ATF Price Hike 1 October 2026: 1 अक्टूबर से महंगाई का झटका, जेट फ्यूल ₹137 प्रति लीटर पर पहुंचा; हवाई सफर हो सकता है महंगा

त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही एविएशन सेक्टर और आम यात्रियों के लिए महंगाई की एक बड़ी खबर सामने आई है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने 1 अक्टूबर 2026 से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) यानी जेट ईंधन की नई दरें लागू कर दी हैं। ताजा संशोधन के तहत विमान ईंधन की कीमतों में जोरदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके बाद घरेलू उड़ानों के लिए एटीएफ का भाव 121.28 रुपये से बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनावों के बीच लगातार दूसरे महीने एटीएफ के दामों में यह उछाल देखने को मिला है। विमान ईंधन के महंगा होने का सीधा और बड़ा असर घरेलू एयरलाइन कंपनियों की वित्तीय सेहत और परिचालन लागत पर पड़ना तय माना जा रहा है।
एयरलाइंस के कुल ऑपरेटिंग खर्च का 40% हिस्सा सिर्फ ईंधन, बढ़ेगा वित्तीय दबाव
भारतीय विमानन उद्योग में एटीएफ केवल एक सामान्य कच्चा माल नहीं है, बल्कि यह किसी भी एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च (Operating Cost) का लगभग 35 से 40 प्रतिशत हिस्सा तय करता है। इंडिगो (IndiGo), एयर इंडिया (Air India), स्पाइसजेट और अकासा एयर जैसी घरेलू विमानन कंपनियों के लिए ईंधन की कीमतों में हुआ यह तेज इजाफा एक बड़ा वित्तीय झटका है। पहले से ही इंजन मेंटनेंस, एयरपोर्ट चार्जेस और डॉलर के मुकाबले रुपये के उतार-चढ़ाव का सामना कर रही एयरलाइंस के पास अब अपने बढ़ते खर्चों को संतुलित करने की गंभीर चुनौती खड़ी हो गई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईंधन खर्च में इतनी बड़ी वृद्धि को एयरलाइंस लंबे समय तक अपने बहीखातों में खुद बर्दाश्त नहीं कर सकेंगी।
क्या त्योहारी सीजन में हवाई सफर होगा महंगा? एयर टिकटों पर फ्यूल सरचार्ज का खतरा
अक्टूबर और नवंबर का महीना भारत में दुर्गा पूजा, दशहरा, दिवाली और छठ पूजा जैसे बड़े त्योहारों का समय होता है। इस दौरान दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे महानगरों से बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड और पूर्वोत्तर राज्यों की ओर जाने वाले यात्रियों की संख्या चरम पर होती है। ऐसे पीक ट्रैवल सीजन में एटीएफ का 137 रुपये प्रति लीटर पहुंचना आम यात्रियों की जेब पर सीधा प्रहार कर सकता है। एयरलाइंस इस बढ़ी हुई ईंधन लागत की भरपाई के लिए टिकटों पर 'फ्यूल सरचार्ज' (Fuel Surcharge) बढ़ा सकती हैं या बेस फेयर में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर सकती हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि आगामी छुट्टियों और शादियों के सीजन में घरेलू उड़ानों के टिकट पहले से कहीं अधिक महंगे हो सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का रुख और एटीएफ की मासिक समीक्षा का नियम
भारत में सरकारी तेल कंपनियां—इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL)—हर महीने की पहली तारीख को अंतरराष्ट्रीय जेट ईंधन बेंचमार्क और विदेशी मुद्रा विनिमय दर (Forex Rate) के आधार पर एटीएफ की कीमतों की समीक्षा करती हैं। पिछले कुछ हफ्तों के दौरान वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल में दर्ज की गई मजबूती और रिफाइनरी मार्जिन में बढ़ोतरी का ही परिणाम है कि घरेलू स्तर पर तेल कंपनियों को जेट ईंधन के दाम बढ़ाने पड़े हैं। हालांकि, घरेलू उपयोग वाले 14.2 किलो एलपीजी और आम पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा गया है, लेकिन कमर्शियल और एविएशन सेगमेंट में अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव पूरी तरह स्थानांतरित किया गया है।
एविएशन इंडस्ट्री की सरकार से मांग: एटीएफ को जीएसटी के दायरे में लाने की पुरानी अपील
एटीएफ की कीमतों में लगातार हो रहे उछाल के बाद एयरलाइन उद्योग की ओर से एक बार फिर विमान ईंधन को वस्तु एवं सेवा कर (GST) के दायरे में लाने की मांग तेज हो गई है। वर्तमान में विभिन्न राज्य सरकारें एटीएफ पर 1 से लेकर 29 प्रतिशत तक का भारी वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) वसूलती हैं, जिससे हर हवाई अड्डे पर ईंधन की लागत काफी बढ़ जाती है। यदि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एटीएफ को जीएसटी के तहत एक समान कर ढांचे में लाती हैं, तो एयरलाइंस को इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का लाभ मिलेगा और ईंधन की कुल लागत काफी घट सकेगी, जिसका अंतिम फायदा सीधे तौर पर टिकट बुक करने वाले हवाई यात्रियों को मिलेगा।