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CM भगवंत मान ने दिए सख्त कार्रवाई के आदेश, 15 घंटे बाद खुला NH-44, मिड-टर्म परीक्षाएं स्थगित

पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) के विशालकाय परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन ने मोबाइल इंटरनेट और डेटा सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है। कैंपस के भीतर एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की अपुष्ट खबरों के सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद हजारों की संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए थे, जिसके चलते देखते ही देखते समूचा क्षेत्र भीषण अशांति और टकराव का अखाड़ा बन गया। हालात को और अधिक बिगड़ने से रोकने और भ्रामक संदेशों के प्रसार पर तत्काल अंकुश लगाने के उद्देश्य से गृह विभाग ने इंटरनेट शटडाउन का यह आपातकालीन कदम उठाया है।

प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिक जांच में दुष्कर्म के इन सनसनीखेज आरोपों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही किसी पीड़िता या उसके परिजनों की ओर से कोई लिखित शिकायत सामने आई है। इसके बावजूद इंटरनेट मीडिया के विभिन्न मंचों पर असामाजिक तत्वों द्वारा फैलाई गई मनगढ़ंत सूचनाओं ने हजारों छात्र-छात्राओं की भीड़ को हिंसक रूप से उद्वेलित कर दिया। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को लामबंद करने और कानून हाथ में लेने की गतिविधियों को विफल करने के लिए ही इंटरनेट ब्लैकआउट का फैसला लिया गया है ताकि अफवाहों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने दिए कठोर कार्रवाई के निर्देश, डीजीपी गौरव यादव ने संभाली कमान

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने फगवाड़ा की इस अप्रत्याशित और गंभीर घटना का त्वरित संज्ञान लेते हुए राज्य पुलिस बल को उपद्रवियों, अफवाह फैलाने वालों और शांति भंग करने वाले तत्वों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने का स्पष्ट निर्देश जारी किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राज्य में किसी को भी कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। मुख्यमंत्री ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) गौरव यादव को स्वयं जमीनी स्तर पर मौके पर पहुंचकर स्थिति की सूक्ष्म समीक्षा करने और जांच प्रक्रिया की सीधी निगरानी करने का आदेश दिया।

मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद फगवाड़ा और आसपास के क्षेत्रों को भारी सुरक्षा घेरे में तब्दील कर दिया गया है। पंजाब पुलिस के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) फैयाज फारूकी के अनुसार, कैंपस और हाईवे की सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए 2,000 से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों और अर्धसैनिक बलों के जवानों को संवेदनशील मोर्चों पर तैनात किया गया है। रात भर पुलिस अधिकारियों ने फ्लैग मार्च निकालकर असामाजिक तत्वों को कड़ा संदेश दिया। सोमवार सुबह भी पूरे विश्वविद्यालय परिसर और फगवाड़ा के मुख्य चौराहों पर भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा, जिससे तनावपूर्ण माहौल धीरे-धीरे शांति और सामान्य स्थिति की ओर लौटता नजर आया।

15 घंटे की नाकेबंदी के बाद बहाल हुआ नेशनल हाईवे-44, जालंधर पुलिस कमिश्नर ने संभाले हालात

छात्र आंदोलन के हिंसक रूप अख्तियार करते ही सबसे गंभीर संकट उत्तर भारत की जीवनरेखा कहे जाने वाले दिल्ली-अमृतसर नेशनल हाईवे (NH-44) पर उत्पन्न हुआ था। उग्र छात्रों और प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वारों से बाहर निकलकर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कब्जा कर लिया था और आवागमन को पूरी तरह ठप कर दिया था। यह भारी नाकेबंदी लगातार 15 घंटे से अधिक समय तक जारी रही, जिसके परिणामस्वरूप सड़क के दोनों ओर ट्रकों, बसों और निजी वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं और हजारों मुसाफिरों, मरीजों और आम नागरिकों को भीषण मानसिक व शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ा।

स्थिति की विकरालता को देखते हुए जालंधर के पुलिस कमिश्नर सतिंदर सिंह और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ लगातार बातचीत की और उन्हें समझा-बुझाकर पीछे हटने पर राजी किया। रविवार और सोमवार की दरमियानी रात को पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद हाईवे से अवरोधों को हटाया और दोनों तरफ का यातायात सुचारू रूप से बहाल कराया। पुलिस कमिश्नर ने आधिकारिक पुष्टि की कि राजमार्ग पर अब यातायात पूरी तरह सामान्य है और स्थिति पूरी तरह शांतिपूर्ण व नियंत्रण में है, हालांकि एहतियात के तौर पर हाईवे के किनारे और यूनिवर्सिटी के आसपास सशस्त्र पुलिस बल की गश्त लगातार जारी रखी गई है।

एलपीयू ने 10 दिनों के लिए कक्षाएं और परीक्षाएं टालीं, हॉस्टल छोड़कर घरों की ओर लौटे छात्र

कैंपस में उपजे भारी तनाव, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के मद्देनजर लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अपने पूरे शैक्षणिक कैलेंडर में बड़ा बदलाव किया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आधिकारिक परिपत्र जारी करते हुए सोमवार से अगले 10 दिनों के लिए सभी नियमित ऑफलाइन कक्षाओं को तत्काल प्रभाव से स्थगित कर दिया है। इसके साथ ही वर्तमान में आयोजित की जा रही मिड-टर्म परीक्षाओं (Mid-Term Exams) को भी आगामी आदेश तक टाल दिया गया है। विश्वविद्यालय ने बताया कि स्थगित की गई सभी परीक्षाओं की संशोधित तिथियां और नया परीक्षा कार्यक्रम बाद में अलग से घोषित किया जाएगा।

यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने इस संवेदनशील अवधि के दौरान उन छात्र-छात्राओं को अपने पैतृक घर जाने की छूट दे दी है जो अपने परिजनों के पास लौटना चाहते हैं, बशर्ते वे अपने माता-पिता या अभिभावकों की औपचारिक सहमति प्राप्त कर लें। इस आदेश के जारी होते ही सोमवार सुबह बड़ी संख्या में देशी और विदेशी छात्र अपने सूटकेस समेटकर रेलवे स्टेशनों और बस अड्डों की ओर रवाना होते दिखाई दिए। वहीं दूसरी ओर, जो छात्र हॉस्टल में ही ठहरना चाहते हैं, उन्हें सख्त हिदायत दी गई है कि वे अपने कमरों में ही रहें और किसी भी तरह की अनधिकृत भीड़, विरोध प्रदर्शन या गैर-जरूरी गतिविधियों में शामिल होने से पूरी तरह दूर रहें।

खिड़कियों के शीशे तोड़े, गमले फोड़े और लगाई आग: जानिए कैसे शुरू हुआ था प्रदर्शन का बवंडर

इस समूचे उपद्रव की शुरुआत रविवार सुबह तब हुई जब सोशल मीडिया के अलग-अलग ग्रुप्स में यह दावा किया जाने लगा कि किसी बाहरी अज्ञात व्यक्ति ने कैंपस की चारदीवारी के अंदर घुसकर एक छात्रा के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न को अंजाम दिया है। इस खबर के सामने आते ही सुरक्षा व्यवस्था और जवाबदेही को लेकर छात्रों का गुस्सा भड़क उठा और सैकड़ों की तादाद में छात्र प्रशासनिक ब्लॉक के समक्ष एकत्रित होकर प्रबंधन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग करने लगे।

लेकिन देखते ही देखते कुछ असामाजिक और शरारती तत्वों की मौजूदगी के कारण यह शांतिपूर्ण विरोध उग्र तोड़फोड़ में बदल गया। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो फुटेज में देखा गया कि कुछ उपद्रवी चेहरे इमारतों की खिड़कियों के शीशे तोड़ रहे थे, कंक्रीट के गमलों को नुकसान पहुंचा रहे थे और सड़क पर रखी वस्तुओं में आग लगा रहे थे। कुछ वाहनों को भी आग के हवाले करने का प्रयास किया गया। पुलिस ने अब इन सभी वायरल वीडियो और कैंपस के सीसीटीवी फुटेज को जब्त कर लिया है ताकि हिंसा भड़काने और आगजनी करने वाले वास्तविक उपद्रवियों की तकनीकी शिनाख्त कर उनके खिलाफ गैर-जमानती धाराओं में सख्त कार्रवाई की जा सके।

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