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Delhi To Kolkata In 17 Hours: एक्सप्रेसवे के ‘महाजाल’ से 5 राज्यों का सफर होगा सुपरफास्ट, दिल्ली से कोलकाता का समय घटकर आधा

देश की राजधानी दिल्ली को पूर्वी भारत की आर्थिक राजधानी कोलकाता से सीधे और निर्बाध रूप से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक्सप्रेसवे का एक अभूतपूर्व ‘महाजाल’ तैयार किया है। ऐतिहासिक शेरशाह सूरी मार्ग यानी ग्रैंड ट्रंक (GT) रोड और पुराने नेशनल हाईवे-19 पर चलने वाले मुसाफिरों को जहां पहले दिल्ली से कोलकाता का 1400 से अधिक किलोमीटर का लंबा सफर तय करने में 28 से 32 घंटे का भारी-भरकम समय लग जाता था, वहीं अब नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे नेटवर्क के जरिए यह दूरी सिमटकर महज 16 से 17 घंटे की रह जाएगी। भारतमाला परियोजना और पीएम गतिशक्ति मास्टर प्लान के तहत विकसित हो रहा यह विशाल एक्सप्रेसवे कॉरिडोर न केवल उत्तर भारत और पूर्वी भारत के बीच यात्रा के समय को आधा कर देगा, बल्कि देश के लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई के पूरे समीकरण को हमेशा के लिए बदल कर रख देगा।

पांच बड़े राज्यों से होकर गुजरेगा नया कॉरिडोर, अंतरराज्यीय संपर्क को मिलेगी नई रफ्तार

यह विशाल हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे नेटवर्क भारत के पांच प्रमुख राज्यों—दिल्ली (एनसीआर/हरियाणा), उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल—को एक सूत्र में पिरोने का काम कर रहा है। दिल्ली से यात्रा शुरू करने पर गाड़ियां यमुना एक्सप्रेसवे या ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और फिर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के जरिए सीधे पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली और वाराणसी के मुहाने तक पहुंचती हैं। यहां से वाराणसी-कोलकाता 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे शुरू होता है, जो बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया से गुजरते हुए झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ और बोकारो में प्रवेश करता है। इसके बाद यह कॉरिडोर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुड़ा और हुगली जिलों से होते हुए सीधे कोलकाता के पास उलुबेरिया व डानकुनी में मिल जाता है। पांच राज्यों के बीच बना यह लिंक देश का सबसे लंबा निर्बाध एक्सप्रेसवे ग्रिड साबित हो रहा है।

वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे: इस पूरे नेटवर्क की सबसे मजबूत और अहम कड़ी

इस 16-17 घंटे के सफर का असली गेमचेंजर करीब 610 किलोमीटर लंबा 'वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे' (NH-319B) है, जिसका निर्माण लगभग 35,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से किया जा रहा है। पुराने जीटी रोड पर सबसे बड़ी समस्या घनी आबादी वाले कस्बों, अनगिनत ट्रैफिक सिग्नल्स, संकरी सड़कों और स्थानीय वाहनों की वजह से होने वाले भयंकर जाम की थी। नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे पूरी तरह से शहरों की बसावट से बाहर-बाहर गुजरेगा। यह पूरी तरह 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड सड़क है, जिस पर 100 से 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गाड़ियां फर्राटा भर सकेंगी। इस नए एक्सप्रेसवे के चालू होने से अकेले वाराणसी से कोलकाता का सफर 14-15 घंटे से घटकर मात्र 6 से 7 घंटे में पूरा हो रहा है, जो सीधे दिल्ली से आने वाले ट्रैफिक को सुपरफास्ट कनेक्टिविटी देता है।

माल ढुलाई लागत में भारी गिरावट और उद्योगों के लिए आर्थिक गलियारे का निर्माण

भारत सरकार का लक्ष्य देश में लॉजिस्टिक्स लागत को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 14-16 प्रतिशत से घटाकर सिंगल डिजिट यानी 8-9 प्रतिशत पर लाना है। दिल्ली-कोलकाता एक्सप्रेसवे महाजाल इस दिशा में सबसे क्रांतिकारी कदम साबित होने जा रहा है। उत्तर भारत के कृषि उत्पादों, मैन्युफैक्चरिंग गुड्स, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स को कोलकाता पोर्ट और हल्दिया पोर्ट तक बेहद कम समय और न्यूनतम ईंधन खर्च में पहुंचाया जा सकेगा। दूसरी तरफ, झारखंड और पश्चिम बंगाल के कोयला, इस्पात (स्टील), सीमेंट और खनिज उद्योगों से कच्चा माल उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब के औद्योगिक क्षेत्रों तक बिना किसी अड़चन के पहुंचेगा। ट्रकों की टर्नअराउंड स्पीड दोगुनी होने से माल ढुलाई भाड़े में भारी कमी आएगी, जिसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को सस्ती वस्तुओं के रूप में मिलेगा।

बिहार, झारखंड और बंगाल के पिछड़े जिलों में खुलेंगे रोजगार और पर्यटन के नए द्वार

यह एक्सप्रेसवे केवल लंबी दूरी के यात्रियों के लिए ही फायदेमंद नहीं है, बल्कि यह उन जिलों के लिए जीवनरेखा बनकर उभर रहा है जो दशकों से मुख्यधारा के आर्थिक विकास से कटे हुए थे। बिहार का औरंगाबाद और सासाराम (शेरशाह सूरी का मकबरा), विश्व प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ स्थल बोधगया, झारखंड का पारसनाथ (जैन तीर्थ स्थल), हजारीबाग के नेशनल पार्क और पश्चिम बंगाल के टेराकोटा कला के लिए प्रसिद्ध बांकुड़ा और बिष्णुपुर जैसे पर्यटन स्थल अब राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से सीधे और सुपरफास्ट जुड़ जाएंगे। धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन में भारी उछाल आने से स्थानीय स्तर पर होटल्स, ढाबों, लॉजिस्टिक्स पार्क्स, वेयरहाउसिंग हब्स और पेट्रोल पंप्स के जरिए लाखों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

आधुनिक इंजीनियरिंग, वे-साइड एमिनिटीज और एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम

इस हाई-स्पीड कॉरिडोर को विश्वस्तरीय सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। पूरे एक्सप्रेसवे पर हर 40 से 50 किलोमीटर की दूरी पर आधुनिक 'वे-साइड एमिनिटीज' (Wayside Amenities) स्थापित की गई हैं, जहां यात्रियों के लिए स्वच्छ फूड कोर्ट्स, आधुनिक वॉशरूम्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) फास्ट चार्जिंग स्टेशन्स, ट्रॉमा सेंटर और बच्चों के खेलने के लिए पार्क बनाए गए हैं। इसके अलावा, पूरे रूट पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के तहत हाई-डेफिनिशन पीटीजेड (PTZ) कैमरे, ओवरस्पीडिंग पकड़ने वाले सेंसर, वेदर मॉनिटरिंग सिस्टम और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाने के लिए 24 घंटे एंबुलेंस और हाइवे पेट्रोलिंग वैन की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

 

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