उत्तर प्रदेश

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: दान में गड़बड़ी के आरोपों पर यूपी सरकार का बड़ा एक्शन, जांच के लिए बनाई 3 सदस्यीय SIT

अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे की राशि में कथित गड़बड़ियों और पैसे गायब होने के आरोपों पर उत्तर प्रदेश सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरे मामले की गहराई से पड़ताल करने के लिए 3 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है।

दिलचस्प बात यह है कि इस एसआईटी (SIT) का गठन खुद 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के लिखित अनुरोध पर किया गया है। ट्रस्ट ने सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर इन गंभीर आरोपों की दूध का दूध और पानी का पानी करने वाली निष्पक्ष जांच कराने की मांग की थी, जिसे सरकार ने तुरंत स्वीकार कर लिया।

ट्रस्ट ने क्यों खुद आगे बढ़कर मांगी निष्पक्ष जांच?

राम मंदिर ट्रस्ट का कहना है कि पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में मंदिर को मिले दान को लेकर लगातार बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। जनता और राम भक्तों के बीच इस संबंध में कई तरह की भ्रामक जानकारियां भी फैलाई जा रही हैं। ऐसे में पूरे मामले की सच्चाई देश के सामने लाने, पारदर्शिता को बनाए रखने और सभी तथ्यों को शीशे की तरह साफ करने के लिए एक स्वतंत्र सरकारी जांच बेहद जरूरी थी। ट्रस्ट की इसी मांग का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन किया है, जो हर एक बिंदु की बारिकी से जांच करेगी।

SIT में शामिल हैं ये बड़े अधिकारी, 15 दिनों में देनी होगी फाइनल रिपोर्ट

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस विशेष जांच समिति में उत्तर प्रदेश के तीन बेहद वरिष्ठ और कड़क अधिकारियों को शामिल किया गया है:

  • विजय विश्वास पंत (आयुक्त, लखनऊ मंडल)

  • किरण एस (पुलिस महानिरीक्षक – IG)

  • नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग)

इस हाई-प्रोफाइल समिति को सरकार की ओर से बेहद सख्त निर्देश दिए गए हैं। एसआईटी को अपनी शुरुआती प्राथमिक जांच रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर और पूरे मामले की विस्तृत फाइनल रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सीधे राज्य सरकार को सौंपनी होगी। यह त्वरित फैसला समाजवादी पार्टी (सपा) के नेताओं द्वारा लगाए गए ताबड़तोड़ आरोपों के बाद लिया गया है।

विपक्ष का आरोप: दान पात्रों से गायब हुए 5 से 7.5 करोड़ रुपये!

इस पूरे विवाद की शुरुआत समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक पवन पांडे के एक बयान से हुई थी। उन्होंने सीधा आरोप लगाया था कि राम मंदिर परिसर में रखे गए दान पात्रों (Donation Boxes) से लगभग 5 करोड़ रुपये से लेकर 7.5 करोड़ रुपये के बीच की भारी-भरकम राशि रहस्यमयी तरीके से गायब हुई है। इसके तुरंत बाद सपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस मामले को लपकते हुए पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र और निष्पक्ष सरकारी एजेंसी से जांच कराने की मांग बुलंद कर दी थी। इन राजनीतिक आरोपों के बाद अब एसआईटी इस 'मिसिंग कैश' के दावे की सच्चाई का पता लगाएगी।

आरोपों पर भड़के चंपत राय, बताया कैसे होती है राम मंदिर में नोटों की गिनती

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने विपक्ष के इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज और पूरी तरह से मनगढ़ंत बताया है। ट्रस्ट का साफ कहना है कि रामलला के दरबार में आने वाले एक-एक पैसे का हिसाब पूरी पारदर्शिता के साथ रखा जाता है।

आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने स्पष्ट किया कि मंदिर के खातों का समय-समय पर कड़ा आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) कराया जाता है। इस पूरी वित्तीय ऑडिट प्रक्रिया में केवल ट्रस्ट के प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के वरिष्ठ अधिकारी भी सीधे तौर पर शामिल रहते हैं। यह ऑडिट प्रक्रिया कई दिनों तक चलती है और वर्तमान में भी यह काम सुचारू रूप से जारी है। अब तक के किसी भी ऑडिट में एक रुपये की भी अनियमितता या हेरफेर सामने नहीं आई है।

सीसीटीवी की नजर में बैंक अधिकारी करते हैं गिनती: ट्रस्ट के मुताबिक, राम मंदिर में मिलने वाले नकद दान की गिनती और उसका पूरा हिसाब-किताब करने की एक बेहद सख्त और तय गाइडलाइन है। जब भी दान पात्र खोले जाते हैं, तो बैंक अधिकारियों और ट्रस्ट के सदस्यों की सीधी मौजूदगी होती है। सबसे बड़ी बात यह है कि नोटों की गिनती की यह पूरी प्रक्रिया हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की 24 घंटे लाइव निगरानी में की जाती है। ऐसे में वहां से एक भी नोट का गायब होना नामुमकिन है। बहरहाल, अब जांच का जिम्मा एसआईटी के पास है और उम्मीद है कि तय समय सीमा में सच सबके सामने आ जाएगा।

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