E-Rickshaw Hacking: ‘BAT-BMS’ ऐप से चलती गाड़ी बंद करने का खतरनाक प्रैंक, मजा पड़ेगा भारी, होगी 3 साल की जेल

तकनीक के इस आधुनिक दौर में जहाँ हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी बेहद आसान और डिजिटल हो रही है, वहीं साइबर खतरों (Cyber Threats) का दायरा भी तेज़ी से पैर पसार रहा है. हाल ही में एक बेहद चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ कुछ शरारती तत्व सड़क पर चलते हुए ई-रिक्शा (E-Rickshaw) को दूर बैठे ही अचानक बंद कर दे रहे हैं. इसके लिए वे अपने स्मार्टफोन में 'BAT-BMS' नाम के एक साधारण ऐप और ब्लूटूथ कनेक्शन (Bluetooth Connection) का इस्तेमाल कर रहे हैं.
पहली नज़र में कुछ लड़कों को यह एक साधारण मज़ाक, रील बनाने का जरिया या प्रैंक (Prank) लग सकता है, लेकिन कानूनी और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज़ से यह एक बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध है. आइए विस्तार से जानते हैं कि यह पूरा तकनीकी खेल क्या है और देश का कानून इस पर क्या सख्त रुख अपनाता है.
ई-रिक्शा अब सिर्फ एक गाड़ी नहीं, पहियों पर दौड़ता कंप्यूटर है
आज के समय में भारतीय सड़कों पर चलने वाले ई-रिक्शा तकनीकी रूप से काफी एडवांस और डिजिटल हो चुके हैं. इंटरनेशनल कमीशन ऑन साइबर सिक्योरिटी लॉ के चेयरमैन और देश के जाने-माने साइबर कानून विशेषज्ञ पवन दुग्गल के मुताबिक, आज का आधुनिक ई-रिक्शा महज लोहे और पहियों का एक सामान्य वाहन नहीं है, बल्कि यह कानूनी रूप से एक 'डिजिटल कंप्यूटर सिस्टम' की तरह काम करता है.
चूंकि यह पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल फॉर्मेट पर ऑपरेट होता है, इसलिए इसमें बाकायदा डेटा स्टोरेज, मेमोरी फंक्शन्स और इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोलिंग यूनिट्स (ECUs) होते हैं. इसी एडवांस तकनीक का गलत फायदा उठाकर कुछ हैकर्स और प्रैंकस्टर्स इसके सिस्टम में अनधिकृत रूप से (Unauthorized Access) सेंध लगा रहे हैं.
BAT-BMS ऐप और ब्लूटूथ का यह खतरनाक और जानलेवा खेल
दरअसल, ई-रिक्शा की जान उसकी लिथियम-आयन (Lithium-ion) बैटरी होती है. इस बैटरी की सुरक्षा, चार्जिंग और ओवरहीटिंग को मैनेज करने के लिए उसमें एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) लगा होता है. बाजार में मौजूद 'BAT-BMS' जैसे कई मोबाइल ऐप्स इस बीएमएस को ब्लूटूथ के जरिए ट्रैक और मॉनिटर करने की आधिकारिक सुविधा देते हैं.
लेकिन समस्या तब खड़ी होती है जब सड़क पर चल रहे किसी ई-रिक्शा के ब्लूटूथ सिग्नल को ये शरारती तत्व अपने फोन से बिना मालिक की अनुमति या जानकारी के कनेक्ट कर लेते हैं. एक बार कनेक्शन स्थापित होने के बाद, ऐप के भीतर मौजूद रिमोट कंट्रोल फीचर का इस्तेमाल करके वे बैटरी की मेन पावर सप्लाई को अचानक 'कट' (Power Off) कर देते हैं. इसके परिणामस्वरूप चलती हुई गाड़ी बीच सड़क पर, बिना किसी चेतावनी के अचानक ठप हो जाती है. यह न केवल रिक्शा चालक और उसमें बैठी सवारियों के लिए मानसिक परेशानी का सबब है, बल्कि पीछे से आ रहे तेज रफ्तार वाहनों के कारण एक भीषण और जानलेवा सड़क हादसे को सीधा न्यौता देता है.
मज़ाक नहीं, सीधे जेल ले जाएगी यह हरकत: आईटी एक्ट की धाराएं सक्रिय
अगर कोई युवा या सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर इसे महज मनोरंजन या यूट्यूब प्रैंक वीडियो बनाने का जरिया समझ रहा है, तो उसे तुरंत सावधान होने की जरूरत है. साइबर पुलिस और कानून के जानकारों ने साफ किया है कि यह कोई खेल नहीं बल्कि एक गंभीर साइबर अपराध (Cyber Crime) है. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 (Information Technology Act 2000) की धारा 43 और धारा 66 के तहत यह पूरी तरह से दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है. किसी भी वाहन या डिवाइस के कंप्यूटर नेटवर्क में उसकी मर्जी के बिना अवैध प्रवेश करना डेटा चोरी और सिस्टम हैकिंग माना जाता है.
3 साल की कठोर जेल की सजा और 5 लाख रुपये का भारी जुर्माना
कानूनी तौर पर इस तरह के डिजिटल प्रैंक के लिए बेहद सख्त सजा के प्रावधान तय किए गए हैं:
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जेल की सजा: यदि कोई भी व्यक्ति जानबूझकर, मज़ाक में या किसी धोखाधड़ी/बदला लेने के इरादे से किसी के ई-रिक्शा को इस तरह रिमोटली बंद करता हुआ रंगे हाथों या सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पकड़ा जाता है, तो उसे 3 साल तक की जेल की कठोर सजा हो सकती है.
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आर्थिक जुर्माना: जेल के साथ-साथ दोषी पाए जाने पर उस व्यक्ति पर 5 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना भी लगाया जा सकता है. डिजिटल सुरक्षा के उल्लंघन और सार्वजनिक जीवन को खतरे में डालने को लेकर देश की अदालतें और पुलिस बेहद सख्त रुख अपना रही हैं.
डिजिटल हैकिंग से बचने के लिए ई-रिक्शा चालक तुरंत करें ये उपाय
इस नए तरह के साइबर खतरे या अनधिकृत रिमोट एक्सेस से खुद को और अपनी गाड़ी को सुरक्षित रखने के लिए ई-रिक्शा चालकों को अपनी तकनीक को थोड़ा अपग्रेड और सुरक्षित करना होगा:
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डिफ़ॉल्ट पासवर्ड बदलें: सबसे पहला और महत्वपूर्ण काम यह करें कि अपने ई-रिक्शा के BMS ब्लूटूथ का डिफ़ॉल्ट पासवर्ड तुरंत बदल दें. अक्सर लोग कंपनी या मैन्युफैक्चरर द्वारा दिए गए साधारण पासवर्ड (जैसे 1234, 0000 या 8888) को कभी नहीं बदलते, जिससे कोई भी बाहरी ऐप आसानी से उसे बिना अनुमति के पेयर (Pair) कर लेता है.
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कस्टम और मजबूत पासवर्ड: अपने ब्लूटूथ सेटिंग्स में जाकर एक मजबूत और कस्टमाइज्ड पासवर्ड सेट करें. ऐसा करने से कोई भी बाहरी व्यक्ति आपके चलते रिक्शा की बैटरी को रिमोटली एक्सेस नहीं कर पाएगा. अपनी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक और सतर्क रहना ही इस नए साइबर प्रैंक के खतरे से बचने का एकमात्र और अचूक उपाय है.