खेल

SA20 Final : सौरव गांगुली का दक्षिण अफ्रीका में फिर टूटा दिल, फाइनल में हारी प्रिटोरिया कैपिटल्स

News India Live, Digital Desk: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली का दक्षिण अफ्रीका के साथ एक ‘खट्टा-मीठा’ रिश्ता रहा है। साल 2003 में गांगुली की कप्तानी में भारतीय टीम विश्व कप के फाइनल में जोहान्सबर्ग के मैदान पर ऑस्ट्रेलिया से हारी थी। अब ठीक 22 साल बाद, दक्षिण अफ्रीका की धरती पर इतिहास ने खुद को दोहराया है। SA20 (साउथ अफ्रीका टी20 लीग) के चौथे सीजन में प्रिटोरिया कैपिटल्स के हेड कोच के रूप में गांगुली अपनी टीम को फाइनल तक ले गए, लेकिन खिताबी मुकाबले में उन्हें सनराइजर्स ईस्टर्न केप के हाथों हार का सामना करना पड़ा।फिसड्डी से ‘फाइनलिस्ट’ तक का सफर: गांगुली का जादूप्रिटोरिया कैपिटल्स के लिए इस सीजन की शुरुआत बेहद खराब रही थी। शुरुआती पांच मैचों में टीम केवल एक जीत दर्ज कर पाई थी। इसके बाद कोच सौरव गांगुली के अनुभव और रणनीति का असर दिखा और टीम ने लगातार तीन मैच जीतकर शानदार वापसी की। अगले चार में से दो मैच जीतकर टीम प्लेऑफ में पहुंची और फाइनल में अपनी जगह पक्की की। पिछले दो सीजन में खराब प्रदर्शन करने वाली इस टीम को गांगुली ने अपनी ‘क्रिकेटिंग सूझबूझ’ से पुनर्जीवित कर दिया।फाइनल की आखिरी दहलीज पर चूकी टीमकेप टाउन के न्यूलैंड्स मैदान पर खेले गए फाइनल मुकाबले में प्रिटोरिया कैपिटल्स की बल्लेबाजी लड़खड़ा गई। कम स्कोर का पीछा करते हुए सनराइजर्स ईस्टर्न केप ने आखिरी ओवर में रोमांचक जीत दर्ज की और चार सीजन में अपना तीसरा खिताब जीता। भले ही गांगुली की टीम फाइनल हार गई, लेकिन केशव महाराज के नेतृत्व और ‘दादा’ के मार्गदर्शन में टीम ने जो खेल दिखाया, उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।ग्रीम स्मिथ ने की गांगुली की जमकर तारीफSA20 के कमिश्नर और दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ गांगुली के प्रभाव से बेहद प्रभावित नजर आए। एक प्रेस वार्ता में स्मिथ ने कहा, “दादा खेल के बेहतरीन लीडर्स में से एक हैं और भारत के आइकॉन हैं। उनके आने से लीग का स्तर बढ़ा है। हालांकि मैं जानता हूँ कि वह फाइनल हारने से निराश होंगे, लेकिन दो खराब सीजन के बाद टीम को यहाँ तक लाना बड़ी बात है।” स्मिथ ने यह भी इच्छा जताई कि वह अगले साल भी गांगुली को दक्षिण अफ्रीका में देखना चाहेंगे।बीसीसीआई और भारतीय खिलाड़ियों पर क्या बोले स्मिथ?SA20 लीग हमेशा से भारतीय खिलाड़ियों को शामिल करने की इच्छुक रही है, लेकिन बीसीसीआई (BCCI) के सख्त नियमों के कारण सक्रिय भारतीय खिलाड़ी विदेशी लीग में नहीं खेल सकते। इस पर ग्रीम स्मिथ ने कहा, “हम बीसीसीआई के साथ लगातार संपर्क में हैं और उनके नियमों का सम्मान करते हैं। भले ही सक्रिय खिलाड़ी न हों, लेकिन गांगुली और दिनेश कार्तिक जैसे दिग्गजों के जुड़ने से लीग को भारतीय टच मिला है।”सौरव गांगुली के लिए दक्षिण अफ्रीका में ‘अधूरा काम’ अब अगले साल की चुनौती बन गया है। क्या 2027 में ‘दादा’ रेनबो नेशन में अपनी पहली कोचिंग ट्रॉफी उठा पाएंगे? यह देखना दिलचस्प होगा।

Back to top button