उत्तर प्रदेश

UP Labor : क्या यूपी में 20,000 रुपये हो गई न्यूनतम मजदूरी? योगी सरकार ने वायरल खबर पर तोड़ी चुप्पी

News India Live, Digital Desk: सोशल मीडिया पर इन दिनों उत्तर प्रदेश के मजदूरों और कर्मचारियों के लिए एक खबर तेजी से जंगल में आग की तरह फैल रही है। दावा किया जा रहा है कि योगी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर सीधे 20,000 रुपये प्रति माह कर दी है। इस खबर के वायरल होते ही जहां मजदूरों में खुशी की लहर दौड़ गई, वहीं नियोक्ताओं के बीच खलबली मच गई। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इस वायरल मैसेज पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए सच्चाई सामने रखी है।20,000 रुपये वेतन वाली खबर का पूरा सचअगर आप भी इस वायरल खबर को सच मानकर खुश हो रहे हैं, तो जरा ठहरिए। उत्तर प्रदेश शासन और श्रम विभाग ने स्पष्ट किया है कि न्यूनतम मजदूरी को 20,000 रुपये करने का कोई भी आदेश जारी नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट या मैसेज शेयर किए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से भ्रामक और फर्जी (Fake) हैं। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे ऐसी अपुष्ट खबरों पर भरोसा न करें और न ही इन्हें आगे शेयर करें।भ्रम फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाईसरकार ने इस फर्जी खबर का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। श्रम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जानबूझकर मजदूरों और औद्योगिक इकाइयों के बीच भ्रम पैदा करने के लिए ऐसी खबरें फैलाई जा रही हैं। सूचना विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि सरकार जब भी कोई आधिकारिक फैसला लेती है, तो उसे अधिकृत माध्यमों से ही साझा किया जाता है। फर्जी खबरें फैलाने वालों के खिलाफ आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सकती है।वास्तव में कितनी बढ़ी है मजदूरी?यह सच है कि हाल ही में योगी सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में संशोधन किया है, लेकिन यह वृद्धि उतनी नहीं है जितनी सोशल मीडिया पर बताई जा रही है। सरकार ने नियमानुसार महंगाई भत्ते (VDA) को जोड़कर मजदूरी की दरों में कुछ सौ रुपये की बढ़ोतरी की है, जो हर छह महीने में एक सामान्य प्रक्रिया के तहत की जाती है। अकुशल, अर्ध-कुशल और कुशल श्रमिकों के लिए तय की गई वास्तविक दरें 20,000 रुपये के आंकड़े से काफी दूर हैं।निकाली जा रही है अधिकारिक लिस्टभ्रम की स्थिति को दूर करने के लिए श्रम विभाग ने सभी जिलों के सहायक श्रम आयुक्तों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में वास्तविक न्यूनतम मजदूरी की दरों का प्रचार-प्रसार करें। नोएडा, गाजियाबाद जैसे औद्योगिक शहरों में लेबर ऑफिस के बाहर सही दरों की सूची चस्पा की जा रही है ताकि फैक्ट्री मालिक और मजदूर दोनों ही सही जानकारी प्राप्त कर सकें। किसी भी संशय की स्थिति में सीधे श्रम विभाग की वेबसाइट चेक करने की सलाह दी गई है।

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