल रहते हैं, तो एनसीटीई अधिनियम की धारा 17 के तहत उनकी स्थायी मान्यता (Affiliation) तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी। इसके अलावा, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले कॉलेजों और इसमें शामिल मध्यस्थों (दलालों) के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी की सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के लिए राज्य सरकारों और पुलिस प्रशासन को पत्र भेजा जा रहा है।
#1. संबंधित राज्य विश्वविद्यालयों और सम्बद्धता निकायों पर भी उठे गंभीर सवाल
इस राष्ट्रीय स्तर के घोटाले ने न केवल कॉलेज मालिकों बल्कि उन राज्य विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक तंत्र को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है जो हर साल इन कॉलेजों को वार्षिक संबद्धता (Affiliation) और परीक्षा केंद्र आवंटन की मंजूरी देते हैं। नियमतः विश्वविद्यालयों की विशेष निरीक्षण समितियां (Inspection Committees) हर सत्र से पहले भौतिक रूप से कॉलेजों में जाकर इंफ्रास्ट्रक्चर और फैकल्टी की जांच करती हैं। सवाल यह उठ रहा है कि वर्षों से जारी इस खेल पर विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और डीन की नजर क्यों नहीं पड़ी। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बिना स्थानीय प्रशासनिक साठगांठ के इतना बड़ा फर्जीवाड़ा संभव नहीं था, इसलिए एनसीटीई अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए निरीक्षण समितियों के अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष समीक्षा कर रही है।
#1. देश भर में शिक्षक शिक्षा में सुधार और डिजिटल बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने का रोडमैप
एनसीटीई ने इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद देश भर के सभी बीएड, एमएड, डीएलएड और बीपीएड संस्थानों के लिए नया सुरक्षा और पारदर्शिता रोडमैप तैयार किया है। अब से सभी मान्यता प्राप्त संस्थानों में सभी शिक्षकों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के लिए रियल-टाइम जीपीएस-बेस्ड बायोमेट्रिक अटेंडेंस (GPS-Biometric Attendance) प्रणाली को अनिवार्य किया जा रहा है, जिसे सीधे केंद्रीय एनसीटीई डैशबोर्ड से जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही, एनसीटीई केवल उन्हीं शिक्षकों को मान्य करेगी जिनका वेतन सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में पीएफएमएस (PFMS) प्रणाली के माध्यम से हस्तांतरित होगा। इस ऐतिहासिक कदम से न केवल फर्जी शिक्षकों के नेटवर्क का हमेशा के लिए अंत होगा, बल्कि देश में भावी शिक्षकों की गुणवत्ता और प्रशिक्षण मानकों में भी एक क्रांतिकारी सुधार आएगा।