SC Big Relief: ‘बेकसूर’ को जेल और इंस्पेक्टर पर 1 लाख का जुर्माना… सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर क्यों लगा दी रोक?

मध्य प्रदेश के एक बहुत ही संवेदनशील और चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर आई है। यह मामला दो छोटी बच्चियों के अपहरण और हत्या से जुड़ा है,जिसमें पुलिस की भूमिका पर ही सवालिया निशान खड़े हो गए थे। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले में जांच अधिकारी (पुलिस इंस्पेक्टर) पर सख्त टिप्पणी करते हुए उन पर1लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस जुर्माने के आदेश पर’स्टे’ (रोक)लगा दिया है।आइये,आसान भाषा में समझते हैं कि पूरा मामला क्या था,हाई कोर्ट क्यों नाराज हुआ और अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा।सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया?मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के सामने पहुंचा। याचिका पुलिस इंस्पेक्टर चैन सिंह उइके की तरफ से दायर की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अगले आदेश तक हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक रहेगी जिसमें इंस्पेक्टर पर1लाख रुपये का जुर्माना (Cost)लगाया गया था। यानी फिलहाल पुलिस अधिकारी को जुर्माना नहीं भरना पड़ेगा।वकील की दलील- “हमारा पक्ष तो सुना ही नहीं”इंस्पेक्टर की तरफ से कोर्ट में वकील अश्विनी दुबे खड़े हुए। उन्होंने एक बहुत ही वाजिब बात रखी। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने सीधे फैसला सुना दिया और जुर्माना लगा दिया,लेकिन जिस पुलिस अधिकारी पर आरोप लगे,उसे अपना पक्ष रखने का मौका (Natural Justice)ही नहीं दिया गया। बिना सफाई सुने इतना बड़ा जुर्माना और इतनी सख्त टिप्पणी करना सही नहीं है। इसी दलील को मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत दी है।फ्लैशबैक: आखिर हुआ क्या था? (पूरी कहानी)यह घटना दिल दहला देने वाली है।4अप्रैल2022:बालाघाट जिले में दो छोटी बच्चियों (उम्र3और5साल) के शव एक डैम के पास मिले।पुलिस की थ्योरी:पुलिस ने अपनी जांच में कहा कि बच्चियों का चाचा ही कातिल है और उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने दावा किया कि यह हत्या अपहरण के बाद की गई।निचली अदालत का फैसला: 31जनवरी2024को सेशन कोर्ट ने पुलिस की जांच को सच मानते हुए आरोपी चाचा को मौत की सजा (फांसी) सुना दी।हाई कोर्ट का यू-टर्न और पुलिस को फटकारजब मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंचा,तो वहां पूरा खेल पलट गया। जजों ने पाया कि पुलिस ने जांच में घोर लापरवाही की है। हाई कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने दुर्भावना (Malicious intent)से काम किया और सबूतों के साथ खेल किया। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस की गलत जांच के कारण एक निर्दोष व्यक्ति को बेवजह साढ़े तीन साल जेल में सड़ना पड़ा।नतीजतन,हाई कोर्ट ने न सिर्फ आरोपी को बाइज्जत बरी किया,बल्कि जांच अधिकारी पर1लाख रुपये का जुर्माना भी लगा दिया था।अब आगे क्या?फिलहाल,पुलिस इंस्पेक्टर को बड़ी राहत मिल गई है। अब सुप्रीम कोर्ट यह देखेगा कि हाई कोर्ट द्वारा पुलिस पर की गई टिप्पणियां सही थीं या नहीं और क्या वाकई जांच में इतनी बड़ी गड़बड़ी थी। लेकिन एक बात तय है,न्याय और खाकी की इस लड़ाई में यह मामला अब नजीर बन रहा है।