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China Panic Solar Boom India: भारत के 17 गुना सोलर बूम से चीन में मची खलबली, बीजिंग के चिंता बढ़ाने वाले वायरल पोस्ट ने वैश्विक सौर बाजार में मचाई हलचल

नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) के क्षेत्र में भारत द्वारा हासिल की जा रही ऐतिहासिक सफलता ने अब वैश्विक स्तर पर हलचल तेज कर दी है। विशेष रूप से चीन, जिसका अब तक दुनिया के सौर ऊर्जा बाजार और सप्लाई चेन पर एकछत्र राज रहा है, भारत की तेजी से बढ़ती सौर क्षमता से असहज नजर आ रहा है। पिछले एक दशक में भारत की सौर ऊर्जा क्षमता में दर्ज की गई 17 गुना (17x Solar Expansion) की रिकॉर्ड बढ़ोतरी ने चीनी विश्लेषकों और नीति निर्धारकों के बीच नई बहस छेड़ दी है। चीन के प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और थिंक-टैंक मंचों पर हाल ही में वायरल हुए एक ट्रेंडिंग पोस्ट ने इस चिंता को खुलकर उजागर किया है, जिसमें दावा किया गया है कि भारत जिस रफ्तार से अपनी सौर विनिर्माण क्षमता बढ़ा रहा है, उससे चीनी सोलर कंपनियों का वैश्विक प्रभुत्व खतरे में पड़ सकता है।

वायरल पोस्ट में क्या है? चीन के थिंक-टैंक क्यों हैं परेशान?

चीनी सोशल मीडिया और वैश्विक आर्थिक मंचों पर तेजी से शेयर किए जा रहे इस वायरल पोस्ट में भारत के ऊर्जा क्षेत्र में आए क्रांतिकारी बदलावों का बारीक विश्लेषण किया गया है। पोस्ट में लिखा गया है कि भारत ने न केवल अपनी सौर बिजली उत्पादन क्षमता को 2014 के कुछ गीगावाट के स्तर से बढ़ाकर आज 100 गीगावाट (GW) के पार पहुंचा दिया है, बल्कि वह सौर घटकों—जैसे सोलर पैनल, वेफर्स और सेल्स—के आयात के लिए चीन पर अपनी निर्भरता को बेहद तेजी से खत्म कर रहा है।

चीनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अपनी वर्तमान सौर विकास दर को बनाए रखता है, तो वह वर्ष 2030 तक अपनी 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन (Non-Fossil Fuel) क्षमता के राष्ट्रीय लक्ष्य को समय से पहले ही हासिल कर लेगा। सबसे बड़ी चिंता की बात चीन के लिए यह है कि भारत अब केवल एक बड़ा 'उपभोक्ता' या खरीदार नहीं रह गया है, बल्कि भारत की मेक इन इंडिया नीतियां उसे सौर उपकरणों के एक बड़े वैश्विक निर्यातक (Exporter) के रूप में उभार रही हैं, जो सीधे तौर पर चीनी कंपनियों के वैश्विक बाजार हिस्सेदारी में सेंध लगा रहा है।

PLI योजना और पीएम सूर्य घर योजना ने बदली भारत की तस्वीर

भारत की इस अभूतपूर्व सौर सफलता के पीछे केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियां और प्रोत्साहन योजनाएं मुख्य आधार बनी हैं:

  • उत्पादन से जुड़ा प्रोत्साहन (PLI Scheme): भारत सरकार की सौर विनिर्माण के लिए शुरू की गई ₹24,000 करोड़ से अधिक की पीएलआई योजना ने घरेलू कंपनियों (जैसे टाटा पावर, अदाणी सोलर, रिलायंस न्यू एनर्जी) को बड़े पैमाने पर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने के लिए प्रेरित किया है।

  • पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: देश भर के 1 करोड़ घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की इस महत्वाकांक्षी योजना ने घरेलू स्तर पर सोलर पैनलों की मांग में ऐतिहासिक उछाल ला दिया है।

  • चीन से आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD): भारत द्वारा चीनी सोलर मॉड्यूल्स पर 40% और सेल्स पर 25% तक बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाने से स्थानीय निर्माताओं को जबरदस्त मजबूती मिली है और चीनी कंपनियों का भारतीय बाजार में एकाधिकार समाप्त हो गया है।

वैश्विक सौर बाजार पर इसका क्या पड़ेगा असर?

अब तक दुनिया भर में बनने वाले लगभग 80 प्रतिशत से अधिक सोलर पैनल और सिलिकॉन वेफर्स का निर्माण अकेले चीन में होता आया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU) और कई विकसित देश पहले से ही अपनी आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को चीन से अलग (De-risking) करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारत का 17 गुना सोलर बूम दुनिया के लिए एक विश्वसनीय और किफायती विकल्प प्रस्तुत करता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) और वैश्विक ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि भारत की यह हरित ऊर्जा क्रांति (Green Energy Revolution) न केवल देश को ऊर्जा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाएगी, बल्कि आने वाले वर्षों में दक्षिण एशिया, अफ्रीका और मध्य-पूर्व के देशों में चीनी सौर दबदबे को सीधे तौर पर बेअसर करने की क्षमता रखती है। यही वजह है कि बीजिंग में भारत के इस 'सोलर बूम' को लेकर सरगर्मियां और चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।

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