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Byju’s Latest News 2026: फाउंडर रवींद्रन के खिलाफ केस वापस लेंगे लेंडर्स, बदले में ‘आकाश’ में मांगी 30% की हिस्सेदारी

भारत की दिग्गज एडटेक कंपनी बायजू (Byju's) के डूबते साम्राज्य और कानूनी विवादों के बीच एक बहुत बड़ी राहत और समझौते की खबर सामने आ रही है। संकट में घिरे बायजू के ग्लोबल लेंडर्स (कर्ज देने वाले) कंपनी के फाउंडर बायजू रवींद्रन के खिलाफ जारी सभी कड़े कानूनी मुकदमों को वापस लेने के लिए तैयार हो गए हैं। लेकिन, इस भारी-भरकम राहत के बदले में लेंडर्स ने एक बड़ी शर्त सामने रखी है। वे बायजू की हिस्सेदारी वाले मशहूर ऑफलाइन कोचिंग संस्थान 'आकाश एजुकेशनल सर्विसेज' (Aakash Educational Services) में लगभग 30 प्रतिशत की हिस्सेदारी (Equity Stake) मांग रहे हैं।

रॉयटर्स (Reuters) की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, इस सेटलमेंट प्रस्ताव पर सभी पक्षों के बीच बेहद गोपनीय और गंभीर बातचीत चल रही है। सूत्रों का दावा है कि Byju's के लेंडर्स इस समय विवाद को हमेशा के लिए सुलझाने के अंतिम चरण (Final Stage) में हैं और इस बात की प्रबल संभावना है कि वे जल्द ही आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में करीब 30 फीसदी का मालिकाना हक हासिल कर लेंगे।

एक साथ वापस होंगे भारत, अमेरिका और सिंगापुर के सभी कानूनी मुकदमे

इस संभावित मेगा सेटलमेंट या समझौते के तहत सबसे बड़ी राहत यह होगी कि दोनों तरफ के सभी पक्ष एक साथ मिलकर दुनिया भर की अदालतों में लंबित पड़े सभी मामले और एफआईआर (FIR) वापस ले लेंगे। आपको याद दिला दें कि Byju's ने साल 2021 में एडटेक इंडस्ट्री की सबसे बड़ी डील्स में से एक के तहत लगभग 1 अरब डॉलर (करीब ₹8,000 करोड़) की भारी-भरकम राशि देकर आकाश एजुकेशनल सर्विसेज को खरीदा था।

हालांकि, पिछले दो वर्षों में आए गंभीर वित्तीय संकट के कारण आकाश में Byju's की हिस्सेदारी लगातार गिरती चली गई। मौजूदा समय में Byju's इसमें महज एक माइनॉरिटी स्टेकहोल्डर (अल्पसंख्यक शेयरधारक) बनकर रह गया है। इस समय आकाश एजुकेशनल सर्विसेज में मणिपाल हेल्थ (Manipal Health) सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन चुका है।

2 अरब डॉलर की वैल्यू वाली 'आकाश' के बिजनेस पर एक नजर

आकाश एजुकेशनल सर्विसेज आज भी देश में ऑफलाइन टेस्ट प्रिपरेटरी सेक्टर का एक बहुत बड़ा और प्रतिष्ठित नाम है। इसके बिजनेस प्रोफाइल की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • देशव्यापी नेटवर्क: आकाश इस समय पूरे भारत में 300 से भी ज्यादा अत्याधुनिक कोचिंग सेंटर्स का संचालन करती है।

  • मुख्य फोकस: यह संस्थान देश की सबसे कठिन मेडिकल (NEET) और इंजीनियरिंग (JEE) प्रवेश परीक्षाओं के साथ-साथ ओलंपियाड और स्कूल बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कराता है।

  • फैकल्टी और रेवेन्यू: आकाश के पास 5,000 से ज्यादा अनुभवी और विशेषज्ञ शिक्षकों की एक विशाल फौज है। कंपनी की पिछली वित्तीय रिपोर्ट के अनुसार, इसका सालाना रेवेन्यू (राजस्व) लगभग 25.4 करोड़ डॉलर दर्ज किया गया था।

रॉयटर्स के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि इस समय चल रही त्रिपक्षीय सेटलमेंट वार्ता की मेज पर खुद बायजू रवींद्रन, अमेरिकी लेंडर्स का प्रतिनिधित्व करने वाला ग्लास ट्रस्ट, आकाश एजुकेशनल सर्विसेज और मणिपाल हेल्थ के शीर्ष अधिकारी आमने-सामने बैठे हैं। बाजार के जानकारों के मुताबिक, वर्तमान में आकाश की कुल मार्केट वैल्यूएशन लगभग 2 अरब डॉलर (करीब ₹16,500 करोड़) आंकी गई है।

Byju's: अर्श से फर्श तक आने की पूरी इनसाइड स्टोरी

एक दौर था जब Byju's देश का सबसे मूल्यवान स्टार्टअप (Valued at $22 Billion) था और दुनिया के 21 से ज्यादा देशों में इसका कारोबार फैला हुआ था। खासकर COVID-19 महामारी के दौरान जब स्कूल-कॉलेज पूरी तरह बंद थे, तब कंपनी के ऑनलाइन वीडियो कोर्सेज और कस्टमाइज्ड लर्निंग ऐप्स को देश के हर घर में पसंद किया गया। इसी लोकप्रियता के दम पर कंपनी ने वैश्विक स्तर पर कई बड़ी कंपनियों का अधिग्रहण (Acquisition) भी किया।

लेकिन साल 2023 की शुरुआत होते ही हालात ने ऐसी करवट ली कि एडटेक की यह रानी ताश के पत्तों की तरह ढहने लगी। विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिका स्थित बड़े लेंडर्स के साथ कंपनी का कर्ज अदायगी को लेकर टकराव शुरू हुआ। अमेरिकी कंसोर्टियम ग्लास ट्रस्ट ने बायजू रवींद्रन पर कंपनी के फंड के कुप्रबंधन और हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद साल 2024 में जब Byju's को भारत में नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के सामने दिवालियापन (Insolvency) के लिए आवेदन करना पड़ा, तो ग्लास ट्रस्ट ने सीधे तौर पर 1 अरब डॉलर के बकाया कर्ज की तत्काल मांग ठोक दी।

हालांकि, बायजू रवींद्रन और उनकी कोर टीम ने हमेशा इन आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए किसी भी तरह की वित्तीय गड़बड़ी से साफ इनकार किया है। लेकिन इस अंतहीन कानूनी लड़ाई और निगेटिव पब्लिसिटी के चलते निवेशकों ने अपने हाथ खींच लिए और साल 2024 के अंत में खुद रवींद्रन ने एक भावुक बयान में स्वीकार किया कि वर्तमान में उनकी मूल कंपनी की वैल्यूएशन घटकर शून्य (Zero) हो चुकी है। अब देखना यह होगा कि 4 सितंबर को होने वाली अगली अदालती सुनवाइयों और इस 30% आकाश शेयर डील के बाद क्या भारतीय एडटेक का यह सबसे बड़ा चेहरा एक बार फिर बाजार में वापसी कर पाता है या नहीं।

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