व्यापार

टैरिफ वार: US ने बंद किए दरवाजे, तो भारतीय व्यापारियों ने ढूंढ लिए नई गलियां, देखें चौंकाने वाले आंकड़े

व्यापार की दुनिया में कहते हैं कि अगर एक दरवाज़ा बंद होता है,तो दूसरा खुल जाता है। कुछ ऐसा ही आजकल भारतीय एक्सपोर्टर्स (निर्यातकों) के साथ हो रहा है। अगस्त2025में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर50%का भारी-भरकम टैरिफ (Tax)लगा दिया था। जाहिर है,मकसद भारत के व्यापार को चोट पहुँचाना था। लेकिन,नए आंकड़े बता रहे हैं कि भारतीय व्यापारियों ने हार नहीं मानी। उन्होंने अमेरिका के भरोसे बैठने के बजाय,अपना माल एशिया,यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में खपाना शुरू कर दिया है।हालात मुश्किल जरूर हैं,लेकिन भारत ने जिस तरह से वापसी की है,वो दिलचस्प है।गहने: अमेरिका ने मुंह मोड़ा,तो दुबई ने बाहें फैला दींसबसे बड़ा उदाहरण है हमारा जेम्स और ज्वेलरी सेक्टर। सितंबर के महीने में अमेरिका को भेजे जाने वाले गहनों में76%की भारी गिरावट आई। लेकिन क्या हमारा कुल व्यापार ठप हुआ?नहीं! कुल एक्सपोर्ट में सिर्फ1.5%की मामूली कमी आई।जादू यह हुआ कि हमारे व्यापारियों ने अपनी शिपमेंट का रुख मोड़ दिया। जो माल अमेरिका जाना था,वोUAE (79%ज्यादा),हांगकांग और बेल्जियमभेज दिया गया। यानी नुकसान की भरपाई तुरंत कर ली गई।ऑटो और मछली बाजार में’बल्ले-बल्ले’ऑटो कंपोनेंट्स (गाड़ियों के कलपुर्जे) के साथ भी यही हुआ। अमेरिका ने खरीदना कम किया,तो भारत नेजर्मनी,थाईलैंड और यूएईको माल बेच दिया। नतीजा—कुल एक्सपोर्ट घटने के बजाय8%बढ़ गया।उधर, ‘मरीन प्रोडक्ट्स’यानी समुद्री उत्पादों (जैसे झींगा मछली) के लिए अमेरिका सबसे बड़ा ग्राहक हुआ करता था। वहां50%टैक्स लगा तो डिमांड कम हुई,लेकिनचीन,जापान,रूस और वियतनामने भारतीय झींगा हाथों-हाथ लिया। अप्रैल से अक्टूबर2025के बीच चीन और वियतनाम को होने वाला झींगा एक्सपोर्ट24%से123%तक बढ़ गया है। इसे कहते हैं स्मार्ट बिज़नेस!इन सेक्टर्स को लगा है तगड़ा झटकाहालांकि,हर कोई इतना किस्मत वाला नहीं रहा। कुछ ऐसे सेक्टर हैं जहाँ हम अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर थे और वहां अभी नया बाज़ार नहीं मिल पाया है।स्पोर्ट्स गुड्स:भारत के खेल के सामान (जैसे बैट,बॉल आदि) का40%हिस्सा अमेरिका जाता था। वहां डिमांड गिरने से अक्टूबर में यह एक्सपोर्ट6%लुढ़क गया।कपड़े और जूते:कॉटन गारमेंट और लेदर के जूतों का हाल भी थोड़ा बुरा है। अमेरिका से बड़े ऑर्डर नहीं मिल रहे और यूरोप या अरब देशों में उतनी खपत नहीं हो पा रही है जितनी चाहिए। इसलिए लेदर फुटवियर एक्सपोर्ट में10%की गिरावट देखी गई।GDPने दी राहत की खबरइन सबके बीच एक अच्छी खबर यह है कि देश के भीतर की अर्थव्यवस्था मज़बूत है। तमाम मुश्किलों के बावजूद,दूसरी तिमाही (Q2)में भारत कीGDPग्रोथ रेट8.2%रही है,जो पिछले6तिमाहियों में सबसे तेज है। हालांकि,सोने का आयात बढ़ने से व्यापार घाटा (Trade Deficit)बढ़ा है,लेकिन जीडीपी के आंकड़े बताते हैं कि इंजन अभी भी फुल स्पीड में दौड़ रहा है।कुल मिलाकर,अमेरिका की सख्ती ने भारतीय एक्सपोर्टर्स को परेशान जरूर किया है,लेकिन उन्होंने दिखा दिया है कि वे नए रास्ते खोजने में माहिर हैं।

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