ईरान युद्ध की आग के बीच दिखी भारत-रूस की सुपर-जुगलबंदी, संकट में बना डाला तेल खरीद का ऐसा रिकॉर्ड,

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच भड़की युद्ध की आग ने ग्लोबल सप्लाई चेन को झुलसा कर रख दिया है। दुनिया के सबसे अहम और व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्ते ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के अवरुद्ध होने से कई देशों में भयानक तेल और गैस संकट पैदा हो गया है। भारत भी इस अचानक आई एलपीजी किल्लत से अछूता नहीं है। लेकिन इस विकट संकट की घड़ी में भारत ने अपने सबसे पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस के साथ मिलकर एक ऐसी जुगलबंदी दिखाई है, जिसने सबको चौंका दिया है। भारत ने देश को किसी भी बड़े ऊर्जा संकट से बचाने के लिए एक मास्टरस्ट्रोक चलते हुए रूस से तेल खरीद में नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना डाला है।मार्च में 90% का बंपर उछाल, रूस ने निभाया दोस्ती का फर्ज आंकड़े इस बात की गवाही दे रहे हैं कि मुश्किल वक्त में रूस ने भारत का भरपूर साथ दिया है। मार्च 2026 की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अपनी विशाल तेल जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए पूरी ताकत से रूस का रुख किया है। फरवरी के मुकाबले सिर्फ एक महीने के भीतर रूसी कच्चे तेल के आयात में 90% की आश्चर्यजनक बढ़ोतरी दर्ज की गई है। यह बंपर उछाल ठीक उस वक्त आया है, जब होर्मुज संकट के चलते मध्य पूर्व से भारत का कुल तेल आयात करीब 15% तक लुढ़क गया है। दिसंबर से फरवरी के बीच रूस से तेल खरीद में सुस्ती जरूर आई थी, लेकिन मार्च में अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की विशेष छूट का भारत ने दोनों हाथों से फायदा उठाया और समुद्र में पहले से मौजूद रूसी तेल की जमकर खरीदारी की।होर्मुज की नाकेबंदी ने तोड़ी थी LPG-LNG की कमर आपको बता दें कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक प्रमुख केंद्र और जीवन रेखा है। इस समुद्री रास्ते की नाकेबंदी ने भारत की रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) सप्लाई चैन की कमर तोड़कर रख दी थी। हालात ऐसे हो गए थे कि मार्च में भारत के एलपीजी आयात में 40% की भारी गिरावट आई, क्योंकि भारत अपनी जरूरत की 90% एलपीजी इसी रूट से मंगाता है। कतर से होने वाली एलएनजी सप्लाई में तो 92% की ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। ऐसे में देश के 33 करोड़ से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं के चूल्हे बिना किसी रुकावट के जलते रहें, इसके लिए सरकार ने कमर्शियल और औद्योगिक गैस सप्लाई को तुरंत सीमित कर दिया और घरेलू उत्पादन को रफ्तार दी।भारत का ‘प्लान बी’ एक्टिव: पाइपलाइन और नए देशों से करार भारत सिर्फ होर्मुज जलमार्ग के भरोसे नहीं बैठा है, बल्कि उसने तेजी से अपना ‘प्लान बी’ एक्टिव कर दिया है। अब भारत अपनी ईंधन जरूरतों को पूरा करने के लिए नए देशों और सुरक्षित मार्गों की तलाश कर रहा है। अंगोला, गैबॉन, घाना और कांगो जैसे देशों से तेल आयात में तेजी लाई गई है। इसके अलावा, सऊदी अरब की ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ और यूएई की ‘हबशान-फुजैराह पाइपलाइन’ भारत के लिए बड़ी राहत साबित हो रही हैं। ये पाइपलाइनें होर्मुज जलमार्ग को बायपास करते हुए सीधे सुरक्षित बंदरगाहों तक तेल पहुंचा रही हैं।कतर की कमी पूरी करने के लिए अमेरिका और ओमान से एलएनजी आयात बढ़ाया गया है। मार्केट एनालिटिक्स के अनुसार, अप्रैल महीने में भी रूस से यह बंपर तेल खरीदारी जारी रहने की पूरी उम्मीद है। साथ ही, वेनेजुएला से भी जल्द ही कच्चे तेल की खेप भारत पहुंचने वाली है, जो मौजूदा कूटनीतिक वार्ताओं और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भारत के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।