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Aadhaar SIM Card Fraud: आपके नाम पर तो नहीं चल रहा कोई फर्जी सिम? ‘संचार साथी’ से 2 मिनट में करें चेक, वरना ₹50 लाख जुर्माना और जेल का खतरा

देश में डिजिटल सेवाओं और ऑनलाइन लेन-देन के विस्तार के साथ-साथ साइबर ठगी और फर्जीवाड़े के मामलों में भी भारी उछाल आया है। अक्सर देखा जाता है कि लोग किसी स्थानीय दुकान या एजेंट के पास सिम कार्ड खरीदने जाते हैं और वहां उनका बायोमेट्रिक डेटा या आधार कार्ड की फोटोकॉपी अनजाने में गलत हाथों में चली जाती है। जालसाज उसी पहचान पत्र का इस्तेमाल करके चुपके से दूसरा या तीसरा सिम कार्ड एक्टिवेट कर लेते हैं। इन फर्जी नंबरों का उपयोग ऑनलाइन फाइनेंशियल फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, लॉटरी स्कैम या आपराधिक गतिविधियों में किया जाता है।

जब भी कोई साइबर अपराध घटित होता है, तो जांच एजेंसियां सबसे पहले उस मोबाइल नंबर के रजिस्टर्ड मालिक तक पहुंचती हैं। ऐसे में यदि आपके आधार कार्ड से निकला कोई अनधिकृत नंबर किसी गैर-कानूनी गतिविधि में पकड़ा जाता है, तो कानून की नजर में प्राथमिक जवाबदेही आपकी बन जाती है। इसलिए समय-समय पर यह जांचना बेहद जरूरी है कि आपके नाम और पहचान पत्र पर असल में कितने सिम कार्ड वर्तमान में सक्रिय हैं।

टेलीकम्यूनिकेशन एक्ट के तहत कड़े प्रावधान: ₹50 लाख तक का जुर्माना और 3 साल की जेल

केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए दूरसंचार कानून (Telecommunications Act) में फर्जी पहचान पत्रों पर सिम कार्ड खरीदने, बेचने या रखने को लेकर बेहद सख्त सजा के प्रावधान किए गए हैं। धोखे से, फर्जी आईडी से या दूसरों के दस्तावेजों का दुरुपयोग करके सिम हासिल करने (SIM Identity Theft) के मामलों को संज्ञेय अपराध की श्रेणी में रखा गया है।

नए कानूनी नियमों के तहत जो भी व्यक्ति जाली दस्तावेजों या फर्जी पहचान से सिम कार्ड हासिल करता है, उसे अधिकतम 3 साल तक की जेल की सजा और ₹50 लाख तक का भारी जुर्माना या दोनों भुगतने पड़ सकते हैं। इसके अलावा, एक व्यक्ति के नाम पर अधिकतम 9 सिम कार्ड (जम्मू-कश्मीर, असम और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए अधिकतम 6 सिम) रखने की कानूनी सीमा निर्धारित है। सीमा से अधिक सिम कार्ड बिना वैध अनुमति के चालू रखने पर भी प्रति सिम ₹50,000 से ₹2 लाख तक के प्रशासनिक जुर्माने का प्रावधान है।

'संचार साथी' (TAFCOP): 2 मिनट में अपने नाम पर दर्ज मोबाइल नंबरों की जांच कैसे करें?

दूरसंचार विभाग (Department of Telecommunications – DoT) ने नागरिकों की सुरक्षा के लिए 'संचार साथी' (Sanchar Saathi) पोर्टल और इसके तहत TAFCOP (Telecom Analytics for Fraud Management and Consumer Protection) टूल शुरू किया है। इस सरकारी पोर्टल के जरिए कोई भी नागरिक घर बैठे अपने नाम पर जारी सभी सिम नंबरों की सूची देख सकता है।

जांच करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया बेहद सरल है:

  1. सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में आधिकारिक पोर्टल sanchar saathi.gov.in खोलें।

  2. होमपेज पर सिटिजन-सेंट्रिक सर्विसेज (Citizen Centric Services) सेक्शन में जाएं और "Know Your Mobile Connections (TAFCOP)" विकल्प पर क्लिक करें।

  3. वहां अपना 10 अंकों का सक्रिय मोबाइल नंबर दर्ज करें और स्क्रीन पर दिख रहा कैप्चा कोड भरें।

  4. आपके फोन पर आए 6 अंकों के ओटीपी (OTP) को दर्ज करके लॉग इन करें।

  5. लॉग इन होते ही स्क्रीन पर उन सभी मोबाइल नंबरों की सूची (आंशिक रूप से छिपे हुए अंकों के साथ) आ जाएगी, जो आपके पहचान पत्र पर जारी किए गए हैं।

अनजान नंबर दिखते ही तुरंत कैसे करें ब्लॉक? रिपोर्ट करने का सही तरीका

जैसे ही स्क्रीन पर नंबरों की लिस्ट खुलती है, आपको हर नंबर को ध्यान से देखना चाहिए। यदि सूची में कोई ऐसा नंबर दिखता है जिसे आपने कभी नहीं खरीदा, या कोई ऐसा पुराना नंबर है जिसे आप वर्षों पहले बंद करवा चुके हैं, तो उसे तुरंत पोर्टल से रिपोर्ट कर सकते हैं:

  • जो नंबर आपका नहीं है, उसके आगे बॉक्स को टिक करें और "Not My Number" (यह मेरा नंबर नहीं है) का विकल्प चुनें।

  • यदि कोई नंबर आपका था लेकिन अब आप उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं, तो "Not Required" (अब आवश्यकता नहीं है) विकल्प पर क्लिक करें।

  • इसके बाद नीचे दिए गए "Report" बटन पर क्लिक करें।

रिपोर्ट सबमिट होते ही सिस्टम आपको एक रेफरेंस टिकट नंबर (Ticket ID) जारी करेगा। इसके बाद टेलीकॉम विभाग संबंधित टेलीकॉम कंपनी (Airtel, Jio, Vi या BSNL) को अलर्ट भेजता है। टेलीकॉम ऑपरेटर उस नंबर के लिए री-वेरिफिकेशन प्रक्रिया शुरू करता है और सत्यापन में विफल रहने पर उस फर्जी कनेक्शन को स्थायी रूप से ब्लॉक और निष्क्रिय (Deactivate) कर देता है।

भविष्य में सिम धोखाधड़ी से बचने के लिए जरूरी सावधानियां

सिम कार्ड के दुरुपयोग से बचने के लिए कुछ बुनियादी सावधानियां बरतना अनिवार्य है। कभी भी किसी भी दुकान या सड़क किनारे लगे अनधिकृत स्टॉल पर सिम कार्ड लेते समय अपने आधार की भौतिक फोटोकॉपी खुले में न छोड़ें। यदि आप फोटोकॉपी दे भी रहे हैं, तो उस पर हस्ताक्षर के साथ यह साफ-साफ लिखें कि यह प्रति केवल किस तारीख को और किस कंपनी का सिम लेने के लिए दी जा रही है।

इसके अलावा, नियमित रूप से हर दो से तीन महीने में संचार साथी पोर्टल पर जाकर अपने नाम दर्ज नंबरों की स्थिति चेक करते रहें। यदि आपका मोबाइल फोन कभी गुम या चोरी हो जाता है, तो इसी पोर्टल के CEIR (Central Equipment Identity Register) विकल्प का उपयोग करके अपने फोन के IMEI नंबर को भी तुरंत ब्लॉक कराएं, ताकि कोई आपके हैंडसेट या सिम का गलत इस्तेमाल न कर सके।

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