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Abhijeet Dipke News: रिटायर्ड पिता ने विदेश में कैसे कराया अभिजीत दिपके को दाखिला? RTI कार्यकर्ता ने CJP फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांग

नई दिल्ली: सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और डिजिटल एक्टिविस्ट अभिजीत दिपके (Abhijeet Dipke) की विदेश में पढ़ाई और उससे जुड़ी फंडिंग को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक प्रमुख RTI कार्यकर्ता ने एनजीओ 'सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस' (CJP) के वित्तीय लेन-देन और अभिजीत दिपके की यूके (UK) में उच्च शिक्षा पर हुए भारी-भरकम खर्च को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता का आरोप है कि एक रिटायर्ड मिडिल-क्लास पिता के लिए अपने बेटे को विदेश में इतनी महंगी पढ़ाई कराना व्यावहारिक रूप से बेहद कठिन है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि एनजीओ को मिलने वाले डोनेशन या विदेशी फंड का इस्तेमाल इस व्यक्तिगत पढ़ाई के लिए किया गया हो सकता है।

RTI कार्यकर्ता के मुख्य आरोप: फंड के इस्तेमाल और पारदर्शिता पर सवाल

मामला तब गरमाया जब आरटीआई कार्यकर्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीजेपी (CJP – Citizens for Justice and Peace) संगठन की बैलेंस शीट और फंडिंग के स्त्रोतों पर सवाल उठाए।

  • शिक्षा पर भारी खर्च: अभिजीत दिपके ने ब्रिटेन (UK) के एक प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई की है, जहाँ की सालाना फीस और रहने का खर्च लाखों रुपये में होता है।

  • पारदर्शिता की कमी: RTI एक्टिविस्ट का कहना है कि दिपके के पिता सरकारी/निजी सेवा से सेवानिवृत्त हैं, और उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से इस विशाल खर्च का तालमेल बैठता नजर नहीं आ रहा है।

  • सीजेपी फंड की जांच की मांग: कार्यकर्ता ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) और गृह मंत्रालय (MHA) से मांग की है कि एनजीओ CJP को मिलने वाले चंदे और विदेशी अंशदान (FCRA) के खातों की गहन वित्तीय जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि एनजीओ के पैसे का कहीं कोई गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ।

अभिजीत दिपके और CJP समर्थकों का पक्ष

दूसरी तरफ, इस मामले में अभिजीत दिपके के समर्थकों और एनजीओ से जुड़े लोगों ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि:

  • शिक्षा के लिए एजुकेशन लोन: दिपके की विदेश में पढ़ाई पूरी तरह से वैध एजुकेशन लोन (Education Loan), व्यक्तिगत बचत और छात्रवृत्ति (Scholarship) के माध्यम से पूरी की गई है।

  • राजनीतिक द्वेष का आरोप: समर्थकों का दावा है कि सोशल मीडिया पर उनके विचारों और एक्टिविज्म के कारण उन्हें जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और उनके परिवार को अनावश्यक विवाद में घसीटा जा रहा है।

एजेंसियों से जांच की मांग और सोशल मीडिया पर बहस

इस खुलासे के बाद से ही एक्स (ट्विटर) और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 'जॉब सिक्योरिटी', एनजीओ फंडिंग और ट्रांसपेरेंसी को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। यूजर्स का एक वर्ग निष्पक्ष कानूनी जांच की मांग कर रहा है, ताकि सच सामने आ सके। फिलहाल, इस मामले में संबंधित एनजीओ या सरकारी जांच एजेंसियों की तरफ से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है।

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