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8वां वेतन आयोग: क्या समय से पहले बढ़ेगी सैलरी या इतिहास खुद को दोहराएगा?

केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बड़ी खबर है। आठवें वेतन आयोग (8th CPC)ने अपना काम शुरू कर दिया है। सुनने में यह अच्छा लगता है,लेकिन हकीकत यह है कि इसकी रिपोर्ट तैयार होकर जमा होने में अभी12से18महीने (डेढ़ साल) का वक्त लग सकता है।कर्मचारी चाहते हैं कि सिफारिशें जल्द से जल्द लागू हों और उनकी जेब में बढ़ा हुआ पैसा आए,लेकिन क्या सरकार उनकी सुनेगी?अगर हम पिछले वेतन आयोग (7th CPC)के इतिहास को देखें,तो रास्ता इतना आसान नहीं लगता।7वें वेतन आयोग ने जब फेर दिया था पानीअक्सर कहा जाता है कि इतिहास से सीखना चाहिए। साल2014में जब7वां वेतन आयोग बना था,तब भी कर्मचारी यूनियनों (JCM-Staff Side)ने यही मांग की थी। उनका कहना था कि सिफारिशों को1जनवरी2014से ही लागू किया जाए और वेतन में संशोधन हर10साल के बजाय5साल में हो। उनका तर्क था कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि पुराने वेतन में गुजारा मुश्किल है।लेकिन, 7वें वेतन आयोग ने इन मांगों को साफ-साफ खारिज कर दिया था। आयोग का तर्क सीधा था— “वेतन आयोग का गठन भले ही जल्दी हो गया हो,लेकिन नियम यह है कि वेतन हर10साल बाद ही रिवाइज होगा।” इसलिए,सिफारिशें1जनवरी2016से ही लागू हुईं।क्या इस बार भी होगा वैसा ही?इस पुराने किस्से से यह तो साफ़ है कि8वें वेतन आयोग की सिफारिशें’तय समय से पहले’लागू होने की उम्मीद बहुत कम है। नियम के मुताबिक,इसे1जनवरी2026से लागू होना चाहिए। हालांकि,आज (1दिसंबर2025)से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो रहा है,जिसमें वेतन आयोग से जुड़े कई सवाल-जवाब होने की उम्मीद है। हो सकता है सरकार कोई राहत की खबर दे दे।DAको बेसिक सैलरी में जोड़ने की मांग तेजकर्मचारियों की नाराजगी का एक और बड़ा कारण’महंगाई भत्ता’ (DA)है। यूनियनों का कहना है कि महंगाई इतनी तेजी से बढ़ रही है कि मौजूदा डीए का रेट नाकाफी साबित हो रहा है। इसलिए उनकी मांग है कि डीए (DA)और डीआर (DR)को सीधे’बेसिक सैलरी’ (Basic Pay)में जोड़ दिया जाए (Merge),ताकि वेतन का स्ट्रक्चर मजबूत हो सके।पेंशनर्स भी हैं नाराजसिर्फ नौकरीपेशा लोग ही नहीं,बल्कि रिटायर हो चुके पेंशनर्स भी खुश नहीं हैं। उनकी नाराजगी इस बात को लेकर है कि8वें वेतन आयोग के नियमों (Terms of Reference)में’पेंशन सुधारों’को लेकर कोई साफ बात नहीं लिखी गई है। साथ ही,सिफारिशें किस तारीख से लागू होंगी,इस पर भी सस्पेंस बरकरार है।अब सबकी निगाहें संसद सत्र और आयोग की चाल पर टिकी हैं। क्या सरकार अपने कर्मचारियों को नए साल से पहले कोई तोहफा देगी,या फिर2026तक का इंतज़ार करना पड़ेगा?यह देखना दिलचस्प होगा।

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