Budh Pradosh Vrat 2026 : व्यापार में सफलता के लिए बुध प्रदोष पर करें ये उपाय, जानें अप्रैल में कब है सही तारीख और मुहूर्त

News India Live, Digital Desk: हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास की शुरुआत के साथ ही महादेव की भक्ति का विशेष समय आ गया है। अप्रैल 2026 का पहला प्रदोष व्रत 15 अप्रैल, बुधवार को रखा जाएगा। बुधवार के दिन पड़ने के कारण इसे ‘बुध प्रदोष व्रत’ के नाम से जाना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना गया है। ऐसे में बुध प्रदोष का संयोग उन लोगों के लिए अत्यंत फलदायी है जो करियर में उन्नति और बिजनेस में सफलता पाना चाहते हैं।बुध प्रदोष 2026: तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्तवैशाख कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि का विशेष महत्व है। इस दिन प्रदोष काल में की गई पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है:त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 14 अप्रैल 2026, रात 12:12 बजे सेत्रयोदशी तिथि समाप्त: 15 अप्रैल 2026, रात 10:31 बजे तकपूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 06:56 बजे से रात 09:13 बजे तक (प्रदोष काल)उदया तिथि: 15 अप्रैल को होने के कारण व्रत इसी दिन रखा जाएगा।व्यापार में तरक्की के लिए विशेष ज्योतिषीय उपाय (Astro Tips)यदि आपका कारोबार मंदा चल रहा है या कड़ी मेहनत के बाद भी सफलता नहीं मिल रही है, तो बुध प्रदोष के दिन ये उपाय आपके भाग्य के द्वार खोल सकते हैं:हरे मूंग का दान: बुध ग्रह का संबंध हरे रंग से है। इस दिन शाम के समय महादेव को 108 मूंग के दाने अर्पित करें और फिर इन्हें किसी जरूरतमंद को दान कर दें। इससे व्यापारिक बाधाएं दूर होती हैं।शिवलिंग पर शमी पत्र: बिजनेस में निर्णय क्षमता (Decision Making) बढ़ाने के लिए शिवलिंग पर 11 शमी पत्र चढ़ाएं। इससे बुध दोष शांत होता है और बुद्धि प्रखर होती है।गाय को हरा चारा: इस दिन गौशाला में जाकर गाय को हरा चारा खिलाएं। यह उपाय धन के आगमन के नए स्रोत खोलता है।रुद्राभिषेक: संभव हो तो प्रदोष काल में शहद और गंगाजल से शिव जी का अभिषेक करें। इससे अटके हुए प्रोजेक्ट्स में गति आती है।प्रदोष व्रत की पूजा विधि: इन बातों का रखें ध्यानप्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय यानी सूर्यास्त के आसपास की जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। पूरे दिन निराहार या फलाहार रहें। शाम को पूजा के समय सफेद या हल्के रंग के वस्त्र पहनना शुभ होता है। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, अक्षत और चंदन अर्पित करें। अंत में प्रदोष व्रत कथा का पाठ जरूर करें, क्योंकि इसके बिना व्रत अधूरा माना जाता है।अप्रैल 2026 का दूसरा प्रदोष व्रत कब?अप्रैल महीने में महादेव की कृपा दो बार बरसेगी। पहला 15 अप्रैल (बुधवार) को है, जबकि दूसरा प्रदोष व्रत 28 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को पड़ेगा, जिसे ‘भौम प्रदोष’ कहा जाता है। भौम प्रदोष मुख्य रूप से कर्ज मुक्ति (Freedom from Debt) और रोगों से मुक्ति के लिए विशेष माना जाता है।