आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे मुआवजा घोटाले में नया मोड़, 12 नए नाम आए सामने, DM ने शुरू की जांच

लखनऊ:उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़े मुआवजा घोटाले की फाइल एक बार फिर खुल गई है। इस बार सरोजनी नगर तहसील में तैनात रहे तत्कालीन राजस्व अधिकारियों और12अन्य लोगोंके नाम सामने आए हैं,जिन पर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी कर करोड़ों रुपये का मुआवजा हड़पने का आरोप है।राजस्व परिषद के आदेश के बाद लखनऊ के जिलाधिकारी (DM)विशाख जी. ने सोमवार से इस पूरे घोटाले की नए सिरे से जांच शुरू कर दी है।कैसे दिया गया घोटाले को अंजाम?यह पूरा खेल एक कानून की आड़ में खेला गया। दरअसल, ‘जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम’का एक नियम कहता है कि अगर किसी सरकारी जमीन पर अनुसूचित जाति का कोई व्यक्ति साल2007से पहले से काबिज है,तो उसे उस जमीन का मालिकाना हक दे दिया जाएगा।घोटालेबाजों ने इसी नियम का फायदा उठाया। सरोजनी नगर और सदर तहसील में तैनात तत्कालीन लेखपाल,राजस्व निरीक्षक,तहसीलदार और एसडीएम ने मिलकर राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी की। उन्होंने कई लोगों को फर्जी तरीके से2007से पहले का कब्जाधारी दिखाकर उनके नाम पर करोड़ों का मुआवजा जारी करवा दिया।एक मामले में तो लखनऊ केसरोसा-भरोसा गांवकी एक जमीन परभाई लाल और बनवारी लालनाम के दो लोगों को कब्जाधारी दिखाकर1,09,86,415रुपयेका भारी-भरकम मुआवजा दे दिया गया।अब इन12लोगों पर लटकी है तलवारराजस्व परिषद की शुरुआती जांच में इस घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद अब जिलाधिकारी की जांच में तत्कालीन सरकारी अधिकारियों के अलावा इन12लाभार्थियों को भी शामिल किया गया है:भाई लालबनवारी लालज्ञानवतीविशुना देवीकल्लूजगदीशदुलारेशिवकुमारजगदईनन्द किशोरविशालमहाराजाजिलाधिकारी ने जांच के लिए सरोजनी नगर और सदर तहसील से संबंधित सभी रिकॉर्ड तलब कर लिए हैं और आरोपी अधिकारियों को भीजल्द ही नोटिस जारी करने की तैयारी है।कन्नौज में12साल बाद भी नहीं हुई वसूलीयह पहली बार नहीं है जब इस एक्सप्रेसवे पर मुआवजा घोटाला सामने आया है। इससे पहले कन्नौज में भी इसी तरह का एक बड़ा घोटाला हुआ था,जहां146लोगों को गलत तरीके से5.86करोड़ रुपयेका मुआवजा बांट दिया गया था।12साल बीत जाने के बाद भी सरकार आज तक उस रकम की वसूली नहीं कर पाई है,क्योंकि लाभार्थी हाई कोर्ट चले गए और मामला तब से लटका हुआ है।