धर्म

Ekadashi 2026 : नहीं रख सकते एकादशी का कठिन व्रत? तो बस अपना लें ये 5 नियम, मिलेगा उपवास के समान ही पुण्य

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को सभी व्रतों में सर्वश्रेष्ठ और मोक्ष प्रदायक माना गया है। भगवान विष्णु को समर्पित यह तिथि माह में दो बार आती है। हालांकि, स्वास्थ्य कारणों, आयु या व्यस्तता के चलते हर किसी के लिए निर्जला या फलाहारी व्रत रखना संभव नहीं हो पाता। शास्त्रों में ऐसे लोगों के लिए भी विशेष मार्ग बताए गए हैं। यदि आप पूर्ण व्रत नहीं कर सकते, तो भी कुछ नियमों का पालन कर आप श्रीहरि की वैसी ही कृपा प्राप्त कर सकते हैं जैसा एक व्रत रखने वाले को मिलती है।भोजन में चावल का त्याग है सबसे अहमएकादशी के दिन सबसे महत्वपूर्ण नियम चावल का त्याग करना है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन चावल का सेवन करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख है कि एकादशी पर चावल खाना अशुद्धता का प्रतीक है। जो लोग व्रत नहीं रख रहे हैं, उन्हें भी इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए और चावल से पूरी तरह परहेज करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि केवल चावल छोड़ने मात्र से ही आप एकादशी के अनुशासन का हिस्सा बन जाते हैं।तामसिक भोजन और व्यसनों से रहें दूरएकादशी की तिथि पर मन और शरीर की शुद्धता अनिवार्य है। यदि आप उपवास नहीं कर रहे हैं, तब भी इस दिन प्याज, लहसुन, मांस और मदिरा जैसे तामसिक पदार्थों का सेवन बिल्कुल न करें। इसके अलावा, किसी भी प्रकार के नशे या व्यसन से दूर रहना चाहिए। सात्विक आहार लेने से मन शांत रहता है और भगवान विष्णु की भक्ति में एकाग्रता बनी रहती है। इस दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना भी उत्तम माना गया है।पवित्रता और व्यवहार पर नियंत्रणव्रत का फल केवल भूखा रहने से नहीं, बल्कि अच्छे आचरण से मिलता है। एकादशी के दिन क्रोध करने, झूठ बोलने या किसी की निंदा करने से बचना चाहिए। इस दिन वाणी पर संयम रखें और कम से कम बोलें। यदि आप व्रत नहीं हैं, तो भी सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण कर भगवान विष्णु के समक्ष दीपक जलाएं। परोपकार और मीठी वाणी का प्रयोग इस दिन के पुण्य को कई गुना बढ़ा देता है।विष्णु सहस्रनाम और मंत्रों का जापभक्ति मार्ग में मानसिक पूजा का बड़ा महत्व है। जो लोग शारीरिक रूप से व्रत रखने में असमर्थ हैं, उन्हें एकादशी के दिन भगवान विष्णु के मंत्रों जैसे ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का यथाशक्ति जाप करना चाहिए। शाम के समय तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जलाएं और परिक्रमा करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना या एकादशी की कथा सुनना भी व्रत के समान ही फलदायी माना जाता है।दान-पुण्य का विशेष महत्वशास्त्रों के अनुसार, दान कभी निष्फल नहीं जाता। एकादशी पर भूखों को भोजन कराना, जल का दान करना या ब्राह्मणों को तिल और वस्त्र दान करना अत्यंत शुभ होता है। यदि आप व्रत नहीं रख रहे हैं, तो किसी जरूरतमंद की मदद कर आप इस तिथि की शुभता का लाभ उठा सकते हैं। निस्वार्थ भाव से किया गया दान भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है और इससे जीवन के कष्टों का निवारण होता है।

Back to top button