Lok Sabha Delimitation: क्या दक्षिण भारत की राजनीतिक ताकत होगी कम? अमित शाह ने संसद में आंकड़ों के साथ दूर किया सारा कन्फ्यूजन

भारत में आगामी परिसीमन (Delimitation) को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों के मन में बैठी आशंकाओं पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में पूर्ण विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में भरोसा दिलाया कि नई व्यवस्था के तहत दक्षिण भारत के किसी भी राज्य की राजनीतिक शक्ति कम नहीं होगी, बल्कि संसद में वहां के प्रतिनिधियों की संख्या में ऐतिहासिक इजाफा होगा। शाह ने खुलासा किया कि भविष्य में लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का विचार है।दक्षिण भारत के 5 राज्यों का संभावित नया गणितगृह मंत्री द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, नए परिसीमन के बाद दक्षिण के पांच प्रमुख राज्यों में लोकसभा सीटों की संख्या लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। राज्यवार संभावित बदलाव कुछ इस प्रकार होंगे:तमिलनाडु: 39 सीटों से बढ़कर 59 सीटें।केरल: 20 सीटों से बढ़कर 30 सीटें।कर्नाटक: 28 सीटों से बढ़कर 42 सीटें।आंध्र प्रदेश: 25 सीटों से बढ़कर 38 सीटें।तेलंगाना: 17 सीटों से बढ़कर 26 सीटें।बरकरार रहेगा दक्षिण का वर्चस्व: अनुपात का खेलविपक्ष और कई क्षेत्रीय दलों की चिंता यह थी कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने के कारण उत्तर भारत की तुलना में दक्षिण का प्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। इस पर गृह मंत्री ने आंकड़ों के जरिए समझाया कि दक्षिण के इन पांच राज्यों में कुल सीटें 129 से बढ़कर 195 हो जाएंगी। वर्तमान में लोकसभा में दक्षिण भारत की भागीदारी 23.76% है, जो सीटों की संख्या बढ़ने के बाद भी करीब 24% पर स्थिर रहेगी। इससे स्पष्ट है कि सीटों के बंटवारे का अनुपात संतुलित रखा जाएगा।कब लागू होगी नई व्यवस्था और क्या है प्रक्रिया?अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि यह बदलाव रातों-रात लागू नहीं होने वाला है। उन्होंने बताया कि:2029 से पहले संभव नहीं: परिसीमन की प्रक्रिया 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद या जनगणना की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे बढ़ेगी।संवैधानिक प्रक्रिया: परिसीमन आयोग की रिपोर्ट आने, संसद में चर्चा होने और राष्ट्रपति की मुहर लगने के बाद ही नया चुनावी नक्शा तैयार होगा।वर्तमान स्थिति: तब तक देश के सभी चुनाव मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही संपन्न कराए जाएंगे।तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन सहित अन्य नेताओं की चिंताओं पर सरकार ने यह संदेश दिया है कि जनसंख्या नियंत्रण जैसे अच्छे कार्यों के लिए किसी भी राज्य को राजनीतिक नुकसान नहीं होने दिया जाएगा।