E20 पेट्रोल पर संसद में सरकार का बड़ा खुलासा: 2 से 6% तक घट सकता है आपकी गाड़ी का माइलेज, लेकिन जानिए क्या आपका इंजन पूरी तरह सुरक्षित है?

अगर आप भी अपनी कार या बाइक में 20 फीसदी इथेनॉल मिला हुआ (E20) पेट्रोल डलवा रहे हैं और आपको लग रहा है कि गाड़ी का माइलेज थोड़ा कम हो गया है, तो आपकी बात बिल्कुल सही है। संसद में सरकार ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि E20 ईंधन के इस्तेमाल से वाहनों का माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो सकता है। हालांकि, इसके साथ ही सरकार ने वाहन चालकों को एक बड़ी राहत भी दी है। आइए जानते हैं संसद में दिए गए इस आधिकारिक बयान की पूरी सच्चाई।
कितना घटेगा माइलेज और क्यों?
संसद सत्र के दौरान पूछे गए एक सवाल के जवाब में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से यह जानकारी दी गई। सरकार ने बताया कि सामान्य पेट्रोल के मुकाबले 20% इथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (E20) की ऊर्जा तीव्रता (Energy Density) थोड़ी कम होती है। इसी वजह से वाहनों के ईंधन की खपत में थोड़ा इजाफा हो सकता है, जिससे माइलेज में 2% से लेकर 6% तक की मामूली गिरावट देखने को मिलती है। हालांकि, यह गिरावट गाड़ी के मॉडल, चलाने के तरीके और सड़क की स्थिति पर भी निर्भर करती है।
क्या E20 पेट्रोल से खराब हो जाएगा आपकी गाड़ी का इंजन?
माइलेज में गिरावट की खबर के साथ ही कई वाहन चालकों के मन में यह डर भी था कि क्या इस पेट्रोल से इंजन के पार्ट्स खराब हो सकते हैं। इस पर स्पष्टीकरण देते हुए सरकार ने साफ किया है कि E20 पेट्रोल से गाड़ियों के इंजन पूरी तरह से सुरक्षित हैं। ऑटोमोबाइल कंपनियों ने अपने नए वाहनों को E20 फ्रेंडली बनाया है और पुराने वाहनों में भी इसके इस्तेमाल से इंजन को कोई गंभीर नुकसान नहीं पहुंचता है। व्यापक परीक्षणों में यह पाया गया है कि इंजन की लाइफ और परफॉर्मेंस पर इसका कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
E20 ईंधन पर क्यों ध्यान दे रही है सरकार?
सरकार का कहना है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम (EBP) देश के लिए एक बड़ा और दूरगामी कदम है। इससे न केवल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता भी घट रही है। इसके अलावा, गन्ने और अनाज से बनने वाले इथेनॉल से देश के किसानों की आमदनी में सीधी बढ़ोतरी हो रही है। पर्यावरण के लिहाज से भी E20 पेट्रोल पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में काफी कम कार्बन उत्सर्जन करता है, जिससे वायु प्रदूषण पर रोक लगाने में मदद मिल रही है।