CLAT 2027 Accessibility Update: दिव्यांग उम्मीदवारों को CLAT में मिलेगी स्क्रीन रीडर की सुविधा! NLU कंसोर्टियम ने सुप्रीम कोर्ट में दिया भरोसा

देश के प्रतिष्ठित नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLUs) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाले कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और समावेशी फैसला सामने आया है। कंसोर्टियम ऑफ नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज (NLU Consortium) ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वस्त किया है कि वह क्लैट परीक्षा के दौरान दिव्यांग (PwD) और विशेष रूप से दृष्टिबाधित (Visually Impaired) उम्मीदवारों को स्क्रीन-रीडर (Screen-Reader Software) जैसी सहायक तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान कंसोर्टियम की ओर से यह भरोसा दिया गया, जिससे देश भर के दिव्यांग लॉ एस्पिरेंट्स के लिए समान अवसर का रास्ता साफ हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुई सुनवाई और याचिका में क्या थी मांग?
यह मामला दिव्यांग अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं में समान और सुलभ वातावरण (Accessible Environment) प्रदान करने से जुड़ा हुआ है। याचिका में कोर्ट से मांग की गई थी कि क्लैट का आवेदन पत्र (Application Form) भरते समय ही ऐसा मैकेनिज्म या विकल्प बनाया जाए, जिससे उम्मीदवार यह स्पष्ट कर सकें कि वे परीक्षा देने के लिए किस तरह की सहायक तकनीक (जैसे स्क्रीन रीडर, मैग्निफायर आदि) या स्क्राइब (Scribe/Reader) का उपयोग करना चाहते हैं। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान एनएलयू कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया कि दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 (RPwD Act, 2016) के तहत सभी पात्र उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र पर स्क्रीन रीडर और अन्य तकनीकी सहायता बिना किसी बाधा के दी जाएगी।
स्वतंत्र रूप से परीक्षा दे सकेंगे दृष्टिबाधित छात्र
कंसोर्टियम द्वारा दिए गए इस आश्वासन के बाद अब दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को केवल स्क्राइब (दूसरे व्यक्ति की मदद से उत्तर लिखवाने) पर ही निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जो अभ्यर्थी खुद तकनीक की मदद से पेपर हल करना चाहते हैं, वे स्क्रीन-रीडर सॉफ्टवेयर (जैसे JAWS या NVDA) का इस्तेमाल करके कंप्यूटर स्क्रीन पर प्रश्न सुन सकेंगे और अपने उत्तर खुद दर्ज कर सकेंगे। इससे न केवल उम्मीदवारों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, बल्कि स्क्राइब द्वारा प्रश्न गलत पढ़ने या उत्तर दर्ज करने में होने वाली मानवीय त्रुटियों की संभावना भी खत्म होगी।
दिव्यांग (PwD) अभ्यर्थियों के लिए ये सुविधाएं भी रहेंगी उपलब्ध
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और दिव्यांग अधिकार अधिनियम के तहत क्लैट परीक्षा में अभ्यर्थियों को निम्नलिखित रियायतें और सुविधाएं दी जाती हैं:
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अतिरिक्त समय (Compensatory Time): परीक्षा में प्रति घंटे 20 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है (यानी 2 घंटे की परीक्षा में कुल 40 मिनट का अतिरिक्त समय)।
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स्क्राइब/रीडर की सुविधा: उम्मीदवार चाहें तो कंसोर्टियम द्वारा तैयार पैनल से स्क्राइब ले सकते हैं या फिर तय नियमों के तहत अपना स्क्राइब भी ला सकते हैं।
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तकनीकी उपकरण: स्क्रीन-रीडर, मैग्निफिकेशन टूल्स (Magnifiers) और विशेष कस्टमाइज्ड माउस/कीबोर्ड के इस्तेमाल की अनुमति।
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बाधा-मुक्त परीक्षा केंद्र (Barrier-Free Centres): व्हीलचेयर रैंप, लिफ्ट और ग्राउंड फ्लोर पर सीटिंग अरेंजमेंट वाले परीक्षा केंद्रों का आवंटन।
आगामी CLAT परीक्षाओं पर पड़ेगा सकारात्मक असर
कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में मिले इस भरोसे से विजुअली इम्पेयर्ड और बेंचमार्क दिव्यांगता वाले छात्रों के लिए उच्च कानूनी शिक्षा का दरवाजा और अधिक मजबूती से खुलेगा। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवाओं (Judicial Services) और बार काउंसिल की परीक्षाओं में भी दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को शामिल करने पर जोर दिया है। क्लैट परीक्षा में स्क्रीन रीडर की यह व्यवस्था कानून की पढ़ाई के क्षेत्र में समावेशिता (Inclusivity) और समानता के अधिकार को धरातल पर उतारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित होगी।