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Asian Market Live Today: यूएस टेक स्टॉक्स की रैली के बाद एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख; भारतीय बाजारों के लिए ‘गैप-डाउन’ ओपनिंग के संकेत, जानें आज के बड़े ग्लोबल ट्रिगर्स

अमेरिकी शेयर बाजारों में आई जोरदार तेजी के बाद शुक्रवार, 19 जून 2026 को एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। वॉल स्ट्रीट पर सेमीकंडक्टर और दिग्गज टेक शेयरों में आई रात भर की लिवाली का आंशिक असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिख रहा है।

जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) सूचकांक 0.48% की बढ़त के साथ ट्रेड कर रहा है, जबकि वहां का टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स पूरी तरह सपाट है। वहीं, दक्षिण कोरिया के बाजार में जबरदस्त बूम देखा जा रहा है, जहां कोस्पी (KOSPI) 2.60% की भारी छलांग लगाकर रिकॉर्ड ऊंचाइयों को छू रहा है; हालांकि वहां का स्मॉल-कैप इंडेक्स कोसडैक (Kosdaq) 0.39% टूट गया है। गौरतलब है कि चीन, हांगकांग और ताइवान के शेयर बाजार आज स्थानीय सार्वजनिक छुट्टी (Holiday) के कारण पूरी तरह बंद हैं।

भारतीय बाजारों के लिए 'गैप-डाउन' शुरुआत के बड़े संकेत (GIFT Nifty Alert)

वैश्विक बाजारों में चल रही इस हलचल के बीच भारतीय घरेलू शेयर बाजार (BSE Sensex और NSE Nifty) के लिए आज सुबह निराशाजनक संकेत सामने आए हैं:

  • निफ्टी फ्यूचर्स पर बड़ा डिस्काउंट: सुबह के शुरुआती कारोबार में गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) 24,001 के स्तर के आसपास रेंगता हुआ नजर आया। यह भाव एनएसई निफ्टी फ्यूचर्स के पिछले क्लोजिंग स्तर से लगभग 191 अंकों का भारी डिस्काउंट (गिरावट) दर्शा रहा है।

  • गैप-डाउन ओपनिंग: गिफ्ट निफ्टी का यह स्तर साफ संकेत दे रहा है कि आज दलाल स्ट्रीट पर भारतीय सूचकांकों की शुरुआत एक बड़े 'गैप-डाउन' (गिरावट के साथ ओपनिंग) के साथ होने जा रही है, जिससे शुरुआती सत्र में निवेशकों पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

आज के 7 बड़े वैश्विक ट्रिगर्स, जो बाजार की दिशा तय करेंगे (Global Market Setup)

1. वॉल स्ट्रीट पर चिप शेयर्स का जलवा; नैस्डैक 1.91% उछला

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में सेमीकंडक्टर और चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में आई सुनामी के दम पर बाजार रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए। डाओ जोन्स (Dow Jones) 0.14% बढ़कर 51,564.70 पर, S&P 500 सूचकांक 1.08% की मजबूती के साथ 7,500.58 के ऐतिहासिक स्तर पर और नैस्डैक कम्पोजिट (Nasdaq) 496 अंक या 1.91% की भारी बढ़त के साथ 26,517.93 के स्तर पर बंद हुआ।

  • सॉलिड वीकली गेन्स: शुक्रवार को अमेरिका में 'जूनटीन्थ' (Juneteenth) की छुट्टी के कारण वॉल स्ट्रीट बंद रहेगा। इस वजह से कल ही साप्ताहिक क्लोजिंग हो गई, जिसमें नैस्डैक ने पूरे हफ्ते में 2.43%, S&P 500 ने 0.93% और डाओ जोन्स ने 0.71% की शानदार साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है।

  • दिग्गज शेयरों का हाल: इंटेल (Intel) के शेयर 10.64%, माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron) 8.70%, एएमडी (AMD) 4.86%, एनवीडिया (Nvidia) 2.95% और टेस्ला (Tesla) 1.04% बढ़कर बंद हुए; जबकि एलन मस्क की स्पेसएक्स (SpaceX) के शेयरों में 3.56% की गिरावट देखी गई।

2. ऐतिहासिक अमेरिका-ईरान शांति समझौता लागू; होर्मुज स्ट्रेट खुला

मिडिल ईस्ट से दुनिया के लिए राहत की सबसे बड़ी खबर आई है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए शुरुआती सीजफायर (युद्धविराम) और अंतरिम समझौते के बाद वॉशिंगटन ने तेहरान पर लगी अपनी कई कड़ी पाबंदियां हटा दी हैं। इसके चलते महीनों के कड़े ब्लॉकेड के बाद अब अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकर एक बार फिर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से सुरक्षित और सामान्य रूप से गुजरने लगे हैं। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने स्पष्ट किया कि यद्यपि वे इस समझौता ज्ञापन (MoU) पर कुछ 'अलग राय' रखते हैं, लेकिन क्षेत्र में जारी युद्ध को पूरी तरह समाप्त करने के लिए उन्होंने इस शांति डील को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।

3. कच्चे तेल की कीमतों में भारी मंदी; ब्रेंट $79 के पास

अमेरिका-ईरान शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग कार्गो के बहाल होने का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। सप्लाई संकट टलने की उम्मीद में क्रूड ऑयल के दामों में इस हफ्ते की सबसे बड़ी गिरावट देखी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 0.84% गिरकर $79.18 प्रति बैरल पर आ गया है, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी 0.67% की कमजोरी के साथ $76.09 प्रति बैरल के स्तर पर फिसल गया है।

4. आईटी सेक्टर के लिए झटका: एक्सेंचर की कमाई ने डराया, स्टॉक 18% टूटा

भारतीय आईटी कंपनियों (जैसे इन्फोसिस, टीसीएस, विप्रो) के शेयरों पर आज एक्सेंचर (Accenture) के नतीजों का सीधा असर देखने को मिल सकता है। एक्सेंचर ने मई में समाप्त हुई अपनी तीसरी तिमाही में $2.39 बिलियन का शुद्ध मुनाफा और $18.7 बिलियन का रेवेन्यू (YoY ग्रोथ) दर्ज किया है।

हालांकि, निवेशकों को सबसे बड़ा झटका कंपनी द्वारा अपने सालाना रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक को घटाने से लगा है। एक्सेंचर ने अब कॉन्स्टेंट करेंसी टर्म्स में सालाना रेवेन्यू ग्रोथ अनुमान को पहले के 3%-5% से घटाकर 3% से 4% कर दिया है। इस कमजोर गाइडेंस के कारण अमेरिकी बाजार में एक्सेंचर का स्टॉक 17.97% तक बुरी तरह क्रैश हो गया, जो भारतीय आईटी काउंटर्स के लिए भी आज सतर्क रहने का संकेत है।

5. अमेरिकी डॉलर इंडेक्स एक साल के उच्चतम स्तर पर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाए गए कड़े और सख्त रुख के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर की ताकत बहुत ज्यादा बढ़ गई है। दुनिया की प्रमुख छह मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.45% बढ़कर 100.80 के स्तर पर पहुंच गया है, जो मई 2025 के बाद का इसका सबसे उच्चतम स्तर (1-Year High) है। इसके चलते यूरो 0.31% और ब्रिटिश स्टर्लिंग 0.62% कमजोर हुए हैं, जबकि जापानी येन टूटकर 161.25 प्रति डॉलर पर आ गया है, जो जुलाई 2024 के बाद का इसका सबसे कमजोर स्तर है।

6. कड़े फेड संकेतों से सोना-चांदी लगातार तीसरे हफ्ते गिरे

मजबूत होते डॉलर इंडेक्स और अमेरिकी फेड रिजर्व की भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने (Rate Hike) की संभावनाओं के चलते सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने और चांदी की कीमतों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में बिकवाली हावी है। स्पॉट गोल्ड (Spot Gold) 0.5% की गिरावट के साथ $4,189.26 प्रति औंस पर आ गया है, जबकि अगस्त डिलीवरी वाला यूएस गोल्ड फ्यूचर्स 0.9% टूटकर $4,207.80 पर ट्रेड कर रहा है। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी (Spot Silver) भी 0.8% फिसलकर $65.32 प्रति औंस के स्तर पर आ गई है।

7. अमेरिकी बेरोजगारी के दावों और जापान की महंगाई के आंकड़े

  • यूएस अनएम्प्लॉयमेंट क्लेम: अमेरिका में पिछले हफ्ते बेरोजगारी भत्तों के लिए आवेदन करने वाले लोगों की संख्या में 4,000 की मामूली कमी आई है और यह सीजनली एडजस्टेड आधार पर 226,000 दर्ज की गई है, जो रॉयटर्स पोल के 225,000 के अनुमान के बेहद करीब है। यह दिखाता है कि अमेरिकी लेबर मार्केट अभी भी काफी मजबूत है।

  • जापान इन्फ्लेशन: जापान की सालाना कोर महंगाई दर (Core CPI) मई महीने में 1.4% दर्ज की गई है। यह लगातार चौथा महीना है जब जापान की महंगाई बैंक ऑफ जापान (BOJ) के 2% के अनिवार्य लक्ष्य से काफी नीचे बनी हुई है, जिससे वहां ब्याज दरों में तत्काल बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम है।

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